ब्लॉगसेतु

तू हिन्दू है तुझे यदि हिन्दु होने पर शरम आएतो लानत है, तो लानत है हजारों बार लानत है ।।करोड़ों साल का गौरवमयी इतिहास बिसराये तो लानत है, तो लानत है हजारों बार लानत है ।।आज फिर भारती माँ को सपूतों की जरूरत है शिवा राणा की तू सन्तान यदि संकट से घबराए त...
 पोस्ट लेवल : कविता
बेशर्मों की लगी कतार ।अपना हित भी भूले यार ।दूर करो घटिया सरकार ।यू पी में योगी इस बार ।।आज प्रदेश करे चीत्कार ।30 साल से हूँ बीमार ।बसपा सपा हैं सिर पे सवार ।अब इनको दीजै अपवार ।यू पी में योगी इस बार ।।सपा है बाबर की औलाद ।इसमें सारे हैं जल्लाद ।हिन्दु विहगहिं हैं...
जिससे हो देश का उत्थान और सनमानदोनों हाथ जोड़ उसे सिर मैं झुकाता हूँराजनीती से नहीं है मेरा कोई सरोकारकवि हूँ मैं कविता से पहचाना जाता हूँकोई दल-बल नहीं आत्मबल से "आनन्द"अपनी उड़ान आसमान को दिखाता हूँपर करे देश का जो अपमान रंच-मात्रउसके विरुद्ध फिर कलम उठाता हूँ ।।डॉ...
अर्ज़ है --जनता ने जिनको दिया था कभी अधिकारवे ही जनता के ठेकेदार बने बैठे हैं ।जिनसे था डर किस्ती के डूब जाने कावही किस्ती के पतवार बने बैठे हैं ।जिसने न छोड़ा भैंस-गाय का चारा "आनन्द"आज वो हमारे वफादार बने बैठे हैं ।जितने भी थे डकैत चोर राजनीती में वेसब आज एक परिवार...
भारत माता की जयआतंक और अन्‍याय विवश हमने जब हिम्‍मत खो दी ।फिर देश महाचीत्‍कार कर उठा, मोदी मोदी मोदी ।।सन् 47 से हमने सत्‍ता कांगरेस के हाँथ दिया ।पर भ्रष्‍ट कांगरेसी नेताओं ने जनता को भुला दिया ।हम आस लगाये बैठ रहे अब-अब ये देश सम्‍हालेंगे ।क्‍या पता हमें ये धीरे...
यहि राष्‍ट्रधर्म कै बात आज हम हिरिदय माँझ छुपा लेंगे । सिंहन कै शासन खतम हुआ अब देश सियार संभालेंगे ।।इ गठबन्‍धन कै दौर हुवै का फरक कउन जीता हारा जौ अबकी बहुमत पूर्ण मिला बनवाइब इक बंगला न्‍यारा जौ जनाधार कमजोर परा दुसरे से हांथ मिला लेंगे ।। सिंहन कै शासन खतम हुआ...
 पोस्ट लेवल : कवि आनन्‍द अवधी
तुम ही कहो मनमीत मैं क्‍या गीत गाऊँकिस बात पे हँसूं कहाँ आँसू बहाऊँ ।।वेदों से उपजी हिन्‍दु संस्‍कृति नित्‍य नयी इसके आगे उपराम हुईं सभ्‍यता कईइसने जीना सिखलाया पशु से पृथक कियासद्भाव सिखाकर सबके अवगुण दूर कियाकितनी तरह इतिहास का उपक्रम सुनाऊँ ।।तुम ही कहो मनम...
 पोस्ट लेवल : कवि आनन्‍द अवधी
यह सत्य-सनातन-धर्म-रीति, वैखरी-वाक् वर्णनातीतविधि के हाँथों में पली-बढ़ी, विस्तारित इसकी राजनीतिइसके ही पूर्वज सूर्य-चन्द्र-नक्षत्र-लोक-पृथ्वीमाताइसकी रक्षा हित बार-बार नारायण नर बन कर आताकितना उज्ज्वल इतिहास तुम्हारा बात न यह बिसराओ ।।हिन्दू तुम कट्टर बन जाओ...
 पोस्ट लेवल : कवि आनन्‍द अवधी
हिन्‍दू का बुलन्‍द हो नारा हिन्‍दी-हिन्‍दुस्‍थान हमारा हिन्‍दु-धर्म इतिहास पुराना कौन भला इससे अनजाना प्रेम-धर्म का ताना-बाना सुरमय जीवन-गीत सुहाना अमृतमय जीवन-रस-धारा हिन्‍दी-हिन्‍दुस्‍थान हमाराहिन्‍दी रग-रग बसे हिन्‍दु के तन्‍तु...
अरसों के बाद मन की आज पोटली खुलीतब लेखनी चली, तब लेखनी चली ।।भरसक प्रयास पर भी जब रसना नहीं हिली तब लेखनी चली, तब लेखनी चली ।।1- हर ओर अत्‍याचार है , हर हाँथ में तलवार है नीरस हुआ संसार है, अब लुप्‍तप्राय प्यार है जब प्रेम की सरिता ने अपनी...
 पोस्ट लेवल : कवि आनन्‍द अवधी