ब्लॉगसेतु

विज्ञानियों को ज्‍योतिष नहीं चाहिए, ज्‍योतिषियों को विज्ञान नहीं चाहिए।दोनो गुटों के झगडें में फंसा है गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष, जिसे दोनो गुटों के मध्‍य सेतु का काम करना है। ऐसे में गत्यात्मक ज्योतिष द्वारा समाज में ज्ञान के प्रचार प्रसार के कार्यक्रम में आम जनता ही स...
पिछले आलेख में मैने बताया कि 'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' में सूर्य से 40 डिग्री की दूरी तक के चांद को कमजोर कहा जाता है , यह मन का प्रतीक ग्रह है , इसलिए इसके कमजोर होने से व्‍यक्ति बाल्‍यावस्‍था के वातावरण में या पालन पोषण में किसी प्रकार की कमी को मन ही मन महसूस करता...
पिछले आलेख में स्‍पष्‍ट हो चुका है कि चंद्रमा पृथ्‍वी का सबसे निकटतम ग्रह है , इस कारण इसका प्रभाव पृथ्‍वी पर सबसे अधिक पडता है। समुद्र में ज्‍वार भाटा का आना इसका सबसे अच्‍छा उदाहरण है। मनुष्‍य के जीवन में   चंद्रमा का सर्वाधिक प्रभाव बचपन पर पडता है। यदि मजब...
'गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष' को अच्‍छी तरह समझने के लिए जन्‍मकुंडली में एक ग्रह की दूसरे से कोणिक दूरी और उनकी अपनी गति के साथ साथ राशिश की सापेक्षिक गति को भी जानना आवश्‍यक होता है , इसलिए सबसे पहले जन्‍मकुंडली में एक ग्रह से दूसरे की कोणिक दूरी के बारे में जानना आवश्‍य...
जहां एक ओर ज्‍योतिष को बहुत ही सूक्ष्‍म तौर पर गणना करने वाला शास्‍त्र माना जाता है , वहीं दूसरी ओर पूरी जनसंख्‍या को 12 भागों में बांटकर उनकी राशि के आधार पर राशिफल के रूप में भविष्‍यवाणी करने का प्रचलन भी है। राशिफल के द्वारा दुनियाभर के लोगों को 12 भागों में बां...
व्‍यस्‍तता के कारण इधर काफी दिनों से इस ब्‍लॉग को अपडेट नहीं कर पा रही थी , कल इस बारे में हेम पांडेय जी की भी टिप्‍पणी मिली। वास्‍तव मेंपरंपरागत ज्‍योतिष के जिन तथ्‍यों को हमने गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष के आधार के तौर पर लिया है , उसके बारे में चर्चा भी आवश्‍यक है। उसक...
ज्‍योतिष में रूचि रखने वाले भी बहुत लोग गोचर का अर्थ नहीं जानते हैं। पृथ्‍वी के सापेक्ष सभी ग्रहों की गति ही गोचर कहलाती है। आकाश में वर्तमान में कौन सा ग्रह किस राशि और नक्षत्र में चल रहा है, यही ग्रहों का गोचर है , जिसे हम पंचांग के माध्‍यम से जान पाते हैं। भले ह...
पुराने लेखों में मैने बताया ही है कि जन्‍मकुंडली में सर्वाधिक महत्‍व लग्‍न यानि पूर्वी क्षितिज में उदित होनेवाली राशि का होता है । लग्‍न के सापेक्ष सभी ग्रहों की स्थिति ही एक जातक की परिस्थितियां भिन्‍न होती हैं और उनके के सोंचने का ढंग भी अलग होता है । लग्‍न की जा...
पिछले दो आलेखों में मैने लिखा कि किसी भी जन्‍मकुंडली से जातक के जीवन के विभिन्‍न पक्षों के बारे में स्‍थायी रूप से जानने के लिए उस भाव के भावेश तथा उसमें स्थित ग्रहों का ध्‍यान रखना आवश्‍यक होता है। इस हिसाब से संलग्‍न जन्‍मकुंडली में जातक के स्‍वास्‍थ्‍य के मामलों...
पिछले पोस्‍ट में आपने देखा कि  पर यदि तुला लग्‍न की सारी कुंडलियों की बात की जाए , तो इनमें निम्‍न ग्रहों के सहारे निम्‍न पक्षों की भविष्‍यवाणी की जा सकती है .....चंद्र के सहारे पिता व सामाजिक स्थिति,सूर्य के सहारे लाभ और लक्ष्‍य,बुध के सहारे भाग्‍य और खर्च,श...