ब्लॉगसेतु

नेमि शती 1919-2019 समारोह,हिंदी, साहित्य, नाट्य और संगीत प्रेमियों के लिए!यह वर्ष प्रख्यात साहित्य-कलाकर्मी स्व० नेमिचन्द्र जैन की जन्मशती का वर्ष है और इसे समारोह का रूप देते हुए उनकी पुत्री श्रीमती रश्मि वाजपेयी, निदेशक, नटरंग प्रतिष्ठान, तथा श्री देवी प्रसाद त्र...

बस 2 मिनट बोलो :: असग़र वजाहतबस 2 मिनट बोलो2 मिनट में अपना सारा दुख सुख अपनी व्यथा अपना दर्दअपना भूत और अपना भविष्यकह डालो2 मिनट से ज्यादा का समय नहीं दिया जाएगाक्योंकि तुम्हारी कहानी बहुत छोटी हैजिसकी गर्दन पर खूनी पंजा गड़ा हो वह 2 मिनट से ज्यादा क्या बात करे...
हिंदी में हिंदी पर हिंदी के साथ हिंदी वालों में हो रही उठापटक, स्वामित्व और वर्चस्व की लड़ाई के बीच कहानीकार जयश्री रॉय की कहानी 'स्वप्नदंश' ने मुझे घेर लिया. कहानी शुरू करते हुए मैं उसके नाम का अर्थ सोच रहा था, स्वप्न और दंश यानि स्वप्न में होने वाला दंश, जी कि है...
On Monday, 22 July 2019, Dr. Shashi Tharoor strongly opposed the Right to Information (Amendment) Bill, 2019 in the Lok Sabha. In his speech, he argued that the Bill is a deliberate attempt to weaken the RTI framework and erodes the independence of the CIC/SIC.He a...
 पोस्ट लेवल : #RTIAct Speech Shashi Tharoor News
हम सिर्फ योगियों की बात करते रहे हैं इसलिए इस किताब में मैंने.... — देवदत्त पट्टनायक आज के हिंदी दैनिक हिंदुस्तान में देवदत्त पट्टनायक की भरत एस तिवारी से हुई प्रस्तुत बातचीत का अंश प्रकाशित हुआ है.  http://epaper.livehindustan.com/epaper/hindustanci...
भगोड़े स्वर्ग में छिपे हुए हैंऔर हम उन्हें नर्क में खोजरहे हैं...स्वप्निल श्रीवास्तव, कविता में आज...कविताओं में भाषा के रोल से अधिक शब्दों का  रोल होता है. आपने वह क़व्वाली सुनी होगी:  "नज़र ऊँची की तो दुआ बन गई  नज़र नीची की तो हया बन गई&nbsp...
कविता में प्रत्येक शब्द और पंक्ति पर विचार करते हैं लेकिन कहानी में नहीं। कहानी की भी उसी तरह से व्याख्या होनी चाहिए | नामवर पर विश्वनाथ - 2साभार, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी. प्रति सहेजना चाहें तो : साहित्य अकादमी, संस्कृति भवन, वाणगंगा चौराहा, भोपाल (म.प्र.) -...
कभी पता तो करो कि सौ करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश में तुम्हारी किताबों की पांच सौ प्रति छापकर वो जो जगत कल्याण कर रहा है, उसमें उसका काम कैसे चल जाता है ?देखो तो सही सब धंधा है— विनीत कुमारऐसा शौक भी क्या पाल लेना कि हर बारी लेखक की ही कटेप्रिय लेखक !आप की पांडुल...
रेशम के लच्छे जैसी स्वर लहरियाँ | नामवर पर विश्वनाथ - 1नामवरजी ने आलोचक के रूप में जितनी ख्याति पाई उतनी ख्याति वह कवि रूप में भी पा लेते — विश्वनाथ त्रिपाठीमध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल की हिंदी मासिक (अरसे से बंद) 'साक्षात्कार' का एक बार फिर जीवित होना —&...
आलोकधन्वा की कविताओं का सार, संसार कवि को न पढ़े गए से पढ़ें! —  सुधा सिंह आलोकधन्वा सन् सत्तर के दशक के महत्वपूर्ण कवि हैं। 'ब्रूनो की बेटियाँ' , 'भागी हुई लड़कियाँ', 'गोली दागो पोस्टर', 'जनता का आदमी' आदि कविताएं कवि की प्रतिनिधि कविताएं मानी...