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पिछले साल जनकृति बहुभाषिक अंतरराष्ट्रीय ई पत्रिका में प्रकाशित कविताकविता-धर्म और मानवीयताकविता- धर्म और मानवीयताधर्म की सारी धज्जियां उड़ा कर रख दो।जो धर्म है तुम्हें उसे तुम स्वीकार करो।ना तुम हिन्दू रहोना मुस्लिम रहोना सिखऔर ना हीईसाईसारे गढ़ उखाड़ फेकोसभ्यता सं...
कहानी फ़िल्म के सीक्वल का ट्रेलर देख कर लगा था &#2...
कहानी फ़िल्म के सीक्वल का ट्रेलर देख कर लगा था &#2...
लोकतंत्र की गाड़ी के तीन पहिए होते हैं- विधायि&#23...
एक तकलीफ भरी कहानी जो आपने सालों-साल सुनी हो, आ&#...
वर्तमान राजनीति पर कुछ विचारप्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से राजनीति में मेरे दो ही आदर्श रहे है। भूतपूर्व माननीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भूतपूर्व माननीय राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और आज अटल जी की ही कविता की कुछ पंक्तियाँ याद आती है।बाधाएँ आती हैं आएँघिरें प्...
ईश्वर प्रकृति हम और हमारे उत्तरदायित्व :-     तुम दिशा भटक गये हो अपना मार्ग स्वयं ढूंढों। एकाकी कोई नहीं अपनी सहायता स्वयं करो। यह प्रकृति है यही तुम्हें तुम्हारे गंतव्य तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी।     प...
प्रगतिशील चेतना के कवि रमाशंकर यादव विद्रोही की कविताओं में जनचेतनापरिवर्तन : साहित्य, संस्कृति और सिनेमा की वैचारिकीISSN 2455-5169वर्ष 1 अंक 3 जुलाई-सितम्बर 2016तेजस पुनियास्नातकोत्तर हिंदी विभागराजस्थान केंद्रीय विश्विद्यालयबांदरसिंदरी, अजमेरकविता और वास्तविक जीव...
कुछ दिन पहले एक मित्र ने मैसेज में मुझे ठरकी बोला पता नहीं किस आधार ठरकी करार देते हैं लोग। उसी के एक शब्द पर टूटी फूटी सी कविता "ठरकी"बड़ा पुराना रोग हैठरक काकिसी को ठरक हैअपने वज़ूद काकिसी को ठरक हैअपने ठरकपने काठहर करठिठक करठरक का ठरकी होना जानादेखता रहता हूँ।यूँ...
ए अल्लाह, ए दो जहानों के मालिक ओ मालिक तेरा ये गुनाहगार बन्दा सारे गुनाहों की पोटली लेकर तेरी बारगाह में हाज़िर है। तू जानता है। कि मैं नहीं जानता कि आज़तक कितने गुनाह कर बैठा। कितनी बदतियाँ की, कितने झूठ बोले अग़र तू सबकुछ जानता है। तो तुझसे बेहतर कोई नहीं जानता और त...