ब्लॉगसेतु

सोनोग्राफी क्लिनिक के अन्दरएक महिला नेथरथराते होठों सेएकान्त में..कहाघर वाले मेरा ..करवाना चाहते हैंपरीक्षणजानना चाहते वेलड़का है या फिर लड़कीअन्तरात्मा मेरीधिक्कारती है मुझकोमैडम आप ही कोई दीजिए सुझावकह दीजिए आपअगर आपने यह परीक्षण करवायातो प्रसव मैं नही...
 पोस्ट लेवल : यशोदा अग्रवाल
दैणा होया रे खोली का गणेशा हो सेवा करूंल ।(1-अर्थ= दैणा होया= (कृपा करना),  खोली =(मुख्य द्वार पर स्थापित)2दैणा होया रेपंचनाम देवताअसीक दिया ।( 2- असीक =आशीष)3मेरो पहाड़हरयूँ  छ भरयूँआंख्यों मां  बस्युं ।(3- अर्थ -हरयूँ  छ भरयूँ =ह...
 पोस्ट लेवल : हाइकु कमला निखुर्पा
वक़्त  ने   लिखे  अल्फ़ाज़,ज़िंदगी  की नज़्म  बन  गयी, सीने में दबा, साँसों ने लिया संभाल, अनुभवों  की  किताब  बन गयी  |होठों की मुस्कान, न भीगे  नम आँखों से,ख़ुशी का आवरण गढ़ गयी,शब्दों को सींचा स...
 पोस्ट लेवल : अनीता सैनी
कही तुमने बार-बार वो बातेंजिनका मेरे लिएन कोई अर्थ हैना ही अस्तित्वजो मैं पढ़ना चाहूँतुम्हारी आँखों की अनदेखी लिपियाँकहो, कौन सी कूट काइस्‍तेमाल करूं !ढूंढ रही हूँ कोई ऐसा स्रोतऐसी किताबजो नयनों की भाषा कोशब्‍दों में बदलती होहै ये ईसा पूर्व की, यासोल...
 पोस्ट लेवल : रश्‍मि शर्मा
छूकर मेरी पलकें मेरा सपना चला गयाकुछ यूँ लगा जैसे कोई अपना चला गया !खाली पड़ा हुआ था, जो मुद्दत से बंद थारहकर उसी मकान में मेहमां चला गया !ले गया कोई हमें, हमसे ही लूटकरइक अजनबी के संग दिल-ए-नादां चला गया !आँखें तो कह रही थीं, रोक लो अगर चाहोजाने के बाद फिर ये ना कह...
 पोस्ट लेवल : मीना शर्मा
खेत, पीपल, घर, कुआँ, पोखर मिलेगाक्यों है ये उम्मीद वो मंज़र मिलेगातुम गले लगना तो बख्तर-बंद पहनेदोस्तों के पास भी खंज़र मिलेंगाकूदना तैयार हो जो सौ प्रतीशतभूल जाना की नया अवसर मिलेगाइस शहर में ढूंढना मुमकिन नहीं हैचैन से सोने को इक बिस्तर मिलेगादेर तक चाहे शिखर के बी...
 पोस्ट लेवल : दिगंबर नासवा
जिस दिनमैं मर जाऊंगाघर के सामने वाला पेड़कट  जाएगाउजड़ जाएंगेकई जोड़े घोसलेउनपर नहीं चहचहाएंगीगौरैया मैनागिलहरियां भीसुबह से शाम तकअटखेलियां नहीं करेंगीकोई नहीं रखेगा इन चिड़ियों के दाना और पानीअपनी व्यस्तता से निकाल कर दो पलपहली मंजिल की बैठकखाने की खिड़कियाँजहाँ...
 पोस्ट लेवल : अरुण चन्द्र रॉय
जेठ की इस तपती दुपहरी मेंहाल -बेहालपसीने से लथपथ जब काम खत्म कर वो निकली बाहर घर जाने को बडी़ गरमी थी प्यास से गला सूखा.......घर पहुँचने की जल्दी थी वहाँ बच्चे कर रहे थे इंतजार उसका सोचा ,चलो रिक्षा कर लूँफिर अचानक...
 पोस्ट लेवल : शुभा मेहता
सड़क के बीचों बीच भूल गयी अपना पता नाम, शख्सियतगर्म तवा छू लिया सोचके कि ठंडी सुराही रखते थे पहले वहाँ चाय में नमक है सब्ज़ी में दूध उड़ेलते ही हवा को घुटन होने लगती हैआँसू हैं या पसीना कोई चखे तो जाने चेहरा भीग गया है...
माँ तेरा बचपन देख आया हूँ माँ तुझे खेलता देख आया हूँ मैंने देखा तुम्हें अपनी माँ की गोद में रोते देखा तुम्हें थोड़ा बड़ा होते मिटटी सने हाथ देखे तुम्हारे खिलौने भरे हाथ देखे तुम्हारे तुम्हारी मासूम हँसी देखी तुम्हारा रोना देख...
 पोस्ट लेवल : शिवनाथ कुमार माँ