ब्लॉगसेतु

निदा फ़ाज़ली के शायरी से इतर— अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वालेगर्मी है. बच्चों की छुट्टी है. आज सूरज को दिल्ली को ४० डिग्री के ऊपर तपाते हुए चौथा दिन है. बच्चों के साथ कमरे में मैं और सिम्बा गर्मी से वातानुकूलित माहौल में आराम से बैठे हैं. आरुषि ने फिनिय...
'वागर्थ' में प्रकाशित अनुज की कहानी 'पंजा'vagarth hindi magazine me prakashitलूटमार की बुराई समाज के सामने लाने वाला साहित्य लूटमार को ग्लोरीफाई करेगा क्या? लूटमार से जुड़ी घटनाओं को उसकी नग्नावस्था में पाठक के सामने रखा जाये तो उसे डरावना-लेखन (हॉरर) कहा जाए कि साह...
 पोस्ट लेवल : Anuj कहानी Kahani अनुज
लप्रेक – है क्या यह? पढ़िए मुकेश कुमार सिन्हा की तीन लघु प्रेम कहानियाँउम्मीद शायद सतरंगी या लाल फ्रॉक के साथ, वैसे रंग के ही फीते से गुंथी लड़की की मुस्कुराहटों को देख कर मर मिटना या इंद्रधनुषी खुशियों की थी, जो स्मृतियों में एकदम से कुलबुलाई।मॉनसूनमेघों को भी...
हिंदी व्याकरण पर, उसकी कमियों पर गलतियों पर सोशल मीडिया में चर्चाएं होती रहती है। कभी चंद्रबिंदु तो कभी स-श-ष तो कभी नुक्ते को होना चाहिए या नहीं, कहने का अर्थ यह है की चर्चाएं तो हो रही होती है मगर संतुलित ज्ञान एक कम ही बाँटा जा रहा होता है। वरिष्ठ संपादक, मीडिया...
आजकल की कहानियों के साथ किये जाने वाले प्रयोगों — जो अधिकांशतः असफल होते हैं — ने कहानी-कला का नुक्सान अवश्य किया होगा. लचर होती जाती कहानियाँ और उनसे लदेफदे अखबार और अनजान पत्रिकाएं  हिंदी साहित्य की धता उतारने में व्यस्त हैं. इनसब के बीच अच्छी कहानियाँ...
उपन्यास अंश: इश्क़ फरामोश ― प्रितपाल कौर  प्रितपाल हिंदी में लिखती रहती हैं। इश्क़ फरामोश उनके जल्द बुकस्टाल पर आ रहे उपन्यास का शीर्षक है। बेहिचक कह देने वाली लेखिका के चौथे उपन्यास (एक अंग्रेजी) का यह अंश उपन्यास को पूरा पढ़ने की जिज्ञासा पैदा कर सकता...
कृष्णा सोबती: प्रतिरोध की आवाज़ [krishna sobti jivan parichay in hindi]—ओम थानवी कृष्णाजी से पाठक के नाते मेरा रिश्ता पुराना था। दिल्ली आने के बाद कुँवर नारायण, कृष्ण बलदेव वैद, राजेंद्र यादव, निर्मल वर्मा, केदारनाथ सिंह, अशोक वाजपेयी आदि से तो जल्द निकट के स...
योगिता यादवबदलते समय पर कहानी — बन्‍नो बिगड़ गई — योगिता यादवबिगड़ना और सुधरना का माने वक़्त के साथ बदलता जाता है। कहानी कहे जाने का अंदाज़ भी इस वक़्त के बदलने के साथ बदलना चाहिए। ‘बन्‍नो बिगड़ गई’ कहानी में इन बदलावों को योगिता यादव ने जिस महकते चुहल के साथ अपनाया है...
द्वारपालहनुमान चालीसा : चौपाई 21  शिव के द्वारपाल नंदी का बदला, राम के द्वारपाल हनुमान ने, रावण  की द्वारपाल लंकिनी को हरा के लिया।...मृत्यु के देवता, यम, शहर के अंदर आने से डर रहे थे। अंततः, राम को दरवाजे से हनुमान को हटाना पड़ा ताकि यम अपना कर्तव्य...
अरुंधति रॉय इन हिंदी — स्वतंत्र किन्तु जाति व्यवस्था में आकंठ डूबा भारत राष्ट्र — एक था डॉक्टर एक था संतकि क्याक्या गाँधी नही थे और क्याक्या आंबेडकर थेअरुंधति राय की किताब उनकी भाषा सब उनके निर्भीक तेवर के होते हैं। कुछ समय पहले अंग्रेजी में प्रकाशित उनकी किताब 'द...