ब्लॉगसेतु

साँसें खर्च हो रही हैं बीती उम्र का हिसाब नहीं, फिर भी जिए जा रहे हैं तुझे ऐ ज़िन्दगी तेरा जवाब नहीं.   देख तेरी बेरुखी इस कदर मन करता है छोड़ने का तुझे, रोक लेतीं हैं नादानियाँ तेरी   कि तू इतनी भी खराब नहीं.   फूल, कली, सितारे, चंदा सबमें खोज...
 पोस्ट लेवल : कविता
कितने बजे पहुँचोगी स्टेशन? रुद्रांश ने सीधा सा सवाल पूछा. क्यों, मिलने की बहुत जल्दी है? ट्रेन के समय पर ही पहुंचेंगे. उधर से अनामिका ने खिलखिलाते हुए उसकी बात का जवाब दिया. दोनों तरफ से फिर हलकी-फुलकी नोंक-झोंक होते हुए बात समाप्त हुई. ट्रेन अपनी स्पीड से दौड़ी जा...
 पोस्ट लेवल : प्रेम कहानी कहानी
फूल खिलने लगे गुलशन के मगर,फूल गुमसुम हैं कितने घर के मगर.कौन आया जहाँ में ये हलचल हुई.आज डरने लगे लोग खुद से मगर. दौड़ती-भागती ज़िन्दगी है थमी,न आये समझ क्या गलत क्या सही.सबकी आँखों में कितने सवालात हैं,उनके उत्तर नहीं हैं मिलते मगर.  लोग हैरान हैं और परेशान है...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत
लॉकडाउन में कहीं आना-जाना तो हो नहीं रहा है सो दिन-रात मोबाइल, लैपटॉप की आफत बनी हुई है. शुरू के कुछ दिन तो बड़े मजे से कटे उसके बाद इन यंत्रों के सहारे दूसरे लोग हमारी आफत करने पर उतारू हो गए. सुबह से लेकर देर रात तक मोबाइल की टुन्न-टुन्न होती ही रहती है मैसेज के आ...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
चीनी उत्पादों के जैसे इसकी तासीर न निकली. जैसे सारे चीनी उत्पाद सुबह से लेकर शाम तक वाली स्थिति में रहते हैं ठीक उसी तरह से इस कोरोना वायरस को समझा गया था. हर बार की तरह इस बार भी चीन को समझने में ग़लती हुई और कोरोना हम सबके गले पड़ गया. कोरोना का इधर गले पड़ना हुआ उध...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
खाना खाने के बाद वे दोनों टैरेस पर आकर खड़े हो गए. अपने-अपने एहसासों को अपने अन्दर महसूस करते हुए दोनों ही ख़ामोशी से बाहर चमकती लाइट्स को, काले आसमान को, उनमें टिमटिमाते तारों को देखे जा रहे थे. उनकी ख़ामोशी के साथ चलती प्यार भरी लहर में घड़ी ने अवरोध पैदा किया. उसने...
मोबाइल को मेज पर टिका कर वह कुर्सी पर पसर गया. ‘कभी अपने घर को देखते हैं’ की तर्ज़ पर उसने एक नजर ड्राइंग रूम कम स्टडी रूम पर दौड़ाई. अस्तव्यस्त तो नहीं कहा जायेगा मगर करीने से लगा भी नहीं कहा जा सकता. पढ़ने के अलावा भी तमाम शौक के उसी कमरे में अपना आकार लेने के कारण...
आँख खुलते ही श्रीमती जी को चाय के लिए आवाज़ लगाई. सुबह से तीसरी बार आँख खुली है. लॉकडाउन के कारण न सुबह का समय रह गया और न रात का. रात को जल्दी सोने की कोशिश में देर रात तक बिस्तर पर जाना हो पाता है. जल्दी सोने की कोशिश इसलिए क्योंकि सुबह जल्दी उठकर फिर सोना होता है...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
सुबह के इंतजार में रात जागते-सोते काटी. सुबह होने के बाद इंतजार उसकी खबर का. थोड़ी-थोड़ी देर में मोबाइल को देखता कहीं वह घंटी सुन न पाया हो. कहीं फोन के बजाय मैसेज ही न किया हो. कभी सोचता कि वह खुद ही फोन करके जानकारी कर ले फिर कुछ सोच कर अपने को रोक लेता. व्यग्रता क...
 पोस्ट लेवल : कहानी लघुकथा
गले में कैमरा लटकाए वह बाजार में टहल रहा था. फोटोग्राफी के शौक में अक्सर वह यूँ ही टहलता रहता. कभी शहर में, कभी गाँव में, कभी बाजार में, कभी खेतों में, कभी दिन में, कभी रात में. टारगेट को फोकस करते ही एक पल को उसकी आँखें चमक उठीं. जो वहाँ उसकी कल्पना में नहीं था उस...