ब्लॉगसेतु

नीरज सिंहदिल्ली विश्वविद्यालयबिहार से दिल्ली होखेअउरी बैग में सतुआ के लिटी होखेबाबू जी के दिहल कुछु पईसा होखेओहि पईसावा में लउकत बाबू जी के बड़का बन के आईई बोले वाला बतिया होखेमाई के हथवा से बुनल ऊन के सुइटर होखेबड़का बहिनिया के बेगवा से चुराईल एगो दुगो कल्मवा होखे&n...
नीरज सिंहदिल्ली विश्वविद्यालयकाश तुम होतीसड़कों पर चलता तो हूँअगर तुम साथ होती तो सफ़रनामा बन जातासिगरेट पीने से आज-कल सभी रोकने लगे हैं मुझेगर तुम रोकती तो बात अलग होतीचाय के साथ अक्सर धुँआ ही उड़ा रहा हूँअगर चाय तुम्हारे हाथों की होती तो बात कुछ और होतीयाद आती हैं त...
जयदीप कुमारआपके जख्मो को खरीदने का हुनर रखते हैआपके दर्द को मिटाने का हुनर रखते है.मेरे आँखों में भले आँसुओ का सागर होलेकिन आपको हँसाने का हुनर रखते है.
नीरज सिंहआज सुबह उठा तो एक बड़ा ही दुःखद समाचार सुना कि बलिया के महान कवि और लेखक अब नहीं रहें । केदारनाथ जी को पढ़ कर मैंने कविताएं लिखनी शुरू कीबहुत कुछ सीखा हैं उनसे । दरअसल वो मरे नहीं हैं हमारे बीच मे हैं हमारे यूपी के हर नोजवान की सासों में हैं आप उन्हें महसूस...
कविता पाठ- आकाश सिंह
जिससे मैनें प्यार किया , वो प्यार नही एक सपना थाप्यार के बदले धोखा दिया , इंसान कहाँ वो अपना थारह कर उसकी यादो में देखु ,उसकी  निगाहों कोरुका खड़ा हूँ उसी राह पर  जहाँ मुझे वह छोड़ गईउसके प्यार में पड़ कर अपनी असलियत को  भूल गयाजिससे मैन प्यार किया , वो...
कुमुद सिंहआखिर ऐसी कौन सी मजबूरी रही होगी उस लड़की की जिसने उसे बिना सोचे समझे अपनी आगे की पूरी ज़िंदगी एक अधेड़ आदमी के साथ गुज़ारने पर बेबस कर दिया???????क्या वो इतनी नादान रही होगी की उसे अपनी इच्छायें भी ज्ञात नहीं थीं या फिर उसके आगे ऐसे दो विकल्प रख दिए गए होंगे...
लेखक - प्रभातशीर्षक- मेरे पिता जीवक्ता- प्रभात