ब्लॉगसेतु

लॉकडाउन का उपयोग कौन किस तरह कर रहा है, इस बारे में तो किसी ने बताने की कोशिश ही नहीं की. बहुतायत लोगों ने अपना ये समय सोशल मीडिया पर कोरोना के आसपास ही बनाये रखा. मोदी जी के जनता कर्फ्यू के पहले से ही ऐसा आभास होने लगा था कि किसी न किसी दिन लॉकडाउन जैसी स्थिति बने...
कलम किस तरह परिस्थितियों के अधीन हो जाती है, इसका उदाहरण वर्तमान परिदृश्य में सहजता से मिलता है. इस समय वैश्विक रूप से चीनी वायरस कोरोना का कहर देखने को मिल रहा है. हर तरफ सभी के विचारों में बस एक यही बिंदु दिखाई दे रहा है. दूसरे की क्या कहें, हम खुद इससे बंधे से ह...
सकल विश्व वर्तमान में एक चीनी वायरस, कोरोना की चपेट में आया हुआ है. यद्यपि इस सम्बन्ध में यूरोप की कुछ प्रयोगशालाओं द्वारा इसके प्राकृतिक वायरस होने की बात कही गई है तथापि इस थ्योरी पर कोई विश्वास नहीं कर रहा है. इस अविश्वास का कारण स्वयं चीन है. बहरहाल, अभी इस पर...
हम सभी इस समय लॉकडाउन वाली स्थिति में हैं. बहुत आवश्यक या कहें कि अनिवार्य होने की स्थिति में ही घर से निकलें अन्यथा घर पर ही रहें. ऐसा बहुत से लोग कर रहे हैं और बहुत से लोग नहीं कर रहे हैं. जैसी जिसकी सोच, बहरहाल जो लोग लॉकडाउन का पूरी ईमानदारी और अनुशासन से पालन...
21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा हुई तो बहुत से लोगों को लगा कि उनको घर में कैद कर दिया गया है. प्रधानमंत्री के शब्द कुछ ऐसे थे भी कि लोगों ने इसे एक तरह का कर्फ्यू ही समझा. समझना भी चाहिए था. खैर, चर्चा इसकी नहीं. लॉकडाउन का कौन, कितना, किस तरह से पालन कर रहा, यह उसकी म...
आज दो खबरें पढ़ने को मिलीं. दोनों ख़बरें एक ही स्थान से संदर्भित हैं. दोनों ही खबरें एक ही बिंदु पर केन्द्रित हैं. एक खबर मिली कि चीन के वुहान में आज से बस सेवा बहाल कर दी गई. इसी के साथ ये भी खबर पढ़ने को मिली कि वुहान में जिन लोगों को कोरोना मुक्त घोषित कर दिया गया...
मौत का आँकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है. ये और बात है कि हमारे देश में अभी ऐसा स्पष्ट नहीं दिख रहा. कहीं हमारे यहाँ आँकड़े छिपाए तो नहीं जा रहे? बहरहाल, सत्य कुछ भी हो अभी दिखने वाला सत्य यह है कि हम सुधरेंगे नहीं. . #हिन्दी_ब्लॉगिंग
सीएए को लेकर देश भर में तमाम राजनैतिक दलों के साथ-साथ मुस्लिम भी विरोध में हैं. देश भर में इसे लेकर हिंसा, उपद्रव होते रहे हैं. कोरोना वायरस की महामारी के चलते दिल्ली में सड़क जाम किये बैठे शाहीन बाग़ के विरोधियों को भी वहाँ से हटा दिया गया है. अब खुले रूप में कहीं भ...
किसी व्यक्ति का जन्म जितना बड़ा सच है, उससे कहीं अधिक बड़ा सच उसकी मृत्यु भी है. चर हो या अचर, जीव हो या वनस्पति सभी के जन्म के साथ ही उसका मरना सुनिश्चित हो जाता है. इन्सान के जीवन में क्या-क्या घटित होगा, क्या-क्या नहीं, क्या-क्या वह कर पायेगा, क्या-क्या नहीं, कितन...
आज मोदी जी के उद्बोधन में एक अभिभावक जैसी संवेदना की झलक मिली. विगत लम्बे समय से मोदी जी के लगभग हर एक उद्भोधन को, भाषण को सुना है मगर कभी भी उनको अटकते नहीं देखा है. आज ऐसा नहीं था. धाराप्रवाह भाषण देने वाले मोदी जी आज न तो अपनी लय में दिखे और न ही अपने अंदाज में....