ब्लॉगसेतु

221.  2121.  1221. 212मतला❣आंखों के आगे गिर रहे पत्ते चनार केआंसू लहू के टपके दिले दाग दार के ।।❣हुस्ने मतलासोचा किये कि जाएंगे मौला के द्वार पेसपने अधूरे रह गए ग़म बेशुमार के।।❣छाया यहाँ  नहींअब शायद इसी लिएपेड़ों के कौन ले गया ज़ेवर उतार के ।।❣ ...
 पोस्ट लेवल : अरूणिमा सक्सेना
मैं सूरदास की दृष्टि बनीतुलसी हित चिन्मय सृष्टि बनीमैं मीरा के पद की मिठासरसखान के नैनों की उजासमैं हिन्दी हूँ ।।मैं सूर्यकान्त की अनामिकामैं पन्त की गुंजन पल्लव हूँमैं हूँ प्रसाद की कामायनीमैं ही कबीरा की हूँ बानीमैं हिन्दी हूँ ।।खुसरो की इश्क मज़ाजी हूँमैं घनानंद...
 पोस्ट लेवल : मैं हिन्दी हूँ
बारिश में मै जब घर वापस आयी....भाई ने पूछा, "छाता लेकर क्यों नहीं गयी थे?दीदी ने सलाह दी, "बारिश रुकने का इन्तजार करती"पापा ने गुस्से में बोला, "जब ठण्ड लग जाएगी तब मालुम पड़ेगा"लेकिनमेरी माँ मेरे बाल सुखाती हुई बोली, "ये बारिश भी न, थोडा देर रुक नहीं सकती थी&...
 पोस्ट लेवल : Love You Mom
हाँ मौन के भी "शब्द" होते हैंऔर बेहद मुखर भीचुन -चुन कर आते हैं ये उस अँधेरे सेजहाँ मौन ख़ामोशी से पसरा रहता हैबिना शिकायत -बैठे-बैठे न जाने क्या बुनता रहता है .. ?शायद शब्दों का ताना-बनाऔर ये शब्द विस्मित कर देते हैंतब.... जब वो सामने आते हैंप्रेम की एक नयी परिभाष...
 पोस्ट लेवल : गुन्जन
सिसकती है डाली हवा रो रही है।कली अधखिली फिर से रौंदी गई है।।फ़िज़ा में उदासी घुली इस तरह अब,जुबां सिल गयी आँख में भी नमी है।मेरी ख़ैर ख़्वाही का दावा था करता,तबाही मेरी देख लब पर हँसी है।हुए तन्हा हम ज़िन्दगी के सफ़र में,लगे अपनी सूरत ही अब अजनबी है।यकीं है मुझे जिसकी...
औरत का दर्दआजीवन पराश्रितकहने को तो घर की लक्ष्मीहक़ीक़त मेंलाचार और विवश।जन्मने से पहलेजन्मने के बाद न जानेकब दबा दिया जायइसका गला।तरेरती आँखें नोचने को तत्परन घर, न बाहर रही अब सुरक्षित,जीवन की रटनाजीवनभर खटनादूसरों की खातिरखुद को होम करना।-दिनेश ध्यानी
पूस की रातखुला आसमाँ औरआवारा कुत्ते!क्या कहते हैं?भौं-भौं करके ये आवारा कुत्ते!रात भर येखुली जंग लड़तेठिठुरन से ।अगले दिनधूप से बतियाते आवारा कुत्ते!हाड़ कँपाएँठंड की लम्बी रातेंखुला आसमाँ।सहनशक्तिओढ़कर सो जाते आवारा कुत्ते!चन्द टुकड़ेरोटियाँ खाकरकेप...
जब मन उदास होता हैऔर तुम्हारा साथ नहींमिलतातो तुम्हारे लिखे शब्दपढ़ लेती हूँहर बार उन्हें पढ़ करचेहरे पर मुस्कुराहटतैर जाती हैसंतोष से भर उठता है मनके दुनिया के एक कोने मेंकोई है जो मुझे मुझसे बेहतरजानता हैजो हर बार कुछ ऐसा महसूसकराता है की जिंदगी सेप्यार हो जाता हैज...
 पोस्ट लेवल : रेवा टिबड़ेवाल
हिंदी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार स्मृतिशेष किशन सरोज जी का निधन 8 जनवरी 2020 को हुआ। वे  काफी समय से बीमार चल रहे थे, हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही थी और कुछ दिनों से लोगों को पहचान भी नहीं पा रहे थे।प्रस्तुत है उनकी एक कवितानागफनी आँचल...
 पोस्ट लेवल : किशन सरोज
फ़ोन की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया।दरवाज़े की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया।अलार्म की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया।एक दिनमौत की घण्टी बजी...हड़बड़ा कर उठ बैठा —मैं हूँ... मैं हूँ... मैं...
 पोस्ट लेवल : कुंवर नारायण