ब्लॉगसेतु

एक मिठासमन की मन से हैजश्‍न ईद काईदी ईद कीसंग आशीषों के येजो नवाजतीचाँद ईद कानज़र जब आयेईद हो जाएपाक़ीजा रस्‍मनिभाओ गले मिल ईद  के दिननेकअमलरोज़ेदार के लिएजश्‍न ईद का दुआ के संगजब भी ईदी मिलेचेहरा खिले-सीमा सिंघल "सदा"
 पोस्ट लेवल : सीमा सदा
हमने उनको पास बुलाया लेकिन वो ही आ न सकेख़त में सब कुछ लिख न सके, दिल भी अपना दिखला न सकेदिन, हफ़्ते, माह बीत गए अब तो , कितने ही साल हुएना आना था आ  न सके, संदेसा तक भिजवा न सकेबचपन बीता और जवानी भी अब तो लाचार हुईपागल दिल में आस अभी है, इसको हम समझा न सकेलगता...
 पोस्ट लेवल : एक मंच से
आज यह कड़ा निर्णय लेते हुए निकुंज की आँखों के सामने उसकी पूरी जिंदगी एक चलचित्र की भाँति घूम गई। उसे आज भी याद है वह शाम जब मम्मी-पापा ने उसे उसकी ज़िन्दगी से परिचित कराया था कि वह एक हिजड़ा है। पर यह सब बताने से पहले ही उसे इतना सशक्त बना दिया था कि यह बात उसे अपने ल...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कुंज से
आँखों में है चाँदनी, होठों पर अब गान।मन से मन है मिल गया, त्यागा जब अभिमान ।।1।।तुलसी चौरा सिंचती, देती संध्या दीप।माँ के मन में प्रार्थना, सब जन रहें समीप।।2।।जीवन रैना ढल रही, पाया कभी न चैन।मिल जाये अब एक छवि, तरसें कोरे नैन।।3।।सूखे पत्ते टूटकर, करते हैं अफ़सोस।...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कुंज
फिक्र बिलकुल न करें आग बुझाने वाले। पानी पानी हैं सभी आग लगाने वाले।मुझको अहसासे-मुहब्बत पे गुमाँ है लेकिन,उनको अहसास करा देंगे कराने वाले।सिर्फ दिखते हुए दाँतों से हमें क्या लेना,दाँत हाथी के अलग होते है खाने वाले।कैसे पहचाने कोई आज किसी इंसाँ को,क्यूँकि लाखो...
यूँ तो शहर से शहर सट गयेहम भाषा मज़हब में बट गयेदेखी जो उनके चेहरे की रंगतहम उनकी राहों से ख़ुद हट गयेख़त्म हो रहा दौर अब वह पुरानापरिवार चार बंदों में बट गयेक्या जान पाएँगे हम दर्द उनकाआज़ादी की ख़ातिर जो सर कट गयेजुनूं चढ़ रहा पैसे का इस क़द्रअब जीवन के मूल्य घट गयेऊँची...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कुंज
लड़की - १लड़कीसोचा करो बोलने से पहलेक्योंकि तुम्हारे बोलने सेडोलने लगती हैपैरों के नीचे की धरतीसंकट में पड़ जाते हैं अस्तित्व।.....लड़की - २लड़कीतुम्हारे लबों पर बैठी ख़ामोशी चाबी हैघर की ख़ुशी कीजिससे खुल जाता हैख़ुशी का कोई भी दरवाज़ापरउस दरवाज़े के भीत...
 पोस्ट लेवल : साहित्यकुंज
एक लड़की थी रात को ऑफिस से वापस लौट रही थीदेर भी हो गई थी... कुछ डरी सी कुछ सहमी सी....पहली बार ऐसा हुआ काम भी ज्यादा था और टाईम का पता ही नहीं चला वो सीधे ऑटो स्टैण्ड पहुँचीवहाँ एक लड़का खड़ा थावो लड़की उसे देखकर डर गईकि कहीं उल्टा सीधा ना हो जाएतभी वो ल...
मुट्ठी भर सपनेदो चार अपने  ख़ुशी के चार पलतुम्हारी याद नहीं, तुमबस.…जिंदगी सेइतना ही तो माँगा थाक्या ये बहुत ज्यादा था !!!-:-दुःख मेंरोने को एक कांधासुख में ... झूलने को दो बाहेंवारी जाने कोएक प्यारी सी मुस्कानसपने समेटने को  जीवन से भरी दो आँखेंबस.…जिंदग...
सावन का महीना होहर बूंद नगीना होक़ूफ़ा हो ज़बां उसकीदिल मेरा मदीना होआवाज़ समंदर होऔर लफ़्ज़ सफ़ीना होमौजों के थपेड़े होंपत्थर मिरा सीना होख़्वाबों में फ़क़त आनाक्यूं उसका करीना होआते हो नज़र सब कोकहते हो, दफ़ीना हो- वज़ीर आग़ा क़ूफ़ा--ऐसा शहर जहाँ झूठे लोग रह...