ब्लॉगसेतु

भारतीय साहित्य जगत् के लिये एक सुखद समाचार आपके साथ साझा किया जा रहा है। जानी मानी ब्लॉगर आदरणीया पम्मी सिंह 'तृप्ति' जी का नाम 'ग्लोबल बुक ऑफ़ लिटरेचर रिकॉर्ड्स' 2019 में दर्ज़ किया गया है। विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय 111 महिला साहित्यकारों क...
निर्माण नशेमन का नित करती वह नन्हीं चिड़िया ज़िद करती तिनके अब बहुत दूर-दूर मिलते मोहब्बत के नक़्श-ए-क़दम नहीं मिलतेख़ामोशियों में डूबी चिड़िया उदास नहीं दरिया-ए-ग़म का किनारा भी पास नहीं दिल में ख़लिश ता-उम्र सब्...
सुनो प्रिये !मैं बहुत नाराज़ हूँ आपसेआपने आज फिर भेज दियेचार लाल गुलाब के सुन्दर फूलप्यारे कोमल सुप्रभात संदेश के साथमाना कि ये वर्चुअल हैं / नक़ली हैं लेकिन इनमें समायाप्यार का एहसास / महक तो असली हैनादाँ हूँ / प्रकृतिप्रेमी हूँ  / कवि हूँकदाचित...
हाँ मैं कश्मीरी लड़की हूँ! अपने देशवासियों पर भड़की हूँ। मेरा रंग और बदन पसंद तुम्हें, ये मनोविकार हैं नापसंद मुझे,गुल बनो!गुलफ़ाम को लेने,आ जाना गुलशन में!बदल सकोगे जलवायु?जिसमें पलकर मैं बड़ी हुई  सुमन पाँख-सी कोमल हूँ स्त्री का सम्मान क...
सुनो मेघदूत!अब तुम्हें संदेश कैसे सौंप दूँ, अल्ट्रा मॉडर्न तकनीकी से, गूँथा गगन ग़ैरत का गुनाहगार है अब, राज़-ए-मोहब्बत हैक हो रहे हैं!हिज्र की दिलदारियाँ, ख़ामोशी के शोख़ नग़्मे, अश्क़ में भीगा गुल-ए-तमन्ना, फ़स्ल-ए-बहार में, दिल की धड़क...
समाचार आया है -'राहुल बोस ने दो केले की क़ीमत चुकायी  442.50 रुपये।' अभिनेता ठहरा था चंडीगढ़ के स्टार होटल में, बाहर आया महँगाई का जिन्न बंद था जो भद्रलोक की बॉटल में। मात्र 375 रुपये दो केले की एमआरपी, जोड़ा गया इसमें...
दिनकर की धूप पाकर भोजन बनाता है पेड़ दिनभर ज़हरीली हवा निगलता है पेड़ दिनभर मुफ़्त प्राणवायु उगलता है पेड़ दिनभर बादलों को दिनभर रिझाता है पेड़ दिनभर थके-हारे परिंदों को बुलाता है पेड़ दिनभर कलरव की प्यारी सरगम सुनता...
वह 1999 का वर्ष था,दोस्ताना अंदाज़ और अपार हर्ष था।  जब अटल जी पहुँचे थेबस द्वारा लाहौर, दोस्ती की ख़ुशबू से महके  थे दोनों देशों के ठौर। जब पींगें बढ़ी मित्रता की था फरवरी महीना,पाकिस्तानी सेना को रास न आया दो मुल्कों का अमन से...
 प्रकृति की, स्तब्धकारी ख़ामोशी की, गहन व्याख्या करते-करते, पुरखा-पुरखिन भी निढाल हो गये, सागर,नदियाँ,झरने,पर्वत-पहाड़, पोखर-ताल,जीवधारी,हरियाली,झाड़-झँखाड़,क्या मानव के मातहत निहाल हो गये?नहीं !...... कदापि नहीं !औद्योगिक क्राँति,पूँजी का...
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