ब्लॉगसेतु

तुम्हारे चाहने से रंग नहीं बदलतेप्रेम नहीं बदलतेखून लाल ही रहता हैऔर आसमान नीलाजैसे प्रेम बढ़ता हैखून अधिक लाल हो जाताआसमान अधिक नीलाबढ़ते रंगों मेंहम-तुम एक से हो गयेदेखो !प्रेम हमारा इंद्रधनुष बन रहाबरस रहाअब धरती सुनहरी हो चली है ।@दीप्ति शर्मामूल रचना
 पोस्ट लेवल : दीप्ति शर्मा
1212 1212 1212 1212शराब जब छलक पड़ी तो मयकशी कुबूल है ।ऐ रिन्द मैकदे को तेरी तिश्नगी कुबूल है ।नजर झुकी झुकी सी है हया की है ये इंतिहा ।लबों पे जुम्बिशें लिए ये बेख़ुदी कुबूल है ।।गुनाह आंख कर न दे हटा न इस तरह नकाब ।जवां है धड़कने मेरी ये आशिकी कबूल है ।।यूँ रात भर न...
मुझे गर्व है की मैं एक औरत हूँ ....अपने घर की धुरी ....दिन की पहली घंटी आवाहन करती है मेरा -महरी आयी है ..."अरे सुनती हो ...चाय ले आओ "पतिदेव की बेड टी .."बहू नाश्ता ..ठीक ८ बजकर २० मिनिट पर चाहिए ""माँ...टिफ़िन...स्कूल को देर हो रही है ""अरे सुनो ऑफिस का समय हो रह...
 पोस्ट लेवल : सरस दरबारी
कमी न तुममें थीन मुझमें थी,और शायद कमी तुझमें भी थी,मुझमें भी थी ...कटु शब्द तुमने भी कहे,हमने भी कहे,मेरी नज़रों से तुम गलत थे,तुम्हारी नज़रों से हम !बना रहा एक फासला,न तुम झुके,न हम - शिकायतें दूर भी हों तो कैसे ?आओ, चुपचाप ही सही,कुछ दूर साथ चलें,मुमकिन है थक...
याद करने का सिला मैं इस तरह पाने लगामुझको आईना तेरा चेहरा ही दिखलाने लगादिल की बंजर सी ज़मी पर जब तेरी दृष्टि पड़ीज़र्रा ज़र्रा खिल के इसका नाचने गाने लगाज़िस्म के ही राजपथ पर मैं जिसे ढूँढा सदादिलकी पगडंडी में पे वोही सुख नज़र आने लगाहसरतों की इमलियाँ गिरती नहीं हैं स...
 पोस्ट लेवल : नीरज गोस्वामी
शर्तों के धागों मेंउलझती जाती ज़िंदगीचाहे -अनचाहे पलों कोजीने को मजबूरबालपन से ही टाँक दी जाती हैजीवन जीने की शर्तें हर बेटियों के दामन मेंज़िंदगी की आजादी है सिर्फ दूसरों के लिएजो नहीं मानती शर्तों से परे हटकरज़िंदगी जीती हैं आजादी सेअपने तौर-त...
 पोस्ट लेवल : अनुराधा चौहान
दाल में बचा रहे रत्ती भर नमकइश्क़ में बची रहें शिकायतेंआँखों में बची रहे नमीबचपन में बची रहें शरारतेंधरती पर बची रहें फसलेंनदियों में बचा रहे पानीसुबहों में बची रहे कोयल की कूकशामों में बची रहे सुकून की चायदुनिया में बची रहे मोहब्बतऔर बचा रहे बनारस....!!-- प्रतिभा क...
 पोस्ट लेवल : प्रतिभा कटियार
वर्षो से जलती रही हथेलियाँमाँ की सेंकते- सेंकते रोटियां मेरे पहले स्कूल से लेकर आखरी कॉलेज तक  सब याद है मुझे आज तक बड़ी सी नौकरी और मिल गया बड़ा सा घर जिसे पाने के लिए सारी -२ रात लिखे पन्ने अनजानी काली स्याही से पर सब कु...
 पोस्ट लेवल : संजय भास्कर
कैसे कैसे रंग बदलता आदमी ।वक्त के साथ ढलता आदमी ।।परिवर्तन में ये तो इतना माहिर ।गिरगिट से होड़ करता आदमी ।।स्याह रंग की पहनता पैहरन  ।फिर भी उजली कहता आदमी ।।आगे बढ़ने की होड़ मे देखो ।अपनों पे पैर रखता  आदमी ।।आश्रित सदा अमरबेल सा ।खुद को बरगद समझता आदमी !...
 पोस्ट लेवल : मीना भारद्वाज
हाँमैं प्रवासी हूँशायद इसी लिएजानता हूँकि मेरे देश कीमाटी मेंउगते हैं रिश्ते*बढ़ते हैंप्यार की धूप मेंजिन्हें बाँध करहम साथ ले जाते हैंधरोहर की तरहऔर पोसते हैं उनकोकलेजे से लगाकर*क्योंकि घर के बाहरहमें धन, वैभव,यश और सम्मानसब मिलता है,नहीं मिलती तोरिश्तों कीवो गुड़...