ब्लॉगसेतु

मदमस्त हवाओ से भरा ये मेरा शहर आज मेरे लिए ही बेगाना क्यू है हर तरफमहकते फूल, चहकते पंक्षी फिर मुझे ही झुक जाना  क्यू है आज फिर इक चुप्पी सी साधी है इन हवाओ ने,मेरे लिएनहीं तो कोई,दूर फिजाओ में जाता क्यू है छुपा रहा हैहम...
 पोस्ट लेवल : अमरेंद्र "अमर"
नजर मिलते ही ,हमारे ईमान गयेऐ मोहब्बत ! हम तुमको पहचान गयेतुमको पाने, बेताब है हर शख्स यहाँकितने ही होकर यहाँ से परेशान गयेतेरा कहना कि समंदर, एक बूँदपानी में है बंद, हम मान गयेदेखकर तस्वीर तुम्हारी ,हमारे दिल मेंदेखने वाले सभी हैरान गयेऐसे ही नहीं,तुम्हारी हसरतों...
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हमबिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हमखमोशी से अदा हो रस्म-ए-दूरीकोई हंगामा बरपा क्यूँ करें हमये काफी है कि हम दुश्मन नहीं हैंवफ़ादारी का दावा क्यूँ करें हमवफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूँ करें हम हमार...
 पोस्ट लेवल : जॉन एलिया
उठो कि रात गई दिन निकलने वाला हैवो देखो रात के दामन तले उजाला हैहमारे साथ रहो क्योंकि हमने मंजिल काहर एक ख़्वाब बड़ी मेहनतों से पाला हैहमारे चारों तरफ हौसले ही रहते हैंजैसे चांद के चारों तरफ हाला हैहमारे बारे में कहते हैं राह के पत्थरन आना राह में उसकी की ये जियाला ह...
 पोस्ट लेवल : आतिफ़ सिराज
नींद आती नहीं धड़के कि बस आवाज़ से।तंग आया हूँ मैं इस पुरसोज़-दिल के साज से।दिल पिसा जाता है उनकी चाल के अंदाज़ से।हाथ में दामन लिए आते हैं वह किस नाज़ से।सैंकड़ों मुर्दे जिलाए औ' मसीहा नाज़ से,मौत शर्मिंदा हुई क्या-क्या तेरे ऐजाज़ से।बागवां कुंजे कफ़स में मुद्दतों...
ग़ौर तो कीजे के ये सजदा रवा क्यूँ कर हुआउस ने जब कुछ हम से माँगा तो ख़ुदा क्यूँ कर हुआऐ निगाह-ए-शौक़ इस चश्म-ए-फ़ुसूँ-परदाज़ मेंवो जो इक पिंदार था आख़िर हया क्यूँ कर हुआइक तराज़ू इश्क़ के हाथों में भी जब है तो वोआलम-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ से मावरा क्यूँ कर हुआदीन ओ दानिश द...
 पोस्ट लेवल : जमील मज़हरी सज़दा
देखते ही देखते जवान,पिताजी बूढ़े हो जाते हैं..सुबह की सैर में,कभी चक्कर खा जाते हैं,सारे मौहल्ले को पता है,पर हमसे छुपाते हैं...दिन प्रतिदिन अपनी,खुराक घटाते हैं,और तबियत ठीक होने की,बात फ़ोन पे बताते हैं...ढ़ीले हो गए कपड़ों,को टाइट करवाते हैं,देखते ही देखते जवान,&n...
 पोस्ट लेवल : माँ - बाप
पता है न ...एक दिन तुम भीटँग जाओगेतस्वीर मेंघर के किसीकोने मेंकिसी खूँटी पर इसीलिए...प्रेम बीज बोओउन्हें प्रेम से पालोसींचो प्रेम सेप्रेम फल पाओगेक्या धरा हैझगड़े -लड़ाई मेंप्रेम बोओगेसबके दिलों  मेंंरह जाओगे ।      लेखिका - शुभा मेहता
 पोस्ट लेवल : शुभा मेहता
हाँ अच्छी लड़कियाँ हैं हम,पीढ़ियों से अर्जित संस्कारों की हैं शबनम |  सजा इन्हीं का मुकुट,  शीश  पर ,हया का ओढ़ा  है  घूँघट मन  पर ,छलकाती हैं करुणा,नित नभ नूतन पर,हाँ अच्छी लड़कियाँ हैं हम | रस्म-ओ-रिवाज के नाज़ुक बँधन से,&n...
 पोस्ट लेवल : अनीता सैनी
पहनने वाला ही जानता है जूता कहाँ काटता हैजिसे कांटा चुभे वही उसकी चुभन समझता है !पराये दिल का दर्द अक्सर काठ का लगता हैपर अपने दिल का दर्द पहाड़ सा लगता है !अंगारों को झेलना चिलम खूब जानती हैसमझ तब आती है जब सर पर पड़ती है !पराई दावत पर सबकी भूख बढ़ जाती हैअक्सर पड़ोस...
 पोस्ट लेवल : कविता रावत