ब्लॉगसेतु

1212 1122 1212 22/112न पूछिये कि वो कितना सँभल के देखते हैं ।शरीफ़ लोग मुखौटे बदल के देखते हैं ।।अज़ीब तिश्नगी है अब खुदा ही खैर करे ।नियत से आप भी अक्सर फिसल के देखते हैं ।।पहुँच रही है मुहब्बत की दास्ताँ उन तक ।हर एक शेर जो मेरी ग़ज़ल के देखते हैं ।।ज़नाब कुछ तो शरारत...
ग़ैरों को अपना बनाने का हुनर है तुममेंकभी अपनो को अपना बना कर देखो ना..ग़ैरों का मन जो घड़ी में परख लेते होकभी अपनो का मन टटोल कर देखो ना..माना कि ग़ैरों संग हँसना मुस्कुराना आसां हैकभी मुश्किल काम भी करके देखो ना..कामकाजी बातचीत ज़रूरी है ज़माने सेकभी अपनो संग ग़ै...
सृष्टि से उत्पन्नब्रह्मांड के चर-अचरसमस्त जीव-निर्जीवग्रह-गोचर,नक्षत्र,उल्का,पिंडजीवन,प्रकृति का सूक्ष्म से सूक्ष्म कण,सभी अपनी निर्धारितसीमाओं से बँधेअपनी निश्चित परिधियों में घूमतेतट से वचनबद्धनिरंतर अपनेकर्मपथ पर,अपनी तय उम्र जीने कोविवश हैंक्योंकि निर्धारि...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
ठाठें मारता ज्वार से लबरेज़नमकीन नहीं मीठा समुंदरतुम्हारी आँखेंतुम्हारे चेहरे कीमासूम परछाईमुझमें धड़कती है प्रतिक्षणटपकती है सूखे मन परबूँद-बूँद समातीएकटुक निहारतीतुम्हारी आँखेंनींद में भी चौंकातीरह-रह कर परिक्रमा करतीमन के खोह,अबूझ कंदराओं,चोर तहखानों कास्वप्न...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
प्यार के, इकरार के अंदाज सारे खो गएवो इशारे, रंग सारे, गीत प्यारे खो गए।ज़िन्दगी से, हर खुशी से, रोशनी से, दूर हमइस सफर में, अब भँवर में, सब किनारे खो गए।आप आए, मुस्कराए, खिलखिलाए, क्यों नहीं?नित मिलन के, अब नयन के चाँद-तारे खो गए।ज़िन्दगी-भर एक जलधर-सी इधर रहती खुशी...
 पोस्ट लेवल : रमेशराज तेवरीकार
पूरी रात जागता रहासपने सजाता,तुम आती थीं, जाती थींफिर आतीं फिर जातीं ,परन्तुयादें करवट लिए सो रही थींसुबह,यादों ने ही मुझे झझकोराऔर जगाया,जब मै जागायादें दूर खड़ी होघूर-घूर कर मुझे देखतीऔर मुस्कुरा रहीं थींमैंने कहाचलो हटो ,आज नई सुबह हैमै नई यादों के साथ रहूँगावे...
बस एक लम्हे का झगड़ा थादर-ओ-दीवार पे ऐसे छनाके से गिरी आवाज़जैसे काँच गिरता हैहर एक शय में गईउड़ती हुई, चलती हुई, किरचेंनज़र में, बात में, लहजे में,सोच और साँस के अन्दरलहू होना था इक रिश्ते कासो वो हो गया उस दिनउसी आवाज़ के टुकड़े उठा के फर्श से उस शबकिसी ने काट ली...
 पोस्ट लेवल : कविताकोश गुलज़ार
खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो?एक ख़ामोश-सा जवाब तो है।डाक से आया है तो कुछ कहा होगा"कोई वादा नहीं... लेकिनदेखें कल वक्त क्या तहरीर करता है!"या कहा हो कि... "खाली हो चुकी हूँ मैंअब तुम्हें देने को बचा क्या है?"सामने रख के देखते हो जबसर पे लहराता शाख का सायाहाथ हिल...
 पोस्ट लेवल : कविताकोश गुलज़ार
प्लास्टिक के पेड़नाइलॉन के फूलरबर की चिड़ियाँटेप पर भूले बिसरेलोकगीतों कीउदास लड़ियाँ.....एक पेड़ जब सूखतासब से पहले सूखतेउसके सब से कोमल हिस्से-उसके फूलउसकी पत्तियाँ ।एक भाषा जब सूखतीशब्द खोने लगते अपना कवित्वभावों की ताज़गीविचारों की सत्यता –बढ़ने लगते लोगों के ब...
दुःख - दर्द की इन लहरों के बीचडूबती तैरती मैंकुछ पल जीने कीकोशिश कर लेती हूँजीवन का मतलब ही बहना हैऔर फिर मैं तो सरिता हूँशिकायतों के पिटारे ना खोलमुसीबतों के पहाड़ ना बनादुख बयाँ ना करबस बहती जादर्द ना बांट किसी सेअपने ज़ख़्म ना दिखाइन आहों को दबाये आँसू ना बहाबस...