ब्लॉगसेतु

कभी आंगन में पूजा के लिए, कभी चाय में स्वाद और सेहत के लिए, तो कभी यूं ही भीनी-भीनी महक के लिए! तुलसी किसी-न-किसी रूप में हमारी जिंदगी में हमेशा से शामिल रही है। युगों से देवी स्वरूप तुलसी की पूजा की जाती रही है और यह आज भी पूजनीय है। सदियों से इसे सुख-समृद्धि और...
 पोस्ट लेवल : Health
जिन्दगी में कभी ना कभी आपके साथ भी ऐसा ज़रूर हुआ होगा। आप असफल हुए होंगे और आपको लगता होगा कि आपका इस दुनिया में होना ना होना बराबर ही है। आप सोचते होंगे कि इस दुनिया में मेरा अस्तित्व ही क्या है? क्या फर्क पड़ता है मेरे जिंदा रहने या ना रहने से? short motivational...
 पोस्ट लेवल : Inspiration
फल, अंडा और शहद न केवल हमारी बॉडी के लिए ही अच्छे होते हैं, बल्कि इन्हें खाने और लगाने से चेहरे पर निखार भी आता है। भले ही फलों का फेस पैक हो या फिर आप उन्हें अपनी डाइट में लेती हों, फल पूरी तरह से चेहरे के लिए उपयुक्त होते हैं। आइए जानते हैं वो 7 फ़ूड जो रखेंगे आपक...
 पोस्ट लेवल : Health
गर्मियों में शरीर से बदबू आना एक आम समस्या है। भले ही आप हल्के सूती कपड़े पहनें या फिर 24 घंटे डियोड्रेंट लगा लें लेकिन तन की दुर्गंध से नहीं बच सकते। पसीने की बदबू आपके व्यक्तित्व को भी प्रभावित करती है। हालांकि ऐसे कई घरेलू उपाय हैं जिनकी मदद से आप पसीने की भयंकर...
 पोस्ट लेवल : Health
दत्तात्रेय को शिव का अवतार माना जाता है, लेकिन वैष्णवजन उन्हें विष्णु के अंशावतार के रूप में मानते हैं। उनके शिष्यों में भगवान परशुराम का भी नाम लिया जाता है। तीन धर्म (वैष्णव, शैव और शाक्त) के संगम स्थल के रूप में त्रिपुरा में उन्होंने लोगों को शिक्षा-दीक्षा दी।...
 पोस्ट लेवल : Spirituality
पति या पत्नी में एकनिष्ठता को हिंदू धर्म में सर्वोच्च चारित्रिक आदर्श माना जाता है। यूं तो भारत में ऐसी हजारों महिलाएं हुई हैं जिनके पतिव्रत पालन की मिसाल दी जाती है, लेकिन उनमें से भी कुछ ऐसी हैं जो इतिहास का अमिट हिस्सा बन चुकी हैं। हिंदू इतिहास के अनुसार इस संसा...
 पोस्ट लेवल : Spirituality
भारत में सतीत्व को शक्ति और भक्ति का समन्वय माना जाता है । इसे चारित्रिक शुचिता का चरम आदर्श भी माना जाता है। भारत में ऐसी उज्जवल चरित्र की महिलाओं की एक लंबी श्रृंखला है और इस श्रृंखला में सती अनुसूया का नाम सबसे ऊपर आता है। ब्रह्मा जी के मानस पुत्र परम तपस्वी महर...
 पोस्ट लेवल : Spirituality
प्रत्येक मास की अमावस्या पितरों की पुण्य तिथि होती है, मगर आश्विन मास की अमावस्या पितरों के लिए परम फलदायी मानी गई है। इस अमावस्या को सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या अथवा महालया के नाम से भी जाना जाता है। जो व्यक्ति पितृपक्ष के पंद्रह दिनों तक श्राद्ध तर्पण आदि नहीं कर...
 पोस्ट लेवल : Spirituality
कहते हैं कि पितृपक्ष में पितर तृप्त होने के लिए बिना आह्वान के ही अपने वंशज के घर आते हैं। इसलिए उनकी मुक्ति के लिए इस दौरान यथाशक्ति दान आदि जरूर दें ताकि वे तृप्त हों और आपको सुख-समृद्धि का वरदान दें। श्राद्ध कर्म विधि हिंदू संस्कृति में जहां देवी-देवताओं के पूजन...
 पोस्ट लेवल : Spirituality
अकसर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को ही श्राद्ध कर्म के लिए उपयुक्त क्यों माना गया है? दरअसल शास्त्रों में इसे विज्ञान सम्मत भी माना गया है। पार्वण श्राद्ध पार्वण श्राद्ध: आश्विन मास में ही श्राद्ध क्यों? श्राद्ध के पांच भेदों में अन्...
 पोस्ट लेवल : Spirituality