ब्लॉगसेतु

नीरज सिंहदिल्ली विश्वविद्यालयअब हम दूर होने लगे हैं !न जाने किधर खोने लगे हैं ?न सुबह का ख्याल हैं !न शाम की पहल हैं ?न अपनो का साथ हैं !न गैरों का प्यार है ?न बातों की रातें हैं !न प्यासे नैना हैं ?न कुछ बात रही अब दिल में !न कुछ सपनें आते इस मन में ?न तुम रही !न...
संदीप कुमारबनारस हिन्दू विश्वविद्यालयएक बेहतरीन यात्रा देव भूमि ऋषिकेश की, जहाँ गंगा पर्वतमालाओं को पीछे छोड़ समतल धरातल की तरफ आगे बढ़ जाती है। ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है। उत्तराखण्ड में समुद्र तल से 1360 फीट की ऊंचाई पर स्थित ऋषिकेश भारत क...
जयदीप कुमारदिल्ली विश्वविद्यालयभारतीय सिनेमा की शुरुआत 1896 में हुई । भारत में प्रथम स्वदेश निर्मित फीचर फिल्म राजा हरिश्चंद्र बनने का श्रेय श्री गोविन्द फाल्के उर्फ़ या दादा साहब फाल्के को जाता है । दादा साहब फाल्के ने अपने लन्दन प्रवास के दौरान एक चलचित्र देखा जो...
कुमुद सिंहProud to be an indian...ya..i am proud to be an indian..इंडिया..वो जगह..जहाँ नारी को उजाले में पूजते है और अंधेरे में नोंचते है ,जहाँ नारी को बाहरी दुनिया में सशक्त बनाने के नारे तो लगाते है और वही घर के अंदर उसकी शारीरिक क्षमता कम होने के कारण उस पर अपना...
जयदीप कुमारतुम्हारा घर बुलाना गलत था कि मेरा घर आना गलत थाअपने हाथों से खिलना था या तुमसे मोहब्बत करना गलत थादूर जाते समय गले लगाना गलत था या आखो में आंसू छिपना गलत थातुम्हारा नारज होना गलत था या मेरा मानना गलत था।आखिर गलत क्या था ?
जयदीप कुमारक्या तुमने हमें आजमाकर देख लिया,इक धोखा हमने भी खा कर देख लिया.क्या हुआ हम हुए जो उदास,उन्होंने तो अपना दिल बहला के देख लिया    
जयदीप कुमारलोग कहते हैं कि जो आत्महत्या करते है ओ वेवकूफ होते हैं पर ऐसा नही होता कोई भी मरना नही चाहता लेकिन जब कोई बात किसी व्यक्ति की अंतरात्मा को छू जाती हैं तो वहीं से एक उत्तेजना उत्पन्न होती हैं जो सोचने और समझने की शक्ति को खत्म कर देता हैं।
जयदीप कुमारबचपन से एक सपना था कि डांसर बनू इसी वजह से मैं वाराणसी में  डांस क्लास लेने लगा  लेकिन कुछ समय बाद मेरे सेहत में काफी गिरावट आने लगी।उसी समय मुझे पीलिया हो गया जिसके वजह दे मैं जिला अस्पताल में मुझे एडमिट होना पड़ा जिसके वजह से मुझे काफी समय तक...
कुमुद सिंह हाउसवाइफ....सुनने में कितना साधारण लगता है ना ये शब्द और सुनने में ही क्यों..काफी लोग बल्कि पूरे पुरुष समाज में इसे साधारण ही समझा जाता है बल्कि साधारण भी नही अति साधारण।हँसी आती है पुरुषों को यह कहते सुनकर की अरे तुम दिनभर करती ही क्या हो,घर पर ही तो रह...
कुमुद सिंह हाउसवाइफ....सुनने में कितना साधारण लगता है ना ये शब्द और सुनने में ही क्यों..काफी लोग बल्कि पूरे पुरुष समाज में इसे साधारण ही समझा जाता है बल्कि साधारण भी नही अति साधारण।हँसी आती है पुरुषों को यह कहते सुनकर की अरे तुम दिनभर करती ही क्या हो,घर पर ही तो रह...