ब्लॉगसेतु

 #दाग अच्छे हैदाग पर ना जादाग है तभी हम सच्चे है दाग बहुत अच्छे हैसफ़ेद कुर्ती पर लगा दागक्यों आंखों को नहीं भाताइस दाग से ही तोरचता संसार साराक्यों शराब खुले मेंपैड काली पन्नी में लाए जातेउन पांच दिनों की कीमतक्यों लोग समझ ना पातेरचा ब्रह्मांड उन दा...
 जर्जर कायापराश्रित जीवनबुढ़ापा भरीउस पर नारी .....मैं कौन ?मेरी ख्वाहिशें क्या ?अधेड़ प्रौढ़ाकुल की मायानाती-पोतों की आयाउपेक्षा के बदलेवारी वारी ........लहलहाती फसलखनकता कुन्दनश्रृंगारित दासीजर जमीन जोरूजागीरदारी ........आदमखोर स्वछंदमासूम कैदसंभल कर चलोओ ना...
भले ही नागफनी सा दिखता हूँ.ग़ज़ल बड़ी मखमली लिखता हूँ..क़दर नहीं, पर हासिल भी नहीं.वैसे, एक मुस्कान में बिकता हूँ..फूलों की खबर रूहों को देनी हैपवन हूँ, एक जगह कहाँ टिकता हूँकामयाब बुर्ज पर परचम तुम्हारामैं शिकस्तों के गांव में छिपता हूँयकजां आईने में अक्स बिखरा थाहुई...
 पोस्ट लेवल : विनय के. जोशी
मुखर हो जाएं जहाँ वाचाल मौन ।तस्वीरें वह भला न कुरेदे कौन ॥ पन्ना पलटे चेहरे का हर भाव ।देकर दगा कभी प्रीत कभी दाँव ॥जीवन ज्यों हो मुखौटों की पुस्तक ।मृदुल कभी नीरसता की है दस्तक ॥अंतर्मन का है ..प्रतिबिम्ब दहकता । जग संग्राहलय ..यह हँसता गाता ।दंश देते ....
ये जो विस्तृत नीलाआसमान देख रहे हो न?ये मेरा है,इसलिए नहीं किमैंने इसे जीता है,इसलिए कि मैंउड़ने का माद्दा रखती हूँ,यही बात तुम्हेंहमेशा से चुभती रही है,जिसकी खुन्नस निकालने के लिएतुम मेरी उड़ान रोकने की कोशिशें करते रहते हो,नाकाम कोशिशें,कभी मेरे&nb...
तुम मूकदर्शक,मैं कामिनीहृदय  उद्वेलक, हूँ दामिनीतुम उज्जवल छटा,मैं कांतिदिव्यर्शन से ही आती शांतिन हिय ने पाई यह भ्रान्ति ।तुम प्रेम हो, मैं रागिनीतेरे सुर की हूँ मैं वादिनी।तुम शीश हो,मैं हृदयस्थलहृदय तार कंपितक्षण-क्षण, पल-पल।जीवन में ऐसे आए हो मानो...स...
 पोस्ट लेवल : प्रगति मिश्रा 'सधु'
मेघ सांवरे उमड़े, बरसेंगेखुशियों से आंचल भर देंगेकोपल-कोपल मुस्काई धरतीफिरसे अंखुआए अहसासों मेंचितवन रस में भीगे कांपेदूरियाँ न रहीं अब राहों मेआकाश सिमटते देखा है इसनेफुनगियों की नन्ही-सी बाहों में।-शैल अग्रवाल
 पोस्ट लेवल : शैल अग्रवाल
जहाँ नहीं अधिकार न जाना।तुम सीमा के पार न जाना।।दीपक एक पतंगे लाखोंस्वप्न लिए परिणय की आँखोंकुछ भी हाथ नहीं आता हैमृग-तृष्णा संसार न जाना?तुम सीमा के पार न जाना।।सबके मन मे चंचलता हैजिसको जितना भी मिलता हैइच्छाएँ बढ़ती जाती हैंजीवन का व्यवहार न जाना?तुम सीमा के पार...
तितली वह मेरी सबसे सुंदरसबसे चमकीले पंखों वालीफूल-फूल इतराती फिरतीमेरी ही बगिया में आकरमेरे ही हाथों में ना आतीबहुत प्यार करता हूँ इससेइसने प्यार की कद्र ना जानीआजादी है प्रेम कोई बन्धन नहींकहती और झटसे ये उड़ जाती। - शैल अग्रवाल
 पोस्ट लेवल : शैल अग्रवाल
 स्त्री से मत कहना अपने मन की कोई दुविधा,कोई अप्रिय बात वो बाँध लेगी उसकी गाँठ झोंक देगी अपनी सारी ताकत उसे समाप्त करने में वो  पूछेगी बार-बार उसके बारे में सवाल और देगी खुद ही हर सवाल का एक संभावित जवाब किसी स्त्री...
 पोस्ट लेवल : डॉ. अजित सिंह तोमर