ब्लॉगसेतु

एक बार सभी देवी देवता अपने बच्चों के साथ महादेव के घर पहुँचे । विविध पकवानों की खुशबू से पूरा कैलाश सुवासित हो उठा था । अन्नपूर्णा अपने हाथों सारे व्यंजन बना रही थी ! मिष्टान्न में खीर,रसगुल्ला,गुलाबजामुन,लड्डू... इत्यादि के साथ अति स्वादिष्ट मोदक बन रहा था ।भोजन श...
(लिखती तो मैं ही गई हूँ, पर लिखवाया सम्भवतः श्री कृष्ण ने है )भूख लगी थी,रोऊँ...उससे पहले बाबा ने टोकरी उठा ली !घनघोर अंधेरा,मूसलाधार बारिश,तूफान,और उफनती यमुना ...मैं नारायण बन गया,अपने लिए,बाबा वासुदेव और माँ देवकी के लिए ।घूंट घूंट पीता गया बारिश की बूंदों को,शा...
सोई आँखों से कहीं ज्यादा,मैंने देखे हैं,देखती हूँ,जागी आंखों से सपने ।सकारात्मक,आशाओं से भरपूर ...बहुत से सच हुए,और ढेर सारे टूट गए !पर हौसले का सूर्योदयबरक़रार है,क्योंकि विश्वास मेरे सिरहाने है,बगल की मेज,खाने की मेज,रसोई,बालकनी,खुली खिड़की,बन्द खिड़की,... और मेरे प...
रात में,जब कह देते हैं लोग शुभरात्रिवक़्त के कई टुकड़े पास आ बैठते हैं,सन्नाटा कहता है,सब सो गए !लेकिन जाने कितनी जोड़ी आँखेंजागती रहती हैं,लम्बी साँसों के बीचज़िन्दगी को रिवाइंड करती हैं,फिर एक प्रश्नआँखों के सूखे रेगिस्तान में तैरता है"जिन देवदारों ने तूफानों में दम...
गणपति सुखकर्ता,वक्रतुंड विघ्नहर्ता,गौरीनन्दन,शिव के प्यारे,कार्तिकेय की आंखों के तारे,खाओ मोदक,झूम के नाचो,झूम के नाचोमहाकाय ... गणपति सुखकर्ता ...लक्ष्मी संग विराजो तुमसरस्वती संग विराजो तुमज्ञान की वर्षा,धन की वर्षाकरके हमें उबारो तुमगणपति सुखकर्ता ...आरती तेरी म...
खूबसूरत,सुविधाजनक घरों की भरमार है,इतनी ऊंचाईकि सारा शहर दिख जाए !लेकिन,वह लाल पक्की ईंटों से बना घर,बेहद खूबसूरत था ।कमरे के अंदर,घर्र घर्र चलता पंखा,सप्तसुरों सा मोहक लगता था ।घड़े का पानी,प्यास बुझाता था,कोई कोना-विशेष रूप से,फ्रिज के लिए नहीं बना था ।डंक मारती ब...
यूँ तो मुझे अब बात-बेबात,कोई दुख नहीं होता,लेकिन विष-अमृत का मंथनचलता रहता है !मन के समन्दर से निरन्तर,सीप निकालती रहती हूँ,कुछ मोती,कुछ खाली सीपों का खेलचलता रहता है ।निःसन्देह,खाली सीप बेकार नहीं होते हैं,उसमें समन्दर की लहरों कीअनगिनत कहानियाँ होती हैं,कुछ निशान...
राजनीति थी,श्री राम ने रावण से युद्ध किया,सीता को मुक्त कराया,फिर अग्नि परीक्षा लीऔर प्रजा की सही गलत बात कोप्राथमिकता देते हुए वन भेज दिया !फिर कोई खबर नहीं लीकि सीता जीवित हैंया पशु उनको खा गए,या जब तक जिंदा रहीं,निर्वाह के लिए,उनको कुछ मिला या नहीं ।क्या सीता सि...
काश मैं ही होती मेघ समूह,गरजती, कड़कती बिजली ।छमछम,झमाझम बरसती,टीन की छतों पर,फूस की झोपड़ी पर,मिट्टी गोबर से लिपे गए आंगन में ।झटास बन,छतरी के अंदर भिगोती सबको,नदी,नाले,झील,समंदरसबसे इश्क़ लड़ाती,गर्मी से राहत पाई आँखों में थिरकती,फूलों,पौधों,वृक्षों की प्यास बुझाती,क...
दिल करता है,आगे बढ़ूँ और मुखौटे उतार दूँ,कभी-कभी उतारा भी है,लेकिन-बहुत जटिल प्रक्रिया है ये,मुखौटे लगनेवाले,असली चेहरों को लहूलुहान करने की कला में,निपुण होते हैं ।और ... दुनिया उन पर ही विश्वास करती है,शायद करने को,या चुप रहने को बाध्य होती है ।लेकिन ये मुखौटे,सिर...