ब्लॉगसेतु

शाम में शामिल रंगों को ओढ़ेनज़र में बटोर के मचलते मंज़रढलते हुए दिन के चेहरे मेंमुट्ठी भर उजाला ढूँढ़्ती हूँ।पूरब की हूँ - श्यामल सीसूरज को अपनेगर्दिशों में ज़मीं की ढूढ़्ती हूँ।पहन के पैरों में पायलबहकती हवाओं कीफ़िज़ाओं के सुरीले तरन्नुम मेंगुनगुनाहटें ज़िन्दगी क...
तसव्वुर से उस के मेरा आशियाँ रोशन है,जैसे की इस सेहरा में एक दरिया रोशन है ।कल की फ़िक्र क्यूं करेगा, अंधेरों में भी वो,उस गरीब के चूल्हे में तो आसमां रोशन है ।पुकार लेती है अपनी मां को अक्सर दर्द में,दुल्हन के दिल में अब भी मायका रोशन है ।भटक गया फ़िर भी भटकेगा नहीं...
 पोस्ट लेवल : अख़्तर
हो काल गति से परे चिरंतन,अभी यहाँ थे अभी यही हो।कभी धरा पर कभी गगन में,कभी कहाँ थे कभी कहीं हो।तुम्हारी राधा को भान है तुम,सकल चराचर में हो समाये।बस एक मेरा है भाग्य मोहन,कि जिसमें होकर भी तुम नहीं हो।न द्वारका में मिलें बिराजे,बिरज की गलियों में भी नहीं हो।न योगिय...
 पोस्ट लेवल : डॉ. कुमार विश्वास
जब भी मुंह ढक लेता हूं, तेरे जुल्फों की छांव में.कितने गीत उतर आते हैं, मेरे मन के गांव में!एक गीत पलकों पे लिखना, एक गीत होंठो पे लिखना.यानी सारे गीत हृदय की, मीठी चोटों पर लिखना !जैसे चुभ जाता है कांटा नंगे पांव में.ऐसे गीत उतर आता है,&nb...
 पोस्ट लेवल : डॉ. कुमार विश्वास
अपने-अपने दर्द का किस्सा सुनाओ,रात भर देगी वगरना सबके घाव।कुछ सुलाओ आरज़ू को कुछ जगाओ,घटती-बढ़ती टीस की लज़्ज़त उठाओ।  फिर कोई टहनी कोई पत्ता हिलाओ,ऐ मेरे ख़्वाबरो जंगल की हवाओ।या किसी सूरज का रस्ता रोक लो,या किसी तारीक़ शब में डूब जाओ।आज इसे कमरे से बाहर फेंक...
कुछ समय सेघर भर गया हैमेहमानों से.घर ही नहीं शरीर, मन, मस्तिष्कचेतन, अवचेतन.ये मात्र मेहमान नहींमेहमानों का कुनबा है.सोचती हूँमन दृढ करती हूँ आज पूंछ ही लूँ अतिथितुम कब जाओगेपर संस्कार रोक लेते है.ये आते जाते रहते है पर क्या मजालकि पूरा कुनबाएक...
 पोस्ट लेवल : रचना दीक्षित
ये बिखराव कैसा हैजिसे समेटने के लिएमेरी हथेलियां दायरे बनाती हैंफिर कुछ समेट नहीं पाने काखालीपन लियेगुमसुम सी मन ही मन आहत हो जाती हैंअनमना सा मनख्यालों के टुकड़ों कोउठाना रखना करीने से लगानासोचना आहत होनाफिर ठहर जाना..........मन का भारी होना जब भीमहसूस कियातुम्हार...
 पोस्ट लेवल : सीमा सिंघल सदा
एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढिए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई तुम स...
 पोस्ट लेवल : निदा फ़ाजली
चांद तारों का वो हमराज़ नहीं हो सकता,ख़ुद से माइल-ए-परवाज़ नहीं हो सकतामेरे जैसा तेरा अंदाज नहीं हो सकताइक कबूतर कभी शाहबाज़ नहीं हो सकताअज़्म फ़रहाद जो रखता नहीं अपने दिल मेंवो ज़ुनु-ख़ेजी में मुमताज़ नहीं हो सकतातू ही रखता है हर राज़ मेरा पोशीदा,तेरे जैसा कोई हमराज़ नहीं हो...
 पोस्ट लेवल : अफ़ज़ल अलाहाबादी
चारों तरफ कैसा तूफान हैहर दीपक दम तोड़ रहा है !इंसानों की भीड जितनी बढी है आदमियत  उतनी ही नदारद है !हाथों मे तीर लिये हर शख्स हैहर नजर नाखून लिये बैठी है !किनारों पे दम तोडती लहरें हैसमंदर से लगती खफा खफा है !स्वार्थ का खेल हर कोई खेल रहा हैमासूमियत लाचा...
 पोस्ट लेवल : कुसुम कोठारी