ब्लॉगसेतु

कम खर्च में परिवार के साथ घूमने वाले कौनसे स्थान हैं?सबसे सुंदर और सस्ता देश - हम भारतीयों का हमेशा एक सपना होता है कि हम कम से कम एक बार विदेश यात्रा करें, चाहे वह पत्नी के साथ हनीमून हो या बच्चों के साथ छुट्टियां मनाने का कार्यक्रम।लेकिन पैसे की कमी कहें या बचत,...
देख गिरी दीवार, धमाका मेरा हैइस प्रदेश का सीएम, काका मेरा हैजुबां हिलाने से पहले यह तय कर लेमेरी है सरकार, इलाका मेरा हैप्यार नहीं फिर भी यह दावा काहे का ?लुटने को तैयार, छलावा काहे का ?मुझको पानी-पानी करके खुश हो लेदिल मे रखते हो यह लावा काहे का ?आज जुदा हूँ तो पछ...
गुरु दक्षिणा में एकलव्य के द्धारा अंगूठा काटकर देने के बाद एकलव्य का क्या हुआ?...शून्य से अनन्त पुस्तक सेये बात तो एकलव्य को भी नही पता कि कुछ तथाकथित विद्वानों ने उसका अंगूठा ही कटवा दिया। द्रोण को तो ऐसे ही बदनाम कर रखा है। बेचारे अश्वथामा भी सोचते होंगे कि पिताज...
 221 2121 1221 212यूँ दफ़अतन तू  मुझसे  मेरी  आरज़ू न  पूछ ।इस दिल की बार बार नई जुस्तुजू  न पूछ ।।हर  सिम्त  रहजनों की  है  बस्ती   दयार  में ।कब तक बचेगी  यार  यहाँ  आबरू  न पूछ ।।...
 पोस्ट लेवल : डॉ. नवीमणि त्रिपाठी
शहरी हवा कुछ इस तरह चली है कि इन्सां सारे सांप हो गए हैं ,साँपों की भी होती हैं अलग अलग किस्में पर इंसान तो सब एक किस्म के हो गए हैं .साँप देख लोंग संभल तो जाते हैं पर इंसानी साँप कभी दिखता भी नहीं है ..जब चढ़ता है ज़हर&nb...
 पोस्ट लेवल : संगीता स्वरूप गीत
मैं तुझे फिर मिलूँगीकहाँ कैसे पता नहींशायद तेरे कल्पनाओंकी प्रेरणा बनतेरे केनवास पर उतरुँगीया तेरे केनवास परएक रहस्यमयी लकीर बनख़ामोश तुझे देखती रहूँगीमैं तुझे फिर मिलूँगीकहाँ कैसे पता नहींया सूरज की लौ बन करतेरे रंगो में घुलती रहूँगीया रंगो की बाँहों में बैठ करतेर...
यकीन मानिएमैं बाजार नहीं गया थावरन् बाजार मेरे घर घुस गयाउसने बेचा मुझे बहुत कुछगैर-ज़रूरीऔर ले गयाफ़ाख्तेहरी घासफुदकती गिलहरीटिटहरी का आवाजबगुलों का झुण्डफेरी वालों की पुकारऔर बहुत कुछ...कहते हैं सौदे में हमेशा बाजार कमाता है-नवीन कानगो
 पोस्ट लेवल : नवीन कानगो
अभी कुछ कुछ हुआ है उजालापर सवेरा होना बाकी है।अभी मिली हैं आँखें उनसेपर दिल मिलना बाकी है।पेड़ों के अभी कुछ कुछ पत्ते झरे हैंपर हरियाली अभी बाकी है।अभी तो मैंने देखा है एक चाँदपर उससे मुलाकात अभी बाकी है।सुसख हवा चली है कुछ कुछपर गर्मी आना बाकी है।अभी दो चार हुई हैं...
याद आते बहुत पर तुम आते नहीं,क्या कभी हम तुम्हें याद आते नहीं।याद में आपके दिल परेशान है,आप तो अपना वादा निभाते नहीं।याद आते रहे तुमको हम भी बहुत,क्यों कभी तुम हमें यह बताते नहीं।जान से भी वो ज्यादा मुझे चाहते,प्यार अपना मगर वो जताते नहीं।आपके प्यार में हम दीवाने ह...
निकली ही क्यूँ ...नंगे पाँव गोरी ।दिखी नहीं ता पै...धूप निगोड़ी ॥ नाजुक कमरिया...थामें  गगरिया ।रूप साजे हाय !धारि ..कटरिया ॥जालिम है जमाना...ये ..नजरिया ।संभल मग भरे...शूल कंकरिया ॥लद गए दिन ...पनिहार पनघट के ।जंचे अब ना ये ...लटके झटके ॥-अलका गुप्ता 'भार...
 पोस्ट लेवल : अलका गुप्ता 'भारती'