ब्लॉगसेतु

औरत का दर्दआजीवन पराश्रितकहने को तो घर की लक्ष्मीहक़ीक़त मेंलाचार और विवश।जन्मने से पहलेजन्मने के बाद न जानेकब दबा दिया जायइसका गला।तरेरती आँखें नोचने को तत्परन घर, न बाहर रही अब सुरक्षित,जीवन की रटनाजीवनभर खटनादूसरों की खातिरखुद को होम करना।-दिनेश ध्यानी
पूस की रातखुला आसमाँ औरआवारा कुत्ते!क्या कहते हैं?भौं-भौं करके ये आवारा कुत्ते!रात भर येखुली जंग लड़तेठिठुरन से ।अगले दिनधूप से बतियाते आवारा कुत्ते!हाड़ कँपाएँठंड की लम्बी रातेंखुला आसमाँ।सहनशक्तिओढ़कर सो जाते आवारा कुत्ते!चन्द टुकड़ेरोटियाँ खाकरकेप...
जब मन उदास होता हैऔर तुम्हारा साथ नहींमिलतातो तुम्हारे लिखे शब्दपढ़ लेती हूँहर बार उन्हें पढ़ करचेहरे पर मुस्कुराहटतैर जाती हैसंतोष से भर उठता है मनके दुनिया के एक कोने मेंकोई है जो मुझे मुझसे बेहतरजानता हैजो हर बार कुछ ऐसा महसूसकराता है की जिंदगी सेप्यार हो जाता हैज...
 पोस्ट लेवल : रेवा टिबड़ेवाल
हिंदी के श्रेष्ठ कवि और गीतकार स्मृतिशेष किशन सरोज जी का निधन 8 जनवरी 2020 को हुआ। वे  काफी समय से बीमार चल रहे थे, हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही थी और कुछ दिनों से लोगों को पहचान भी नहीं पा रहे थे।प्रस्तुत है उनकी एक कवितानागफनी आँचल...
 पोस्ट लेवल : किशन सरोज
फ़ोन की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया।दरवाज़े की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया।अलार्म की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया।एक दिनमौत की घण्टी बजी...हड़बड़ा कर उठ बैठा —मैं हूँ... मैं हूँ... मैं...
 पोस्ट लेवल : कुंवर नारायण
लगी है चोट जो दिल पर बता नहीं सकतेये वो कसक है जो कहकर सुना नहीं सकतेतुम्हारे प्यार को भूलें तो भूल जायें हमतुम्हारी याद को दिल से भुला नहीं सकतेउन्होंने दम में किया ख़त्म ज़िन्दगी का सफ़रजो कह रहे थे कि दो पग भी जा नहीं सकतेतुम्हारे रूप को आँखों में भर लिया हमनेकि...
 ( चित्र गूगल से साभार  )बीज बो गए विषमता के आज यहाँ सापों की खेती उग आई हैक्यारी को फिर से सँवारोबीज नए डालो प्यार के हमदर्दी के,मेड़ें मत बाँधोलकीर मत बनाओ अपनों के बीच में मत करो देशका विभाजन जातिवाद और धरम के नाम पर क्योकि धरती...
 पोस्ट लेवल : संजय भास्कर
आँखें न देखते हैं आँसू, आँखों से गिरते हैं आँसू। रातों भर आँखों में रह रह कर, दो आँखों भीगते हैं आँसू। अतीत से आती हैं आँसू, अतीत को जाती हैं आँसू। जब इच्छायें टूट गए तो, तब गुप्त रूप में हैं आँसू। जन्म से शुरू हुई आँसू ,देखा...
 पोस्ट लेवल : दुल्कान्ती समरसिंह
"साँझ में शामिल रंगों को ओढ़ेनज़र में बटोर के मचलते मंज़रढलते हुए दिन के चेहरे मेंमुट्ठी भर उजाला ढूँढ़्ती हूँ।पूरब की हूँ - श्यामल सीसूरज को अपनेगर्दिशों में ज़मीं की ढूढ़्ती हूँ।पहन के पैरों में पायलबहकती हवाओं कीफ़िज़ाओं के सुरीले तरन्नुम मेंगुनगुनाहटें ज़िन्दगी...
 पोस्ट लेवल : मीना चोपड़ा
नये दिन के साथएक पन्ना खुल गया कोराहमारे प्यार कासुबह,इस पर कहीं अपना नाम तो लिख दो!बहुत से मनहूस पन्नों मेंइसे भी कहीँ रख दूंगाऔर जब-जब हवा आकरउड़ा जायेगी अचानक बन्द पन्नों कोकहीं भीतरमोरपंखी का तरह रक्खे हुए उस नाम कोहर बार पढ़ लूंगा।-केदार नाथ सिंहमूल रचना
 पोस्ट लेवल : केदार नाथ सिंह