ब्लॉगसेतु

सावन का महीना होहर बूंद नगीना होक़ूफ़ा हो ज़बां उसकीदिल मेरा मदीना होआवाज़ समंदर होऔर लफ़्ज़ सफ़ीना होमौजों के थपेड़े होंपत्थर मिरा सीना होख़्वाबों में फ़क़त आनाक्यूं उसका करीना होआते हो नज़र सब कोकहते हो, दफ़ीना हो- वज़ीर आग़ा क़ूफ़ा--ऐसा शहर जहाँ झूठे लोग रह...
दिल से उसके जाने कैसा बैर निकला जिससे अपनापन मिला वो ग़ैर निकला था करम उस पर ख़ुदा का इसलिए ही डूबता वो शख़्स कैसा तैर निकला मौज-मस्ती में आख़िर खो गया क्यों जो बशर करने चमन की सैर निकला सभ्यता किस दौर में पहुँची है आख़िर बंद बोरी से क...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कुंज
मदर्स डे....लो आ गया फिर सेमदर्स डेयद्यपि है तो येपाश्चात्य परम्परा....उन्होंने ही...किसी को महत्वपूर्ण जतानेसाल का एक दिन..उसके नाम कर दियापरन्तु......इसके विपरीतअपने भारत में....वर्ष का पूरा तीन सौ पैंसठ दिनमाँ के नाम ही तो हैसीमित नहीं यहाँ तक भीजो भी देता है जी...
 पोस्ट लेवल : मन की उपज
तुम्हारे पास आता हूँ तो सांसें भींग जाती हैमुहब्बत इतनी मिलती है कि आँखें भींग जाती हैतबस्सुम इत्र जैसा है हंसी बरसात जैसीवे जब बात करती है तो बातें भींग जाती हैतुम्हारी याद से दिल में उजाला होने लगता हैतुम्हें जब मैं गुनगुनाता हूँ तो सांसें भींग जाती हैज़मीं की गो...
 पोस्ट लेवल : मधुरिमा से
वो मुझसे कहती थीमेरे शायर ग़ज़ल सुनाओ जो अनसुनी हो जो अनकही हो कि जिसके एहसासअनछुए हों,हों शेर ऐसे कि पहले मिसरे कोसुन के मन में खिले तजस्सुस का फूल ऐसा मिसाल जिसकी अदब में सारे कहीं भी ना हो....... में उस...
 पोस्ट लेवल : तख्लीक़ नज़्म
आने से पहलेकुछ और भी चला आता हैसूचना की तरहजैसे उजाले से पहलेगुलाबी हो जाता है आकाश  मानसून के पहलेमेघ आते हैं मुआयना करनेटॉर्च जलाते हुएबूंदों के पहले कोई अंधड़अस्त-व्यस्त करता है जीवनसौंधी महक में लिपटी   याद आती है तुम्हारीबारिश से ठीक पहले. &...
अमरूदों  से लद गए हैं पेड़आंवलों की होने लगी है बरसातगूदे से भर गईं हैं सहजन की फलियाँबीते कसैले समय की तरहमैथी दाने की कड़वाहट को गुड़ में घोलकर  तैयार हो गए हैं पौष्टिक लड्डूहोड़ में दौड़ते पैकेटों के समय में शुक्रवारिया हाट से चुनकर लाई गयी है बेहतर मक...
 पोस्ट लेवल : ब्रजेश कानूनगो
           हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे है,खाने पीने की चीजों से भरे है....कहीं पर फल है तो कहीं आटा दालें है ,कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले है ,फलों की ही बात ले लो....आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं,कभी अंगूर खट्टे हैं,क...
 पोस्ट लेवल : एक मंच से
किसने ऐसा किया इशारा थाख़त मेरा था पता तुम्हारा थातुम ये कहते हो भूल जाऊँ मैंतुमने मेरा चेहरा उतारा थाकाम आई फिर अपनी ताकत हीकोई किसका यहां सहारा थाहम अदालत में झूठ कह बैठेऔर बाक़ी न कोई चारा थाफिर इकबार तुम तो सुन लेतेमैंनें तुमको अगर पुकारा थाइश्क़ में ये बात अहम...
 पोस्ट लेवल : मधुरिमा से...
ख़ुश्क इन आंखों में सुर्खियां देखी है मैंनेंमाज़ी की अपने तल्ख़ियां देखी है मैंनें।अश्क लहू बनकर ग़मे दास्तां कह रहेबेज़ुबां वक़्त की सख़्तियां देखी है मैंनें।क्या चीज़ है अमीरे शहर हक़ीक़त तेरीअहले दो आलम हस्तियां देखी है मैंनें।रोशनी मयस्सर नहीं अब तलक अंधेरे कोत...
 पोस्ट लेवल : अमर मलंग मधुरिमा से..