ब्लॉगसेतु

छठी में एक कहानी पढ़ी थी। लालची कुत्ते की 'ग्रीडी डॉग'। पढ़ी अंग्रेजी में थी पर याद हिंदी में है। लालच के बहकावे में आकर कुत्ते ने अपनी परछाई से ही दूसरी रोटी पाने की कोशिश की। इस चक्कर में उसने अपने पास वाली रोटी भी गंवा दी थी। तब तब शायद लालच छोटा रहा होगा इसलिए...
 पोस्ट लेवल : विचार दर्पण
जिंदगी से अभी तुम्हारी जंग शुरू भी नहीं हुई थी। अभी तो तुम अपने मां-बाप के कंधों पर खेल रही थी। अच्छी पढ़ाई कर रही थी। आने वाले दिनों में तुम एक ऐसे सफर पर जाने वाली थी जहां तुम्हें लोगों की जिंदगी बचानी थी। तुम्हारे पेशे में तो लोगों को बहादुर बनाया जाता है, ताकि...
 पोस्ट लेवल : विचार दर्पण
शिवराज गूजरएक आठ साल की बच्ची पलक के बस में जिंदा जल जाने की खबर ने अंदर तक हिला कर रख दिया। खबर यूं थी कि -बच्ची ने पिता द्वारा सिगरेट के पैकेट के साथ छोड़ी गई माचिस के साथ बाल-सुलभ छेडख़ानी की। तीली जली, मजा आया और वो खेलने लगी। खेल-खेल में कब कपड़ों में आग लगी पत...
 पोस्ट लेवल : विचार दर्पण
रेलवे फाटक बंद था। लोग अपने वाहन रोक कर खड़े थे, पर शायद उसे ज्यादा जल्दी थी। फाटक के बगल से उसने स्कूटी चढ़ा दी पटरी पर। अभी वह पटरी के बीचों-बीच थी कि ट्रेन आ गई। मौत उसकी आंखें के आगे नाचने लगी। इस वक्त जो उसने सबसे अच्छा काम किया वो यह था कि स्कूटी का मोह छोड़...
 पोस्ट लेवल : विचार दर्पण
'कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा' भानुमति का यह टोटका काफी पुराना है पर आज भी अचूक है। लोग धड़ल्ले से इसका उपयोग कर रहे हैं। उसने इसका पेटेंट करवा लिया होता तो आज उसकी पीडियों के वारे न्यारे होते. खैर गलती हो गयी उसका क्या रोना. आज रीमिक्स का द...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य बाण
हर रोजकाम पर जाते वक्तकरता है खुद सेएक वादाआज लौट आऊंगाघर जल्दीकुछ वक्त बिताऊंगाबच्चों के साथबीवी के साथकुछ दुख-कुछ सुखकी बातें करूंगामां-बाबूजी के साथपरपलटता है जबहो चुकी होती है रातसो चुके होते हैं बच्चेमां-बाबूजी के खर्राटे बता देते हैं गहरी नींद में हैंश्रीमतीज...
अजी सुनते होघर में घुसा ही था कि श्रीमती जी बोलींमुन्ना चलने लग गया है.हाँ, फिर ?फिर क्या ?दाखिला नहीं कराना है स्कूल मेंमैं चौंका,यह नन्ही जानखुली नहीं अभी ढंग से जबानक्या पढेगा ?अजी अभी पढाना किसको है.यह तो रिहर्सल है, स्कूल जाने कीऔर फिर यहाँ यह रोता भी हैवह...
1हां ! भईअब क्यों आएगा तूंगांव।कौन है अब तेरा यहां। तेरी लुगाई और तेरे बच्चेले गया तू शहरयह झिड़की सुननी पड़ती हैहर उस बेटे कोजो आ गया है शहररोजी-रोटी कमाने।आया था जब वो शहरअकेला थासो भाग जाता था गांवसप्ताह-महीन में।अब यह नहीं हो पाताइतनी जल्दीक्योंकि-अब बढ़ गई है...
मंदरो-मंदरो बरसे मेह मन हरसावे मिनखां रोजीव-जनावर राजी होग्यारूप निखरग्यो रूंखां रोकरषां का खिलग्या मुखड़ादेख मुळकता खेतां नेबैठ मेड़ पै गावे हाळीड़ाछोड़ माळ में बेलां नेहरख्यो-हरख्यो दीखे कांकड़ओढ्यां चादर हरियाळीढांढा छोड़ खेलरया ग्वाळ्याछोड़ आपणी फरवाळीशिवराज गू...
 पोस्ट लेवल : रचना संसार गीत
आज मदर्स डे है। यानी मां का दिन। मां, जिसने हमारे अस्तित्व में आने की प्रक्रिया की पहली अवस्था से लेकर आज के दिन तक हर पल हमारे लिए और सिर्फ हमारे लिए जीवन जिया है। परिवार के लोगों की हर जरूरत का ध्यान रखने में भी उसकी नजर कहीं न कहीं से हमारी ही ओर निहारती रही। ती...