ब्लॉगसेतु

            बाल दिवस कोई राही बालक मुझको,भीख माँगता मिल जाता था,मैं बस उसको पास बुला कर,इसी बात को समझाता था,भीख माँगना बुरी बात है,श्रम जीवी बन कर तो देखो,मेहनत के बल जीना सीखो |     &...
 पोस्ट लेवल : Kavita
राम नामी ओढ़ कर, मैं ठग रहा होता जगत को,          किन्तु मानव धर्म से  ही, हारता हरदम रहा बस l               चाहता तो यह सफर मैं, पार कर लेता मजे से,&n...
 पोस्ट लेवल : Ghazal
                 सारा जग  है  राममय, सभी जगह हैं राम,                मन निर्मल यदि आपका, तो बसते अभिराम l चलते फिरते भी भजो, मन ही मन श...
 पोस्ट लेवल : Doha
लघु कथा राकेश मल्टी नेशनल कम्पनी में एक्ज्युकेटिव हेड था, बड़ी कम्पनियों में काम का बोझ तो अधिक होता है, घर पर 8 साल के अपने लाडले अंकुर को कम ही समय दे पाता था | वह कई बार चिड़िया घर दिखाने के लिये कह चुका था, इस रविवार को उसने फिर कहा तो राकेश उसका आग्रह न टाल सका,...
 पोस्ट लेवल : लघु कथा
       पढ़ कर,गुन कर, गुण दोषों की करें समीक्षा,        समय पड़े  पर  आवश्यक  उत्तीर्ण परीक्षा,       लेकिन इतना  धीरज  रक्खें शांत  भाव से,  ...
 पोस्ट लेवल : Muktak
 दीपावली की शुभ कामनायें बना कर देह का दीपक,जलाओ स्नेह की बाती,मिटे मन का अँधेरा भी,प्रकाशित हो  धरा सारी|      दिवाली रोज  मन जाये,     बढ़े धन धान्य जीवन में,     प्रभुल्लित आप  रह पाय...
 पोस्ट लेवल : Kavita
तन सुखी रहता सदा जग रीत से,मन सुखी जो हार बदले जीत में,है लड़ाई आज भी, जग में यहाँ,लड़ सकें कैसे यहाँ अन रीत से l                
 पोस्ट लेवल : Muktak
केवल तन ही नहीं आपका मन पवित्र हो,आत्म नियंत्रण, परोपकार उत्तम चरित्र हो,सुख के साथी नहीं दुःख में साथ निभायें बस जिनके आचरण श्रेष्ठ हों वही मित्र होजग प्रकाशित है सदा आदित्य से, हम प्रगति करते सदा सानिध्य से, कोई  माने, या  न  माने  सत्य  ...
 पोस्ट लेवल : Muktak
सदा सफलता चरण चूमती, हार न मानो,सम्बन्धों को जीवन में व्योपार न मानो.चरैवेति ही जीवन का सिध्दान्त सदा से,कठिन परिश्रम को जीवन में भार न मानो |           तुम करो मेहनत अभी से, लक्ष्य हो परहित तुम्हारा,  &nb...
 पोस्ट लेवल : Muktak
सत्य क्या है, झूठ  का पृष्ठावरण,कर्म है जब स्वार्थ का ही आचरण.लोभ  ने  अपना बढाया कद यहाँ,क्रोध का  क्या कर सकेंगे संवरण. धर्म  ओढ़े  ढोंग का  ही  आवरण,अर्थ है  साक्षात कलि का  अवतरण.मोक्ष को तुमही बतादो क्या कहें हम...