ब्लॉगसेतु

घर के कोने में बैठा-बैठा फूँक रहा हूँ,उस अधजली सिगरेट को। कुछ वक़्त हो चला है,फूँकते-फूँकतेधूम्र-अग्नि से बना क्षणिक मिश्रण वह। डगमगा रहे हैं पाए कुर्सी के बैठा हूँ जिसपर,कारण वाज़िब है ! तीन टाँगों वाली,वह कुर्सी बैठकर सोचता ह...
क्या करूँगा ! ये ज़माना रुख़्सत करेगा चस्पा करेगा गालियाँ मुझपर हज़ारों। कुछ कह सुनायेंगे, तू बड़ा ज़ालिम था पगले !कुछ होके पागल याद में,नाचा करेंगे। ⬌मैं जा रहा हूँ ज़िंदगी तूँ लौट आ !गा रहा हूँ गीत जीवन धुन बना !मर रहा हूँ मैं जो प्रतिक्षण...
मच्छर बहुत हैं,आजकल गलियों में मेरे। बात कुछ और है उनकी गली की !लिक्विडेटर लगाकर सोते हैं वे भेजने को गलियों में मेरे क्योंकि !संवेदनाएं न शेष हैं ,अब मानवता की। पानी ही पानी रह गया घुलकर रसायन रक्त में अब कह दिया है&nbs...
 मैं हूँ अधर्मी ! तैरती हैं झील में वे ख़्वाब जो धूमिल हुए। कुछ हुए थे रक्तरंजित सड़कों पर बिखरे पड़े। चाहता धारण करूँ शस्त्र जो हिंसा लिए याद आते हैं, वे बापू स्नेह जो मन में भरें। भूख भी तांडव मचाती रह-रहकर पापी...
 जीवित स्वप्न !चाँद के भी पार होंगे घर कई !देखता हूँ रात में मंज़र कई चाँदी के दरवाज़े बुलायेंगे मुझे ओ मुसाफ़िर ! देख ले हलचल नई वायु के झोंकों से खुलेंगी खिड़कियाँ जो स्वर्ण की !पूर्ण होंगी, स्वप्न की वो तारीख़ें ...
"फिर वह तोड़ती पत्थर"वह तोड़ती पत्थरआज फिर से खोजता हूँ'इलाहाबाद' के पथ परदृष्टि परिवर्तित हुईकेवल देखने मेंदर्द बयाँ करतेहाथों पर पड़े छालेफटी साड़ी में लिपटीअस्मिता छुपातीछेनी -हथौड़ी लिएवही हाथों में,दम भरप्रहार करवह तोड़ती पत्थरआज फिर से खोजता हूँइलाहाबाद के पथ परपरि...
''अविराम लेखनी'' लिखता जा रे !तूँ है लेखक रिकार्ड तोड़ रचनाओं की गलत वही है तूँ जो सही है घोंट गला !आलोचनाओं की पुष्प प्रदत्त कर दे रे ! उनको दिन में जो कई बार लिखें लात मार दे ! कसकर उनको जीवन में एक बार लिखें&...
'शोषित' ओ बापू ! बड़ी प्यास लगी है पेट में पहले आग लगी है थोड़ा पानी पी लूँ क्या !क्षणभर जीवन जी लूँ क्या !धैर्य रखो ! थोड़ा पीयूँगा संभल-संभल भर हाथ धरूँगा दे दो आज्ञा रे ! रे ! बापू सौ किरिया, एक बार जीयूँगाना ! ना ! 'बुधिया' कर ना...
"पुनरावृत्ति" 'सोज़े वतन' अब बताने हम चले 'लेखनी' का मूल क्या ?तुझको जताने हम चले !'सोज़े वतन', अब बताने हम चले ..... भौंकती है भूख नंगी मरने लगे फुटपाथ पर नाचती निर्वस्त्र 'द्रौपदी' पांडवों की आड़ में हाथ में चक्र है 'सुदर्शन'&...
''अवशेष'' सम्भालो नित् नये आवेग रखकर रक़्त में 'संवेग' सम्मुख देखकर 'पर्वत' बदल ना ! बाँवरे फ़ितरत अभी तो दूर है जाना तुझे है लक्ष्य को पाना उड़ा दे धूल ओ ! पगले क़िस्मत है छिपी तेरी गिरा दे ! आँसू की 'गंगा'धुल दे,पाप तूँ सा...