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पुत्री की बस एक ही बार , विदाई नहीं होती |माँ-बाप के होते वो कभी , पराई नहीं होती |हर बार वही ममता , वही तो भाव आता है ,पुत्री का अपने घर से , कैसा गहरा नाता है ?हँसती है खिलखिला के , जब खुशियाँ महकती हैं |यों लगे बगिया में ज्यों , चिड़ियाँ चहकती हैं |परियों सी लाड...
पुत्री कभी पराई न होना ,दुनिया का दस्तूर है ,हम भी बहुत मजबूर हैं ,देनी तुम्हें विदाई है ,वही शुभ घड़ी आई है ,नव-जीवन की उषा में तुमहमें देख मत रोना ,पुत्री कभी ...........तेरे अश्रू छलक गए तो ,हम भी रोक न पाएँगे |अपनी प्यारी बिटिया को हमनहीं विदा कर पाएँगे |बिन ते...
कोरोना सच में है वायरसया ये कोई घोटाला है |कि मुँह खोले खड़े विध्वंसके मुँह का निवाला है |कि लगती चाल है कोई , कहीं पे कुछ तो काला है |कि दुनिया बँध के रह जाए,कहीं तो इसका ताला है |कि दुनिया चाँद पे पहुँची ,न क्यों वायरस संभाला है ?कि मन में ये बैठा के डर ,कि...
मैंने परी नहीं देखी , परन्तु माँ को देखा है ।कोई कल्पना नहीं , ये मेरी भाग्य रेखा है ।क्या कोई परी होगी , जो मेरी माँ से सुन्दर हो ?बिलकुल नहीं , माँ तुम्हीं ममता का समंदर हो ।तुमसे बढ़कर न हुआ , कोई भी न होगा ,मुझमें समाई माँ , तुम मेरे मन के अंदर हो ।मातृ दिवस की...
माँ शारदे प्रश्नावली - २कल रात मेरे पास आ गयी माँ शारदे ,कहने लगी कुछ प्रश्नों के मुझको जवाब दे ।मैंने कहा माँ तुम तो स्वयं ज्ञान की दाता , है कौन सा सवाल , जो तुमको भी न आता ।मैं अदना सी अनजान सी , कुछ भी तो न जानूँ ,फिर भी हैं क्या सवाल , एक बार तो सुनूँ ।कह...
कोरोना .................तुमने  पाँव पसारे , बिना विचारे |न जाने कौन सा अदृश्य पाप हो ?पूरी धरा पर फैल गया या कोई श्राप हो |जो भी हो अब तेरा कल्याण निश्चय हो जाएगा |भारत की भू पे आके अब ,विनाश तेरा हो जाएगा |आया था एक बार पहले भी एक रक्तबीज तेरी तरह |फैल गया था...
पापा ………………………………..तुम्हारी साँसों में धडकन सी थी मैं , जीवन की गहराई में बचपन सी थी मैं ।तुम्हारे हर शब्द का अर्थ मैं , तुम्हारे बिना व्यर्थ मैं , तुम्हारी हर आशा , मुस्कान मैं तुम्हारे रहते हर गम से अनजान मैं ।तुम्हीं मेरी दुनियादारी थे , निराशा में आशा की च...
एक खुली चिट्ठी-पी.एम. की    एक खुली चिट्ठी लिखने को , मन मेरा ललचाया है ।सच जानो मेरे ख्याल में , बस पी. एम. ही आया है ।हम भी बडे लोग हैं यारो , छोटी सोच नहीं रखते ।पी.एम से कम हम भी किसी की , चिट्ठी खुली नहीं लिखते ।अच्छा छोडो ये बातें , इससे न...
यह लेख मैने २०११ में एक छोटी सी अंधश्रद्धा को देखकर लिखा था । आज फ़िर से वही दोहराने पर मजबूर हूँ----भारत भूमि , वो पावन भूमि जिसे देवी देवताओं और ऋषि मुनियों की धरा कहा जाता है , जहां कदम कदम पर कोइ न कोइ तीर्थस्थल है और हर दिन कोई न कोई त्योहार है , जहां जन्म लेना...