ब्लॉगसेतु

गर चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे क्या इनसे किसी कौम की तक़दीर बदल दोगे जायस से वो हिन्दी की दरिया जो बह के आई मोड़ोगे उसकी धारा या नीर बदल दोगे जो अक्स उभरता है रसख़ान की नज्मों में क्या कृष्ण की वो मोहक तस्वीर बदल दोगे तारीख़ बताती है तु...
वफा के बदले वफा क्यूँ नहीं देते।जख्म दिया है दवा क्यूँ नहीं देते।।आंख है नम जो तुम्हारी साथ से।तुम उसे अभी भुला क्यूँ नहीं देते।।मुहब्बत नहीं जब तुम्हारी रूह से।गुनाह की उसे सजा क्यूँ नहीं देते।।-प्रीति श्रीवास्तव
फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहरयह वह शहर नहीं रहा अबजिस शहर में '' मैं कई वर्षो पहले आया था ''अब तो यह शहर हर समय भागता नजर आता है !कच्ची सड़के ,कच्चे मकानोंऔर साधन के नाम परपर साईकल पर चलने वाले लोग रहते है अब आलिशान घरों मेंऔर दौड़ते है त...
 पोस्ट लेवल : संजय भास्कर
मौन हृदय के आसमान परजब भावों के उड़ते पाखी,चुगते एक-एक मोती मन का फिर कूजते बनकर शब्द।कहने को तो कुछ भी कह लोन कहना जो दिल को दुखाय,शब्द ही मान है,शब्द अपमानचाँदनी,धूप और छाँव सरीखे शब्द।न कथ्य, न गीत और हँसी निशब्दरूंधे कंठ प्रिय को न कह पाये मीत,पीकर हृदय की...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
मौन वेदनाहँसते हुए मुख नम हैं नैना---------कर्म है सिंधुदूर अभी साहिलनियति बिंदु।---------मन हिलोरसजे याद की बज़्मप्रेम ही ठौर।-------दिल को भायेसदा से ही सागरनैना रिझाये।------------महके यास्मीं जूही,चंपा,कली सीसजी सी ज़मीं।डॉ.यासमीन ख़ान 02-05-2019
शौक़ सारे छिन गये, दीवानगी जाती रहीआयीं ज़िम्मेदारियाँ, तो आशिकी जाती रहीमांगते थे ये दुआ, हासिल हो हमको दौलतेंऔर जब आयी अमीरी, शायरी जाती रहीमय किताब-ए-पाक़ मेरी, और साक़ी है ख़ुदाबोतलों से भर गया दिल, मयकशी जाती रहीरौशनी थी जब मुकम्मल, बंद थीं ऑंखें मेरीखुल गयी आ...
सात रंग काछाता बनकरकड़ी धूप में तुम आती हो ।अलिखितमौसम के गीतों कोमीरा जैसा तुम गाती हो ।जब सारा संसार हमारा साथछोड़कर चल देता है,तपते हुएमाथ पर तेराहाथ बहुत सम्बल देता है,आँगन मेंचाँदनी रात हो,चौरे पर दीया-बाती हो ।कभी रूठनाऔर मनानाइसमें भी श्रृंगार भरा है,बादल...
क्या लिखूँ मैं,मेरे ख़ुदा मुझे एक कविता चाहिए।कभी न सही अभी और इसी वक़्त चाहिए।मेरे ख़ुदा मुझे एक कविता चाहिए, ताज न शोहरत चाहिए।मेरे ख़ुदा मुझे कुछ शब्द चाहिए।लिख सकूँ दिल की बात  टूटी बिखरी यादों के अल्फ़ाज़ढूँढ रही स्वछंद छंद।ऐसी पंक्ति की कवि...
याद चारकोल स्केच है धीरे-धीरे मन की पृष्ठभूमि में घुलने लगती हैतुम्हारा छूना एक स्थायी गोदना रूह के माथे पर धुंधलाने लगा हैआसमान काले और सफ़ेद के बीच नीला होना भुला चुका हैतुम्हारी मोहब्बतदीमक बन ख़ोखलाकर रही है मेरे दिल को-पूजा प्र...
रजतरश्मियों की छाया में धूमिल घन सा वह आता;इस निदाघ के मानस में करुणा के स्रोत बहा जाता !उसमें मर्म छिपा जीवन का,एक तार अगणित कंपन का,एक सूत्र सबके बंधन का,संसृति के सूने पृष्ठों में करुणकाव्य वह लिख जाता !वह उर में आता बन पाहुन,कहता मन से, अब न कृपण बन,मानस की निध...