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अमर उजाला में दिनांक 23 मार्च 2012 को पेज 9 पर प्रकाशित इस खबर को जन जन के हित में अवश्‍य अपने ब्‍लॉगों/वेबसाइटों व अन्‍य सोशल माध्‍यमों पर शेयर कीजिए। 
भोर भई मनुज , अब तो तू उठ जा ;रवि ने किया दूर ,जग का दुःख भरा अन्धकार ;किरणों ने बिछाया जाल , स्वर्णिम और मधुर  ;अश्व खींच रहे है रविरथ को अपनी मंजिल की ओर ;तू भी हे मानव , जीवन रुपी रथ का सार्थ बन जा !भोर भई मनुज , अब तो तू उठ जा !आगे पढ़े
फर्स्ट अप्रैल नज़दीक है और आप सब सोच रहे होंगे की इस बार का अप्रैल फूल्स डे किसे विश किया जाये. ज़रा सोचिये, समूचे इंटरनेट को सेंसर करने का बेवकूफाना ख्वाब देखने वाले सिब्बल जी से बेहतर कौन हो सकता है इस बार के अप्रैल फूल्स डे के लिए. तो आइये हम सब मिलकर कपिल सिब्ब...
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दिल्‍ली के सुमित (अब गीत) प्रताप सिंहदिल्‍ली गान (सिटी एंथम) सुनने के लिए क्लिक कीजिए।www.mycitymyanthem.comहिन्‍दी चिट्ठाकार संसार बहुविध प्रतिभायुक्‍त है। अंतर्जाल के आगमन के पश्‍चात् मात्र कुछेक वर्ष में ही हिंदी ब्‍लॉगिंग के अद्भुत संसार ने हिंदी जगत की प्रतिभा...