ब्लॉगसेतु

मै भारत-भूमि !ना जाने कब सेढूंढ रही हूँअपने हिस्से कीरोशनी का टुकड़ा….लेकिन पता नहीं क्योभ्रष्ट अवव्यस्था के ये अँधेरेइतने गहरे हैंकि फ़िर फ़िर टकरा जाती हूँअंधी गुफा की दीवारों से…बाहर निकल ही नहीं पातीइन जंजीरों से,जिसमे मुझे जकड़ कर रखा हैमेरी ही संतानों नेउन सं...
मैं अदना नारीसब कहते है कैसे लिख लेती होकितना हुनर हैमैं मुस्करा जाती हूंऔर तुम्हें एक राज बताती हूंलिखने को हुनर नही दिल चाहिएशब्द नही समझ चाहिएकोई कहानी नहींबस दर्द चाहिएंकोई बनावट नहीअसलियत चाहिएंकौन क्या लिखताकैसे लिखतामैं नही जानतीबस दिल ने जो कहामैं बस वहीं&n...
 पोस्ट लेवल : नीलम गुप्ता
निज टूटे हुए दिल ले, सभी मेरे पास आते हैं।हम जोड़ेगे इसे ठीक से, लिए विश्वास आते हैं।भरी है टोकरी दिल के, टुकड़े से यहां देखो,इन्हीं टुकड़ों को ले मायुस, बड़ी उदास आते हैं।जुटाकर दिल के टुकड़े को,सजाये हैं करीने से,न कोई उल्टा-सीधा हो, यही एहसास आते हैं।इसे रख सामन...
शर्म थी वो तुम तो शर्म कर ही सकते थेदामन में उसके इज्जतें भर भी सकते थे।माना के बेबसी में वो बदन बेचती रहीसमझौता हालातों से तुम कर भी सकते थे।लाज शर्म की उसने तुम्हें पतवार सौंप दीरहमो करम की उसपे नजर कर भी सकते थे।रिश्ता बनाके उसका तुम हाथ थाम लेतेकोठा कहते हो उसे...
 पोस्ट लेवल : पावनी जानिब
तुम्हारे साथ गुज़री याद के पहरों में जीते हैं,हमें सब लोग कहते हैं कि हम टुकड़ों में जीते हैं,हमें ताउम्र जीना है बिछड़ कर आपसे लेकिन,बचे लम्हों की सौगातें चलो कतरों में जीते हैं,वही कुछ ख्वाब जिनको बेवजह बेघर किया तुमने,दिये उम्मीद के लेकर मेरी पलकों पे जीते हैं,तुम्...
 पोस्ट लेवल : अस्तित्व "अंकुर"
काव्य ककहरा जिससे सीखा भूल गई उन हाथों को स्वार्थ सिद्धि के खातिर अपनी तोड़ दिया सब नातों को कलम पकड़ना नहीं जानती शब्द शब्द सिखलाये थे हर पल हर क्षण साथ निभाकर अक्षर ज्ञान कराये थे जब-जब उसने काव्य रचावो पल पल साथ निभाये थे शब्द शब्द को सदा सुधारे अतुलित नेह दिखाये...
 पोस्ट लेवल : डॉ. अंशु सिंह
मैं अच्छी नहीं हूंमुझे मेहँदी लगानी नहीं आती। ना ही रंगोली बनानी आती। मैं बंद बोतल के ढक्कन जैसी। मुझे दही जमानी नहीं आती। ना कभी व्रत की पति के लिए। ना कभी बेटा के लिए। मैं सब जैसी औरत नहीं। मुझे गढ़ी कहानी नहीं आती। मुझे ढोल बजाना नहीं आता। ना नाचना गाना आता। मैं...
 पोस्ट लेवल : पूजा गुप्ता
मुहब्बत क्या हुई  जैसे  इबादत होती जाती है|कि सजदे में झुकने की आदत होती जाती है||चलाओ तीर कितने भी सितम चाहे करो जितने|जो उल्फत हो गई इक बार तो बस  होती जाती है ||वृहद सरिता  प्रेम मेरा लहर सा इश्क़ है तेरा|जो उतरोगे तले इसके कयामत होती जाती है...
 पोस्ट लेवल : अँजू डोकानिया
चाँदचुपके से खिड़की के रास्ते कमरे मेंरोज आता है लड़की अपने करीब आता देखमुस्कुराती हैदेखती है देर तक छू लेती हैमन ही मन उसेचाँद लड़की से कुछ कहने कासाहस नहीं जुटा पातालड़की संकोच की जमीन परचुपचाप बैठी रहती हैचाँद और लड़कीयुगों युगों से...
रंगों का मौसम पतंगों का मौसम तिल-गुड़ की सौंधी मिठास का मौसम लो शुरू हुआ नया साल  ।१।मौसम का मिज़ाज बदलाहवा का अन्दाज़ और बदली सूर्य की...