ब्लॉगसेतु

अँजुरी-भर जल की आवश्यकता उन्हें होती है..; जिन्हें प्यास लगी हो..!जो जलने के अभ्यस्त हैं..;वे पानी से भी जल सकते हैं..!कविताएँ उनके लिए हैं..; जिन्हें प्रिय है-नीला रंग..!रिक्तताएँ जन्मदात्री होती हैं..; कलाओं की..! आसन्नप्रसवा वेदना से हूकता है-मन..!किसी भयावह,निर...
प्यार का गणित और अनाड़ी मैं! तुम्हारे आने के पहले भी मैं एक थीतुमसे मिलकरजब खुद को तुमसे जोड़ा तब भी….. दो की जगह एक ही रहीतुम्हारे जाने के बाद खुद को घटाया तो ना जाने क्यों सिफ़र हो गई ? क्या करूँ बहुत पेचीदा है इश़्क का हिसाब समझ ही नहीं आता!©रुचि बहुगुणा उनियालन...
आज भारतरत्न अटल जी का जन्मदिन हैशत-शत नमन..पढ़िए उनकी एक रचनाजो कल थे,वे आज नहीं हैं।जो आज हैं,वे कल नहीं होंगे।होने, न होने का क्रम,इसी तरह चलता रहेगा,हम हैं, हम रहेंगे,यह भ्रम भी सदा पलता रहेगा।सत्य क्या है?होना या न होना?या दोनों ही सत्य हैं?जो है, उसका होना सत्...
 रूह हूं मैंमुझे चांद ना कहनाउसमें तो दाग हैमुझे फूल भी ना कहनामुरझाना उसका भाग्य हैमै कोई परी भी नहींजो आसमां मे उड़ जाऊंमै कोई किताब भी नहींजो रद्दी में बेच दी जाऊंमै तेरा आज नहीं जो कल नजर ना आऊंमैं कोई परछाई भी नहींजी अंधेरे से डर जाऊंमै तो तेरे रूह क...
 पोस्ट लेवल : नीलम गुप्ता
तुमको बाँहों के बन्धन में मैं बाँध लूँ नेह से तेरे मस्तक पर मैं चूम लूँ शुभ दिवस पर तुम्हें क्या मैं अर्पण करूँ धड़कनों की मधुर तान पर झूम लूँ अपनी झोली भरूँ तेरे आशीष से भर दूँ तेरे हृदय को अमर प्यार से मन तो आकुल बहुत है तेरी याद में बाँध लू चाँद अंबर में मनुहार...
 पोस्ट लेवल : डॉ. अंशु सिंह
सकुची, लिपटी, शरमाई सी रचनाजाग जाग है प्रात हुई,सकुची, लिपटी, शरमाई ।अष्ट अश्व रथ हो सवाररक्तिम छटा प्राची निखारअरुण उदय ले अनुपम आभाकिरण ज्योति दस दिशा बिखार ।सृष्टि ले रही अँगड़ाई,जाग जाग है प्रात हुई ।कण - कण में जीवन स्पंदनदिव्य रश्मियों से आलिंगनसुखद अरुणि...
 देर ना हो जाएसिगरेट फूंकती लड़कीबदचलन कहलातीऔर लड़का मर्दकहा जातादोनों के गुर्दे क्याअलग अलग ब्रांड के हैलड़की का भूगोल नापतें नापतेंइतिहास पर नजर अटक जाती उसका कौमार्य ही उसकी पहचान कहलातीबड़े अजीब नजारे दुनिया ने दिखाए हैमर्द सुबह का भूला शाम को भ...
 गंवार हूं मेरा दर्द कुछ खास नहीं होताशीशा चुभे या कांटा मुझे अहसास नहीं होता।जब भी लगी ठोकर हम रोकर संभल गएगैर क्या अपना भी कोई पास नहीं होता।मुझे किसी के साने की कीमत क्या पतागवार न होते तो ये कच्चा हिसाब नहीं होता।महफिल थी काबिलों की हम खामोश हो गएदिल है के...
हासिल ग़ज़ल 2122 2122 2112कर   के  वादा  वो   निभाया  दोस्तो ।बा  वफ़ा   फिर  याद  आया  दोस्तो ।।वो  नज़र  पढ़  कर  गयी  जब से मुझे ।नूर   रुख़   पर  ल...
 पोस्ट लेवल : नवीन मणि त्रिपाठी
उठ समाधि से ध्यान की, उठ चलउस गली से गुमान की, उठ चलमांगते हो जहाँ लहू भी उधारतुने वां क्यों दूकान की, उठ चलबैठ मत एक आस्तान पे अभीउम्र है यह उठान की, उठ चलकिसी बस्ती का हो न वाबस्तासैर कर इस जहाँ की, उठ चलजिस्म में पाँव है अभी मौजूद जंग करना है जान की, उठ चल&...
 पोस्ट लेवल : जख़ीरा जौन एलिया