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गये वन को राम लखन सीताऔर छोड़ गए है प्यारे पितायह देख दुखित है शत्रुघ्नपीड़ा से भरा था उसका मनसर रख के वह माँ की गोदीऔर सुध-बुध सारी ही खो दीआँखों से तो आँसू बहतेचिल्ला चिल्ला कर यूं कहतेभाई के बिन मैं न रहूंगादुख पिता का भी कैसे सहूंगा ?नहीं यह सब मैं सह सकता माँव...
मानस की पीडाभाग 7.भरत विलापश्री राम जय राम जय जय राममन मे केवल श्री राम का नामअब था भरत नाना क घरपर हर क्षण बसा राम अन्दरशत्रुघन भी था भरत के साथअब कर रहे थे आपस मे बात्जाने क्यो व्यकुल हो रहा मनवहाँ खुश हो भैया राम लखनआँखो मे आँसु भी आ रहेदोनो ही दुखित हुए जा रहेम...
मानस की पीडाभाग6.वन गमनसिया राम के साथ लखनतैयार है अब जाने को वनहोना था आज राज्याभिषेकखुश भी था अवधवासी हर एकपर हुई थी यह अनहोनी बातछा गई थी जैसे काली रातराजा नही बनेन्गे अब श्री रामऔर छोड जाएँगे अवध धामहर अवधवासी था सोच रहानही किसी को कोई होश रहासबकी आँखे थी भरी ह...
 पोस्ट लेवल : मानस की पीडा 6.वन गमन
मानस की पीडाभाग5.उर्मिला- लक्षमण सम्वादलक्ष्मण-उर्मिला सम्वाद मे वन गमन पूर्व का चित्रण किया हैलक्ष्मण् - उर्मिला तब नव - विवाहित थे बहुत कठिन होता हैकिसी के लिये भी ऐसे हालात मे रहना , लेकिन उर्मिला औरलखन रहे जिसके बारे मे हमने कभी सोचा ही नहीकैसे रही होगी एक नव्-...
भाग 4.राम-लक्षमण सम्वादजय गणपति जय सूर्यदेवजय विशणु ब्र्ह्मा औ महेषकर रहे पूजा आज उर्मि-लखनखुश था महल का हर एक जनआज होगा राम का रज्याभिषेकवर्षो से देखा था सपना एकमाता-पिता का अरमान थाजब उनका आँगन वीरान थासोचते थे उनका भी होगा सुतसूर्यवन्श का सूर्य देखेगा अवधआज वो द...
मानस की पीडा तृत्तीय भाग मे दशरथ के मन मे कैकेयी द्वारा राम-वनवास का वर मांगने पर दुविधा का वर्णन है वो श्री राम के लिए सबकुछ त्यागने को तैयार है और श्री राम को कूट्नीति भीसिखाना चहते है परन्तु वन भेजने के पक्ष मे नही है दुविधा मे दशरथसारे महलो मे कितने खुशपाये जो...
मानस की पीडा के द्वितीय भाग राम-स्तुति मे तुलसी दास जी द्वारा पत्नी की धिक्कार खा कर घर त्याग कर श्री राम चरणो मे समर्पण कर देने पर प्रार्थना की गई हैइसके उपरान्त तुलसी दास पूरी तरह से राममय हुए और महान ग्रन्थों की रचना कर डालीराम स्तुतिजय राम राम श्री रामजग मे पाव...
प्रथम भाग "तुलसीदास वैराग्य की रात" मे तुलसीदास के जीवनकी उस रात को व्यक्त किया है जब वे पूर्ण रूप से श्री राम केचरणो मे आए और रामचरित मानस ,विनय-पत्रिका, कवितावली,दोहावली,जानकी मङ्गल्,पार्वती मङ्गल्......जैसे पावन ग्रन्थ रच डालेजब जब श्री राम का नाम आयेगा, तुलसीदा...