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 अटल जी की कविता 1)गीत नहीं गाता हूँबेनक़ाब चेहरे हैं,दाग़ बड़े गहरे हैंटूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूँगीत नहीं गाता हूँलगी कुछ ऐसी नज़रबिखरा शीशे सा शहरअपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँगीत नहीं गाता हूँपीठ मे छुरी सा चांदराहू गया रेखा फांदमुक्ति के...
 पोस्ट लेवल : अटल जी की कविता
झूठ नहीं बोलना सच कहना Jhoot nahi bolna sach kahnaझूठ के पांव होते ही नहीं हैं ,कभी कहीं भी पहुंच सकता है।पर बिना पांव के ही भला वह , फासला क्‍या तय कर सकता है ?भटकते भटकते , भागते भागते , उसे अब तक क्‍या है मिला ?मंजिल मिलनी तो दूर रही , दोनो पांव भ...
maa par suvichar माँ के लिए सुविचार मॉ शब्‍द को सुनते ही सबसे पहले परंपरागत स्‍वरूपवाली उस मॉ की छवि ऑखो में कौंधती है , जिसके दो चार नहीं , पांच छह से आठ दस बच्‍चे तक होते थे , पर उन्‍हें पालने में उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं आती थी। हमारे यहां 90 के दशक...
maa ke liye do shabdमाँ के लिए दो शब्ददुनिया का सबसे खूबसूरत शब्‍द, सबसे प्‍यारा शब्‍द है मां। किसी एक महिला के मां बनते ही पूरा घर ही रिश्‍तों से सराबोर हो जाता है। कोई नानी तो कोई दादी , कोई मौसी तो कोई बुआ , कोई चाचा तो कोई मामा , कोई भैया तो कोई दीदी , नए नए रि...
baba ki kahani धर्म और ज्‍योतिष को यूं बदनाम न करो बाबादुनिया भर के खासकर भारत में गली गली , मुहल्‍ले मुहल्‍ले विचरण करने वाले बाबाओं , तुम अपने शहर में न जाने कितने अपराध करते हो , पर काफी दिनों तक पुलिस की लापरवाही या उनसे मिलीभगत से तुम पकडे नहीं जाते , इस...
विज्ञानियों को ज्‍योतिष नहीं चाहिए, ज्‍योतिषियों को विज्ञान नहीं चाहिए।दोनो गुटों के झगडें में फंसा है गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष, जिसे दोनो गुटों के मध्‍य सेतु का काम करना है। ऐसे में गत्यात्मक ज्योतिष द्वारा समाज में ज्ञान के प्रचार प्रसार के कार्यक्रम में आम जनता ही स...
पिछले माह ट्रेन से आ रही थी , रिजर्वेशन नहीं होने और भीड के अधिक होने के कारण महिला बॉगी में चढ गयी , यहां हर वर्ग का प्रतिनिधित्‍व करने वाली महिलाएं मौजूद थी , बच्चियों , युवतियों से लेकर वृद्धा तक , मजदूर से लेकर सामान्‍य गृहस्‍थ तक और नौकरीपेशा से लेकर हम जैसी म...
पुराने वर्ष को विदा करने और नए वर्ष का स्‍वागत करने के , व्‍यतीत किए गए वर्ष का मूल्‍यांकण करने और नए वर्ष के लिए अपने कार्यक्रम बनाने यानि हर व्‍यक्ति के लिए महत्‍वपूर्ण दिसंबर के उत्‍तरार्द्ध और जनवरी के पूवार्द्ध में पड रही कडाके की ठंड के मध्‍य देश एक अलग ही आग...
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बौद्ध धर्म एक अनीश्‍वरवादी धर्म है, इसके अनुसार कर्म ही जीवन में सुख और दुख लाता है। भारत ही एक ऐसा अद्भूत देश है जहां ईश्वर के बिना भी धर्म चल जाता है। ईश्वर के बिना भी बौद्ध धर्म को सद्धर्म माना गया है। दुनिया के प्रत्येक धर्मों का आधार विश्वास और श्रद्धा है जब...