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भाषा भावों की वाहिका होती है।"सञ्जीवनी" में भाषा के माध्यम से एक लघु प्रयास किया है उन भावों को व्यक्त करने का जो कभी हमें खुशी प्रदान करते हैं, तो कभी ग़म ,हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं और हम अपने आप को असहाय महसूस करते हैं। सञ्जीवनी-1."ब्रजबाला" मे श्री-राधा-क...
दूर से देखा रथ आताब्रज वालों का ठनका माथालगा कान्हा आ रहा आज वहाँहो गये इक्ट्ठे थे जहाँ तहाँरथ देख के आगे भाग पड़ेलगा भाग्य हैं उनके जाग पड़ेकान्हा से मिलने की इतनी लगनउस तरफ था भगा हर इक जनपास से देखा तो चकित हुएयह तो अपना कान्हा है नहीँयह तो कोई और ही है रथ परक्य...
गुम कृष्ण थे मीठी यादों मेंउन कसमों और उन वादों मेंजो वह गोपियों के संग करते कभी-कभी उनसे थे डरतेयह सब उद्धो देख रहा थाऔर मन ही मन सोच रहा थाकृष्ण तो इतने बड़े हैं राजाझुकती उनके सम्मुख परजाफिर क्यों नहीँ वो खुश रहते हैंकुछ न कुछ सोचते रहते हैंक्या कमी है राज-महल...
 पोस्ट लेवल : उद्धो - कृष्ण संवाद
सञ्जीवनी - सर्ग : कृष्ण-गोपी प्रेमब्रज की याद--------------------------------------------------------------------------------आज याद कर रहे कृष्ण राधेतुमने ही सब कारज साधेबन कर मेरी अद्भुत शक्तिभर दी मेरे मन में भक्तिहर स्वास में नाम ही तेरा हैइसमें न कोई बस मेरा है...
कृष्ण - सुदामा (खण्ड - ३)जब जागा तो द्वारिका में थाकैसे पहुँचा ? यह समझा न थाअब दामा ने सोचा मन मेंआ पहुँचा! तो क्यों न मिले उससेमन पक्का करके जाएगाऔर जाते ही उसे बताएगामुझे कुछ भी नहीं चाहिए उससेबस मिलने की इच्छा है मन मेंवो नहीं मिलेगा ! तो भी क्या?वह दूर से उसको...
कृष्ण - सुदामा (खण्ड - २)हर्षित है उसका मन ऐसेमिल गया हो नव जीवन जैसेजैसे ही दामा ने कदम बढ़ायाकृष्ण को भी वो याद था आयाबोले रुक्मणी से तब कृष्णायाद आ रहा मुझे सुदामागुरुकुल के हम ऐसे बिछुड़ेऔर फिर अब हम कभी न मिलेकृष्ण ऐसे बतियाते जातेदामा की बात बताते जातेहँस देत...
संजीवनी के द्वितीय खण्ड कृष्ण-सुदामा में श्री कृष्ण और सुदामा के मधुर मिलन का वर्णन है यह तेीन भागों मे विभक्त हैकृष्ण - सुदामा (खण्ड - १)हरे कृष्ण - हरे श्यामाहर पल जाप करे सुदामा थी मन में उसके खुशी अनंतजीवन में आ रहा था बसंतपत्नी का शुक्र करे हर पलमिल जाएगी उसको...
संजीवनी के प्रथम खण्ड ब्रजबाला भाग ५ मे श्री राधा-कृष्ण संवाद और अमर प्रेम का वर्णन हैराधा-कृष्ण संवादसुनी देवो की जो करुण पुकारहुई कृष्ण की दृष्टि भी अपारजब देखी उग्र रूप राधाकान्हा ने यह निर्णय साधाकिसी तरह राधा को मनाऊँ मैंअपना स्वरूप बताऊँ मैंकान्हा ने मन में व...
संजीवनी के प्रथम खण्ड ब्रजबाला के इस चौथे भाग मे देवों द्वारा श्री राधा जी की स्तुति की गई है जब राधा जी श्री कृष्ण जी के मथुरा जाने की बात सुन कर क्रोधित हो उठती है तो देव श्री कृष्ण स्तुति कर श्री राधा जी को शान्त करने की प्रार्थना करते हैं देव स्तुतिजय कृष्ण...
 पोस्ट लेवल : 4.देव स्तुति ब्रजबाला
ब्रजबाला भाग तीन शक्ति स्वरूपिणी राधा मे श्री राधा जी की अद्भुत शक्ति और श्री कृष्ण जी के प्रति उनका अनन्य प्रेम व्यक्त किया है जब श्री राधा जी को ( द्वित्तीय भाग-व्याकुल मन ) पता चलता है कि श्री कृष्ण जी माता यशोदा के पुत्र नही है ,वो मथुरा जाने वाले हैं और वहां प...