ब्लॉगसेतु

हमें परेशां करती है तुम्हारी बातें।करती हैं मदहोश तुम्हारी प्यारी बातें।।वो चौबारे पे खड़े होकर तकना तेरा।और आँखों से ही कहना सारी बातें।।कैसे भूल जाऊं मैं साथ बिताये पल।पल दो पल में हो जाती थी सारी बातें।।आस रहती थी ठहर जाये वक्त यही।हो रही हो जब यूं हमसे हमारी बा...
 पोस्ट लेवल : प्रीती श्री वास्तव
अगर चाँद मर जाताझर जाते तारे सबक्या करते कविगण तब?खोजते सौन्दर्य नया?देखते क्या दुनिया को?रहते क्या, रहते हैंजैसे मनुष्य सब?क्या करते कविगण तब?प्रेमियों का नया मानउनका तन-मन होताअथवा टकराते रहते वे सदाचाँद से, तारों से, चातक से, चकोर सेकमल से, सागर से, सरिता सेसबसे...
1222,1222,122. मुफ़ाईलुन,मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन। बहरे हज़ज मुसद्दस महज़ूफ़सभी कहते हरिक घर में ख़ुदा है।हमारा सर तभी  हर दर झुका है।।झुका सज़दे में सर है जिस भी दर पे।सभी के  ही लिए  मांगी  दुआ है।।ख़ुदा के बंदों से  कर लो मुहब्बत।इबादत करने की...
 2122 2122 2122 212रफ़्ता  रफ़्ता  खुशबुएँ  घर  मे  बिखर जाने तो दो ।कुछ  हवाओं को  मेरे आंगन तलक आने तो  दो ।।रोक   लेंगे  मौत  का  ये  कारवां  हम   एक  दिन।इस  &nbsp...
 पोस्ट लेवल : डॉ. नवीन त्रपाठी
बाद   मुद्दत    करार   आ   जाये ।गर   तू  आये   बहार  आ   जाये ।।भीगना   है   बहुत   जरूरी   तब ।जब समुंदर  में  ज्वार  आ  जा...
अकेले खड़े हो मुझे तुम बुला लो।मायुस क्यों हो ,जरा मुस्कुरा लो।रात है काली और अँधेरा घना है,तम दूर होगा तू दीपक जला लो।भरोसा न तोड़ो, मंजिल  मिलेगी,जो मन में बुने हो सपने सजा लो।देखो तो कितनी है रंगीन दुनियाँ,इन रंगों को आ मन में बसा लो।रूठा न करना कभी भी किसी...
 पोस्ट लेवल : सुजाता प्रिय
अनर्थ को ललकारने से बचनाहूँ सहनशील पर इतना नहीं कि,राह के पाषाण की तरहकोई ठोकर मार दे...औरढलमलाते एक कोने सेदूसरे कोने में जा गिरे...।है धैर्य बेहद मूल्यों कापर इतना नहीं कि;समक्षी अपनी नैतिकता गटक जाएऔर ताकते मुंह रह जाएंचिर -चिरंतर तक।है प्रवृति खुशमिजाज-सहृदय&nb...
 पोस्ट लेवल : प्रगति मिश्रा 'सधु'
मैं स्याही की बूंद हूं जिसने जैसा चाहा लिखा मुझेमैं क्या हूं कोई ना जाने अपने मन सा गढा़ मुझे।भटक रही हूं अक्षर बनकर महफिल से वीराने मेंकोई मन की बात न समझा जैसा चाहा पढ़ा मुझे।ना समझे वो प्यार की कीमत बोली खूब लगाई हैजैसे हो जागीर किसीकी दांव पे दिलके धरा मुझे।बह...
 पोस्ट लेवल : पावनी जानिब
क्या आपको पता है ?कि किवाड़ की जो जोड़ी होती है,उसका एक पल्ला स्त्री और, दूसरा पल्ला पुरुष होता है।ये घर की चौखट से जुड़े - जड़े रहते हैं।हर आगत के स्वागत में खड़े रहते हैं।।खुद को ये घर का सदस्य मानते हैं।भीतर बाहर के हर रहस्य जानते हैं।।एक रात उनके बीच था संवाद।च...
 पोस्ट लेवल : किवाड़
कुछ इस तरह मैं करूं मोहब्बत सम्हल के भी तू कभी न सम्हलेबस इतना हो जब उठे जनाजा हमारा और दम तुम्हारा निकले।मैं टूट जाऊं तो गम नहीं है सितम ये तेरा सितम नहीं है।बदल गए कुछ बदल भी जाओ हमारे दिल की वफ़ा न बदले।इक बार सो के कभी जगे ना सुना है एक ऐसी नींद भी है मैं...
 पोस्ट लेवल : पावनी जानिब