ब्लॉगसेतु

तिल-तिल मिटना जीवन का,विराम स्मृति-खंडहर में मन का। व्यथित किया ताप ने ह्रदय को सीमा तक,वेदना उभरी कराहकररीती गगरी सब्र की अचानक। अज्ञात अभिशाप आतुर हुआ बाँहें पसारे सीमाहीन क्षितिज पर आकुल आवेश में अभिसार को चिर-तृप्ति अभिरा...
 पोस्ट लेवल : अज्ञात अभिशाप कविता
नाव डगमग डोली तो माँझी पर टिक गयीं आशंकित आशान्वित आँखें, कोहरा खा गया दिन का भी उजाला अनुरक्त हो भँवरे की प्रतीक्षा कर रहीं सुमन पाँखें। सड़क-पुल के टेंडर अभी बाक़ी हैं कुछ अनजाने इलाक़ों में बहती नदियों और...
सुबकती रात सह रहीकुछ ज़्यादा है घनेरा अँधेरा इस बार,चिरप्रतीक्षित राहत आयेगी ज़रूररथ पर विहान के हो सवार।सहमी हैंशजर परसहस्स्रों पत्तियाँ, सोचते हैंमुरझाएँगेखिलने पहलेगुंचे, गुल और कलियाँ।मुँह फेरकरउदास चाँद ने ओढ़ ली हैकुहाँसे की घनी चादर,ख़ामोश हैंबुलबुल, तितली,...
अरे!यह क्या ?अराजकता में झुलसता मेरा देश,अभागी चीख़ में सिसकता परिवेश।सरकारी शब्दजाल नेऊबड़खाबड़ घाटियों में धकेला है,शहर-शहर विरोध कामहाविकट स्वस्फूर्त रेला है,होंठ भींचे मुट्ठियाँ कसते नौजवानकोई मुँह छिपाकर देशद्रोहीजलाता अपना देश,अभागी चीख़ में सिसकता परिवेश।रक...
जामिया मिलिया इस्लामियाविश्वविद्यालय दिल्ली कीलायब्रेरी में दिल्ली पुलिस नेअपने बर्बर दुस्साहस के साथअध्ययनरत शिक्षार्थियों परक्रूरतम लाठीचार्ज कियाएक ओर जब दर्द से कराह रहे हैं युवातब समाज का एक तबकाअपनी अपार ख़ुशी ज़ाहिर कर रहा हैक्योंकि धर्म विशेष के लोगों कोपूर्व...
फ़ासले क़ुर्बतों में बदलेंगे एक रोज़, होने नहीं देंगे हम इंसानियत को ज़मी-दोज़। फ़ासले पैदा करना तो सियासत की रिवायत है,अदब को आज तक अपनी ज़ुबाँ की आदत है। आग बाहर तो दिखती है अंदर भी&nbs...
हसरत-ए-दीदार में सूख गया बेकल आँखों का पानी,कहने लगे हैं लोग यह तो है गुज़रे ज़माने की कहानी।मिला करते थे हम मेलों त्योहारोंउत्सवों में,मिलने की फ़ुर्सत किसे अब नस-नस में दौड़ती है  नशा-ए-इंटरनेट की रवानी। लिखते थे...
अरे! सुनो विद्यार्थियो! क्यों सड़कों परअपना ख़ून बहा रहे हो अपनी हड्डियाँ तुड़वा रहे होअपनी खाल छिलवा रहे हो पुलिस की लाठियाँ खा रहे हो पुलिस की लातें खा रहे हो क्यों सामान के बोरे-सा ढोये जा रहे हो चार-छह बेरहम पुलिसकर्मियों के हाथोंक्यो...
दिल में आजकल एहसासात का  बे-क़ाबू तूफ़ान आ पसरा है, शायद उसे ख़बर है कि आजकल वहाँ आपका बसेरा है।ज़िन्दगी में यदाकदा ऐसे भी मक़ाम आते हैं, कोई अपने ही घर में अंजान  बनकर सितम का नाम पाते हैं।कोई किसी को&nbs...
यह सड़ाँध मारतीआब-ओ-हवा भले हीदम घोंटने परउतारू है,पर अब करें भीतो क्या करेंयही तोहमसफ़र हैदुधारू है।मिट्टीपानीहवावनस्पति सेसदियों पुरानीतासीर चाहते हो,रात के लकदकउजालों मेंटिमटिमातेजुगनुओं कोपास बुलाकरकभी पूछा-"क्या चाहते हो?" तल्ख़ियों सेभागते-भागतेआख़िरहास...