ब्लॉगसेतु

आख़िर में हम मिल गए, अच्छा हुआ,बाकी सब हम भूल गए, अच्छा हुआ ।मैं मुझ में नहीं हूं, तुम ख़ुद में नहीं हो,दूजे की रूह में घुल गए, अच्छा हुआ ।मुराज़ई हुई सी थी ज़िंदगियां अपनी,दिल से दिल तक खिल गए, अच्छा हुआ ।ख़ुदा ने लिखा था और हो गया, देखो,नसीब अपने खुल गए, अच्छा हुआ ।आ...
 पोस्ट लेवल : डॉ. अख़्तर खत्री चेतन
मुद्दतों बाद उसका भी वक्त आयाजब वह भी कुछ कह पायीसहमत हो पति ने आज सुनावह भी दिल हल्का कर पायीआँखों में नया विश्वास जगाआवाज में क्रंदन था उभराकुचली सी भावना आज उठीसोयी सी रुह ज्यों जाग उठीहाँ!बेटी जनी थी बस मैंनेतुम तो बेटे ही पर मरते थेबेटी बोझ, परायी थी तुमकोउससे...
 पोस्ट लेवल : सुधा देवरानी
हिन्दी ब्लॉगरों के लिए ब्लॉगर ऑफ द ईयर 2020 के लिए नामांकन शुरूयदि आप हिन्दी ब्लॉगर है तो यह सूचना आपके लिए ही है। आप ब्लॉगर ऑफ द ईयर 2020 के लिए प्रतिभाग कर सकते है। ज्ञात रहे पिछले वर्ष 2019 का ब्लॉगर ऑफ द ईयर का अवार्ड राजस्थान के डा. चन्द्रेश छतलानी जी को...
बदले समय के  साथ में  बढ़ती जनसंख्या के भार सेबड़े मकानों का चलन न रहा  रहनसहन का ढंग बदला |पहले बड़े मकान होते थेउनमें आँगन होते थे अवश्यदोपहर में चारपाई डाल महिलाएं बुनाई सिलाई करतीं थीं धूप का आनंद लेतीं थीं |अचार चटनी मुरब्बे में...
 पोस्ट लेवल : आशा लता सक्सेना
अजनबी  हूँ  इस अजनबी शहर मेंतलाश अपनेपन कि यहाँ  जारी हैहोश को होश नहीं मय के आगोश मेंख़तम न होने वाली ये बेकरारी हैअजनबी  हूँ  इस अजनबी शहर में …हर रात सी लेता हूँ मैं चाक दिल केसुबह फिर चोट खाने की  तैयारी हैअजनबी  हूँ  इस अ...
धीरे धीरे अपने सारे दूर हुवेतन्हा रहने को बूढ़े मजबूर हुवेबचपन बच्चों के बच्चों में देखूँगाकहते थे जो उनके सपने चूर हुवेनाते रिश्तेदार सभी उग आए हैंलोगों का कहना है हम मशहूर हुवेघुटनों से लाचार हुवे उस दिन जो हमकिस्से फैल गये की हम मगरूर हुवेगाड़ी है पर कंधे चार नह...
 पोस्ट लेवल : दिगंबर नासवा
वक्त चुराना होगा !काल की तरनि बहती जातीतकता तट पर कोई प्यासा,सावन झरता झर-झर नभ सेमरुथल फिर भी रहे उदासा !झुक कर अंजुलि भर अमृत का भोग लगाना होगावक्त चुराना होगा !समय गुजर ना जाए यूँ हीअंकुर अभी नहीं फूटा है,सिंचित कर लें मन माटी कोअंतर्मन में बीज पड़ा है !कितने रैन...
 पोस्ट लेवल : अनीता जी
नियम/अनुशासनसब आम लोगों के लिए हैजो खास हैंइन सब से परे हैंउन पर लागू  नहीं होतेये सबख़ास लोग तो तय करते हैंकब /कौन/ कितना बोलेगाकौन सा मोहराकब / कितने घर चलेगायहाँ शह भी वे ही देते हैं और मात भीआम लोग मनोरंजन करते हैं  आम लोगों का रेमोटख़ास लोगों के ह...
 पोस्ट लेवल : नादिर खान
आज बीमार सा लगता है मेरा ये शहर कभी गुलजा़र हुआ करता था हर तरफ हुआ करती थी ताजा हवा ...जिसके झोंके से मिलता था सुकून .पेड़ों की शाखों पर गाते थे पक्षी ..आज देखो तो बस धुआँ ही धुआँ खाँसते लोग ...प्रदूषण के मारे बेहाल .......
 पोस्ट लेवल : शुभा मेहता
20 मार्च "विश्व गौरैया दिवस" पर विशेष : "गौरैया" याद आ रही है...करीने से बँधी चोटियाँआँगन में खेलती बेटियाँगुड्डा-गुड़िया, गोटी-चिप्पी,आइ-स्पाइस, छुआ-छुईचंदा-चूड़ी, लँगड़ी-बिच्छीयाद आ रहा है...गाँव का पुराना घरघर के सामने खड़ा पीपल का घना...
 पोस्ट लेवल : ई.गणेश बागी गौरैया