ब्लॉगसेतु

दुःख - दर्द की इन लहरों के बीचडूबती तैरती मैंकुछ पल जीने कीकोशिश कर लेती हूँजीवन का मतलब ही बहना हैऔर फिर मैं तो सरिता हूँशिकायतों के पिटारे ना खोलमुसीबतों के पहाड़ ना बनादुख बयाँ ना करबस बहती जादर्द ना बांट किसी सेअपने ज़ख़्म ना दिखाइन आहों को दबाये आँसू ना बहाबस...
लिख रहे हैं आपमानवता परलिखिएजी चाहेजितना होस्याही कलम मेंखतम हो जाए तो और भर लोकलम को सियाही सेसोचकर जितनाअच्छा लिखना होलिख डाले..औरकरते रहोप्रतीक्षा...उसी मानवता कीजिसकी बाट आपजोह रहे हैंआनेवाली हर गाड़ीदेख लो...सब आएँगेपर......मानवताजिसकी तुम्हें प्रतीक्षा ह...
 पोस्ट लेवल : यशोदा अग्रवाल
ज़िन्दगी जी लिया हमने गमों को पी लिया हमने होश में हम जब आयेदिल को सी लिया हमने मैखाना भी ख़ाली था पैमाना भी ख़ाली था भरी थी जिन आंखों में इश्क़ वो निगाहें बड़ा सवाली था कहा दिल का भी मान लोअपने जज़्बातों को थाम लो न करो सरेआम जख़्म...
 पोस्ट लेवल : अनामिका घटक
आकाश इतना छोटा तो नहीऔर इतना थोड़ा भी नही .सारी ज़मीन ढांप ली साहिबमेरा इतना सा आँगनक्यूँ नही ढांप ले सकता ..दोपहर होने को आईऔर इक आरज़ूधूप से भरे आँगन मेंछाँव के छीटे फेंकती हैऔर कहती हैये आँगन मेरा नही ..यहाँ तो बसपाँव रखने को छाँव चाहिए मुझे ..ये घर भी मेरा नहीम...
उस रात बहुत सन्नाटा थाउस रात बहुत खामोशी थीसाया था कोई ना सरगोशीआहट थी ना जुम्बिश थी कोईआँख देर तलक उस रात मगरबस इक मकान की दूसरी मंजिल परइक रोशन खिड़की और इक चाँद फलक परइक दूजे को टिकटिकी बांधे तकते रहेरात  चाँद  और  मैं  तीनो  ही  बं...
एक नज़्म मेरी चोरी कर ली कल रात किसी नेयहीं पड़ी थी बालकनी मेंगोल तिपाही के ऊपर थीव्हिस्की वाले ग्लास के नीचे रखी थीनज़्म के हल्के हल्के सिप मैंघोल रहा था होठों मेंशायद कोई फोन आया थाअन्दर जाकर लौटा तो फिर नज़्म वहां से गायब थीअब्र के ऊपर नीचे देखासूट शफ़क़ की ज़ेब...
लुटे न देश कहीं आज लंतरानी में ।लगा रहे हैं मियां आग आप पानी में।।खबर है सबको किधर जा रही है ये कश्ती ।जनाब जीते रहें आप शादमानी में ।।अजीब शोर है खामोशियों के बीच यहाँ ।बहें हैं ख़्वाब भी दरिया के इस रवानी में ।।सवाल जब से तरक़्क़ी पे उठ रहा यारो ।।चुरा रहे हैं नज़र ल...
कौन थी वहजो एक बिन्दु-सीसो रही थी पल-पल --  मीठी-सी नींद कोआँखों में भरकरकोख की आँच मेंमाँ की सर रखकर।चाहती थी वहइस नये संसार मेंखुलकर भ्रमण करनाएक नये वजूद कोपहन कर तन परज़िन्दगी की चोखट परपहला कदम रखनाऔर फिरइन जुड़ते और टूटते पलोंसे बनी रिश्तों की सीढ़ी पर...
शाम में शामिल रंगों को ओढ़ेनज़र में बटोर के मचलते मंज़रढलते हुए दिन के चेहरे मेंमुट्ठी भर उजाला ढूँढ़्ती हूँ।पूरब की हूँ - श्यामल सीसूरज को अपनेगर्दिशों में ज़मीं की ढूढ़्ती हूँ।पहन के पैरों में पायलबहकती हवाओं कीफ़िज़ाओं के सुरीले तरन्नुम मेंगुनगुनाहटें ज़िन्दगी क...
तसव्वुर से उस के मेरा आशियाँ रोशन है,जैसे की इस सेहरा में एक दरिया रोशन है ।कल की फ़िक्र क्यूं करेगा, अंधेरों में भी वो,उस गरीब के चूल्हे में तो आसमां रोशन है ।पुकार लेती है अपनी मां को अक्सर दर्द में,दुल्हन के दिल में अब भी मायका रोशन है ।भटक गया फ़िर भी भटकेगा नहीं...
 पोस्ट लेवल : अख़्तर