ब्लॉगसेतु

जी रहे हैं या यूँ कहें कि जी रहे थेढेरों परेशानियों संगथी कुछ खुशियाँ भी हमारे हिस्सेजिनको सतरंगी नजरों के साथहमने महसूस करबिखेरी खिलखिलाहटेंकुछ अहमियत रखते अपनों के लिएहम चमकती बिंदिया ही रहेउनके चौड़े माथे कीइन्ही बीतते हुए समयों मेंकुछ खूबियाँ ढूंढ कर सहेजी भीकभी...
हो बेहद खूबसूरतइतना ही तो कहा थाकि बोल उठीलजाती भोर सीहल्की गुलाबी स्नेहिल प्रकाश के साथरंग बिखेरती हुई- ब्यूटी लाइज इन द आइज ऑफ द बीहोल्डरतत्क्षणआंखों की पुतलियों संगछमकते प्रदीप्त काली चकमक संगमरमर सीकोर्निया और रेटिना के मध्यलहरा उठा सारा संसारकहाँ तक निहारूं ?ह...
तेज धड़कनों का सचसमय के साथ बदल जाता हैकभी देखते हीया स्पर्श भर सेस्वमेव तेज रुधिर धारबता देती थीहृदय के अलिंद निलय के बीचलाल-श्वेत रक्त कोशिकाएं भीकरने लगती थी प्रेमालापवजह होती थीं 'तुम'इन दिनों उम्र के साथधड़कनों ने फिर सेशुरू की है तेज़ी दिखानीवजह बेशकदिल द मामला...
बचपन में थी चाहतें किबनना है क्रिकेटरमम्मी ने कहा बैट के लिए नहीं हैं पैसेतो अंदर से आई आवाज ने भी कहानहीं है तुममे वो क्रिकेटर वाली बातवहीं दोस्तों ने कहातेरी हैंडराइटिंग अच्छी हैतू स्कोरर बनऔर बसइन सबसे इतरफिर बड़ा हो गयाजिंदगी कैसे बदल जाती है नसुर चढ़ा बनूंगा कवि...
जब सैंतालीस,धप्पा करते हुए बोले अड़तालीस कोजी ले तू भी उम्मीदों भरा सालहै भविष्य के गर्त में कुछ फूलजो बींधेंगे उंगलियों कोक्योंकि है ढेरों काटें भरे तनेतब तुम सब हैप्पी बड्डे कहना।जब सैंतालीसकरे याद छियालीस की झप्पी कोजो सर्द निगाहों से ताक करनम हो चुकी आवाज मेंपिछ...
ब्लॉगर ऑफ द इयर के उपविजेता का अवार्ड तुम्हारी अनुपस्थिति मेंहै न,सावन-भादोबादलबारिशबूँदें !पर,हर जगहचमकती-खनकतीतस्वीरसिर्फ तुम्हारी !पारदर्शी हो गयी हो क्या?याअपवर्तन के बादपरावर्तित किरणों के समूह सीढ़ल जाती होतुम !!बूँद और तुमदोनों मेंशायद है नप्रिज्मीय गुण...
'एक्वारजिया' या करूँ उसका अनुवाद तो अम्लराज ! या शाही जल !अम्लरानी क्यों नहीं ?ज़िन्दगी की झील मेंबुदबुदाते गम और उसका प्रतिफल जैसे सांद्र नाइट्रिक अम्ल और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का ताजा मिश्रण एक अनुपात तीन का सम्मिश्रण उफ़ ! धधकता बलबलाता हुआ सब कुछ कहीं स्वयं न पिघल...
मान लो 'आग'टाटा नमक केआयोडाइज्ड पैक्ड थैली की तरहखुले आम बिकती बाजार मेंमान लो 'दर्द'वैक्सड माचिस के डिब्बी की तरहपनवाड़ी के दूकान पर मिलतीअठन्नी में एक !मान लो 'खुशियाँ' मिलतीसमुद्री लहरों के साथ मुफ्त मेंकंडीशन एप्लाय के साथ किहर उछलते ज्वार के साथ आतीतो लौट भी जा...
सुट्टे के अंतिम कश से पहले सोचता हूँकि क्या सोचूं ?जी.एस.टी. के उपरान्त लगने वाले टैक्स पर करूँ बहस,या, फिर आने वाले पे कमिशन से मिलने वाले एरियर का लगाऊं लेखा जोखाया, सरकारी आयल पूल अकाउंट सेपेट्रोल या गैस पर मिलने वाली सब्सिडी पर तरेरूं नजरपर, दिमाग का फितूर...
बोनसाई पेड़ों जैसीहोती है जिंदगी, मेट्रो सिटी में रहने वालों कीमिलता है सब कुछलेकिन मिलेगा राशनिंग मेंपानीबिजलीवायुघर की दीवारेंपार्किंगयहाँ तक की धूप भीसिर्फ एक कोना छिटकता हुआहै न सचख़ास सीमा तक कर सकते हैं खर्चपानी या बिजलीअगर पाना हैसब्सिडाइज्ड कीमतवर्नाभुगतो बजट...