ब्लॉगसेतु

हैं अनमोल खजाने मेरेदादा दादी नाना नानीप्यार दुलार लुटाते पल पलगा गा लोरी सुना कहानीकभी घुमाते पार्क कभीमेला ले जाते अपने संग मेंभूल बुढ़ापा अपना सारारंग जाते बच्चों के रंग मेंबच्चों के संग बच्चे बनकरखेलें कूदें हंसते हंसतेलोटपोट हो जाते शैतानीबचपन की याद जो करतेमम...
अरशद अली अंसारी लेखक: विजय चतुर्वेदीनवीन के मोबाइल की घंटी बज रही थी  'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा' की धुन उसने अपने कॉलर ट्यून पर लगा रखी थी आवाज इतनी तेज थी कि जैसे ही बजती  तो घर के सारे सदस्यों को देशभक्ति का बोध तो अवश्य ही करा देती थी।&...
            जब परशुराम जी का संदेह दूर हुआ तब कहीं जाकर उनका क्रोध शांत हुआ। फिर तो उनके वापस जाने के बाद ही लोगों की जान में जान आई वरना सबकी सांसें अटकी हुई थीं कि पता नहीं कब क्या अनर्थ हो जाय। फिर तो जनक जी ने गहाराज दशरथ जी को आमं...
           रामचंद्र जी के धनुष तोड़ते ही सारा माहौल पलक झपकते ही बदल गया। जनक जी का पछतावा, माता सुनयना का संदेह और सीता जी की सारी व्यग्रता पल भर में छूमंतर हो गई। सब की जान में जान आई। खुशियों का सूरज शोक की बदली से निकल कर फिर से अप...
मां तुम इतना क्यों सहती होघुट घुट कर जीती रहती होजकड़ी हुई बेड़ियों में तुममुझको कैदी सी लगती होबडे भोर से देर रात तकथक कर चूर न होतीं जब तकखटती रहती हो मशीन सीचलता रहेग ऐसा कब तकजिंदा लाश बनी फिरती होमां तुम इतना क्यों सहती होकब बोलोगी मुंह खोलोगीबंधन सारे कब तोड़...
                         मित्रो, देश में भले ही संकट हो। किसान आत्महत्या कर रहे हों, नौजवान पढ़ लिख कर, परीक्षा पर परीक्षा देकर रोजगार की आस लगाए मारे मारे फिर रहे हों, महंगाई की मार से गृहणियां बिलबि...
                                  ( 1 )बागन मोर चकोर करे धुनि कलियन मुख अलि चूम रह्यो रीटेरत श्याम बजाय बंसुरिया सुध बुध सगरी छीन रह्यो रीआओ चलौ सब काम धाम तजि मन ऐसो हुलसाय रह्यो...
बुरा न मानो है होली**************** ना तुम खोलौ ना हम खोलीना तुम बोलौ ना हम बोलीहैं राज की बातें जो गहरीजनता तो है अंधी बहरीहै पर्देदारी सगी बहनराजनीति की छोटी मुंहबोलीना तुम खोलौ ना हम खोलीएक थैली के चट्टे बट्टेहैं एक अखाड़े के पट्ठेसत्ता की खातिर नाच रहेहम स...
सभी प्रियजनों को होली की शुभकामनाएं******************************                               ( 1 )            जाय फिरंगन देश बसे पिया चोट हिया कि कहे का...
    सुननेवालों को वही कहानी बांधे रहती है जिसमें कदम कदम पर चौंकानेवाले मोड़ आते है। हर समय यह धुकधकी बनी रहती है कि पता नहीं अब आगे क्या होता है। श्रोता जो सोच भी नहीं पाता वैसी घटना अचानक घट जाती है। जब उसे लगता है कि हां अब आगे सब ठीकठाक चलेगा तभी कोई...