ब्लॉगसेतु

गहराती हुई शाम हैऔर उचटे हुए मन पर अबूझ-सी उदासी।कच्ची सी एक सड़क है,धान खेतों से होकर गुजरती हुईदूर तक चली जाती है —पैना-सा एक मोड़ हैऔर भटके हुऐ दो विहग।गहराती हुई शाम है,घनी पसरी हुई एक खामोशी,दूर कहीं बजती हुई बंसी के स्वर मेंआहिस्ता-आहिस्ता पलाश के फूलफूट रहे...
 पोस्ट लेवल : फाल्गुनी रॉय
नज़र-नज़र की बात हैसच-झूठ,दिन या रात हैख़ामोश हुई सिसकियाँबहते हुये ज़ज़्बात हैं लब थरथरा के रह गयेनज़रों की मुलाकात हैसाँसों की ये सरगोशियाँनज़रों की ही सौगात हैरोया है कोई ज़ार-ज़ारबिन अभ्र ही बरसात हैदिल की बिछी बिसात परनज़रों की शह और मात हैमनमर्ज़ियाँ चलती हो जबनजरो...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
इंसान बड़ा सयाना हैवह सब जानता हैकि उसे क्या चाहिए, क्या नहींनहीं रखता कभीअपने पास, अपने आसपास ग़ैरज़रूरी, व्यर्थ की वस्तुएँउन्हें फेंक देता है उठाकरकचरे के डिब्बे में प्रतिदिन।इंसान बड़ा सयाना हैनहीं फेंकता कुछ वस्तुएँ कभीकिसी भी कचरे के डिब्बे मेंबेशक वे कितनी ह...
मैंने पत्थर में भी फूलों सी नज़ाकत देखीपिस के सीमेंट बने, ऐसी शराफ़त देखीथी तेज हवा, उनका आँचल गिरा गईइस शहर ने उस रोज क़यामत देखी'मर्ज कैसा भी हो, दो दिन में चला जायेगा'तुमनें दीवार पर लिखी वो इबारत देखी?क्या बेमिसाल जश्न मनाया था गए सालउस विधायक की बड़ी जीत की दावत द...
 पोस्ट लेवल : कौशल शुक्ला
एक सिकंदर था पहले, मै आज सिकंदर हूँ अपनी धुन में रहता हूँ, मै मस्त कलंदर हूँ ताजमहल पे बैठ के मैंने ठुमरी-वुमरी गाई शाहजहाँ भी जाग गए, आ बैठे ओढ़ रजाई मै जितना ऊपर दीखता हूँ उतना ही अन्दर हूँ एक सिकंदर था पहले, मै आज सिकंदर हूँ कार्ल मा...
 पोस्ट लेवल : जख़ीरा गुलज़ार
सारी ज़िंदगीमरम्मत करती रही हूँफटे कपड़ों कीकभी बखिया करकेतो कभी पैबंद लगा केकभी तुरप केतो कभी छेदों को रफू करके !धूप की तेज़ रोशनी और  साफ़ नज़र की कितनीज़रुरत होती थी उन दिनोंसुई में धागा पिरोने के लिएऔर सफाई से सीने के लिए !मरम्मत तो अब भीकरती ही रहती हूँकभी...
 पोस्ट लेवल : साधना वैद
सोलह सिंगारों में प्रमुख मेंहदी के रूप अनूप हाथों की शोभा होती दुगुनी जब पूर्ण कुशलता से रचाई जाती कलात्मक हरी हरी मेंहदी सावन में मेंहदी से करतीं महिलायें अपना श्रृंगार हरियाली तीज मनातीं धूमधाम से रक्षाबंधन पर बहनों के हाथ&...
 पोस्ट लेवल : आशा सक्सेना
1.जब देखूँ तब मन हरसाये। मन को भावों से भर जाये। चूमूँ, कभी लगाऊँ छाती। क्या सखि साजन? ना सखि पाती॥2.रातों में सुख से भर देता। दिन में नहीं कभी सुधि लेता। फिर भी मुझे बहुत ही प्यारा।क्या सखि साजन? ना सखि तारा॥3.मुझे देखकर लाड़ लड़ाये। मे...
जिहाल-ए-मिस्कीं मुकों बा-रंजिश, बहार-ए-हिजरा बेचारा दिल है,सुनाई देती हैं जिसकी धड़कन, तुम्हारा दिल या हमारा दिल है।वो आके पेहलू में ऐसे बैठे, के शाम रंगीन हो गयी हैं,ज़रा ज़रा सी खिली तबियत, ज़रा सी ग़मगीन हो गयी हैं।कभी कभी शाम ऐसे ढलती है&nbs...
 पोस्ट लेवल : गुलज़ार
आदरणीय गुरुजनों और मित्रो को मेरा प्यार भरा नमस्कार 3 सितम्बर आज मेरा जन्मदिन है जन्मदिन के इस अवसर पर आप सभी का प्रेम और आशीर्वाद चाहिए !!इस अवसर पर एक छोटी सी कविता बहन पूजा की ओर से  !!जन्मदिन की बधाईयाँ ढेर सारी हार्दिक बधाईया...
 पोस्ट लेवल : संजय भास्कर