ब्लॉगसेतु

ग़ौर तो कीजे के ये सजदा रवा क्यूँ कर हुआउस ने जब कुछ हम से माँगा तो ख़ुदा क्यूँ कर हुआऐ निगाह-ए-शौक़ इस चश्म-ए-फ़ुसूँ-परदाज़ मेंवो जो इक पिंदार था आख़िर हया क्यूँ कर हुआइक तराज़ू इश्क़ के हाथों में भी जब है तो वोआलम-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ से मावरा क्यूँ कर हुआदीन ओ दानिश द...
 पोस्ट लेवल : जमील मज़हरी सज़दा
देखते ही देखते जवान,पिताजी बूढ़े हो जाते हैं..सुबह की सैर में,कभी चक्कर खा जाते हैं,सारे मौहल्ले को पता है,पर हमसे छुपाते हैं...दिन प्रतिदिन अपनी,खुराक घटाते हैं,और तबियत ठीक होने की,बात फ़ोन पे बताते हैं...ढ़ीले हो गए कपड़ों,को टाइट करवाते हैं,देखते ही देखते जवान,&n...
 पोस्ट लेवल : माँ - बाप
पता है न ...एक दिन तुम भीटँग जाओगेतस्वीर मेंघर के किसीकोने मेंकिसी खूँटी पर इसीलिए...प्रेम बीज बोओउन्हें प्रेम से पालोसींचो प्रेम सेप्रेम फल पाओगेक्या धरा हैझगड़े -लड़ाई मेंप्रेम बोओगेसबके दिलों  मेंंरह जाओगे ।      लेखिका - शुभा मेहता
 पोस्ट लेवल : शुभा मेहता
हाँ अच्छी लड़कियाँ हैं हम,पीढ़ियों से अर्जित संस्कारों की हैं शबनम |  सजा इन्हीं का मुकुट,  शीश  पर ,हया का ओढ़ा  है  घूँघट मन  पर ,छलकाती हैं करुणा,नित नभ नूतन पर,हाँ अच्छी लड़कियाँ हैं हम | रस्म-ओ-रिवाज के नाज़ुक बँधन से,&n...
 पोस्ट लेवल : अनीता सैनी
पहनने वाला ही जानता है जूता कहाँ काटता हैजिसे कांटा चुभे वही उसकी चुभन समझता है !पराये दिल का दर्द अक्सर काठ का लगता हैपर अपने दिल का दर्द पहाड़ सा लगता है !अंगारों को झेलना चिलम खूब जानती हैसमझ तब आती है जब सर पर पड़ती है !पराई दावत पर सबकी भूख बढ़ जाती हैअक्सर पड़ोस...
 पोस्ट लेवल : कविता रावत
गहराती हुई शाम हैऔर उचटे हुए मन पर अबूझ-सी उदासी।कच्ची सी एक सड़क है,धान खेतों से होकर गुजरती हुईदूर तक चली जाती है —पैना-सा एक मोड़ हैऔर भटके हुऐ दो विहग।गहराती हुई शाम है,घनी पसरी हुई एक खामोशी,दूर कहीं बजती हुई बंसी के स्वर मेंआहिस्ता-आहिस्ता पलाश के फूलफूट रहे...
 पोस्ट लेवल : फाल्गुनी रॉय
नज़र-नज़र की बात हैसच-झूठ,दिन या रात हैख़ामोश हुई सिसकियाँबहते हुये ज़ज़्बात हैं लब थरथरा के रह गयेनज़रों की मुलाकात हैसाँसों की ये सरगोशियाँनज़रों की ही सौगात हैरोया है कोई ज़ार-ज़ारबिन अभ्र ही बरसात हैदिल की बिछी बिसात परनज़रों की शह और मात हैमनमर्ज़ियाँ चलती हो जबनजरो...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
इंसान बड़ा सयाना हैवह सब जानता हैकि उसे क्या चाहिए, क्या नहींनहीं रखता कभीअपने पास, अपने आसपास ग़ैरज़रूरी, व्यर्थ की वस्तुएँउन्हें फेंक देता है उठाकरकचरे के डिब्बे में प्रतिदिन।इंसान बड़ा सयाना हैनहीं फेंकता कुछ वस्तुएँ कभीकिसी भी कचरे के डिब्बे मेंबेशक वे कितनी ह...
मैंने पत्थर में भी फूलों सी नज़ाकत देखीपिस के सीमेंट बने, ऐसी शराफ़त देखीथी तेज हवा, उनका आँचल गिरा गईइस शहर ने उस रोज क़यामत देखी'मर्ज कैसा भी हो, दो दिन में चला जायेगा'तुमनें दीवार पर लिखी वो इबारत देखी?क्या बेमिसाल जश्न मनाया था गए सालउस विधायक की बड़ी जीत की दावत द...
 पोस्ट लेवल : कौशल शुक्ला
एक सिकंदर था पहले, मै आज सिकंदर हूँ अपनी धुन में रहता हूँ, मै मस्त कलंदर हूँ ताजमहल पे बैठ के मैंने ठुमरी-वुमरी गाई शाहजहाँ भी जाग गए, आ बैठे ओढ़ रजाई मै जितना ऊपर दीखता हूँ उतना ही अन्दर हूँ एक सिकंदर था पहले, मै आज सिकंदर हूँ कार्ल मा...
 पोस्ट लेवल : जख़ीरा गुलज़ार