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आज कहानी का तीसरा भाग=====================कतरा-कतरा ज़िन्दगीडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर====================== हरिया और राघव को चुप देखकर रामदेई ने फिर सवाल दागे-‘‘का भओ, कछु बोलत काये नईंयां? कछु हो तो नईं गओ?’’ ‘‘अब घरे घुसन देहौ कि नईं, कि इतईं दरवाजई पै अदाल...
 पोस्ट लेवल : कहानी साहित्य
कल आपने पढ़ा पहला भाग...आज दूसरा भाग===============================कतरा-कतरा ज़िन्दगीडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर==================== ‘‘का हुआ बेटा?’’ हरिया ने प्रश्न उछाला। उसके पुत्र ने बिना कुछ कहे खेत के किनारे खड़े ट्रेक्टरों और खेत में हो रही खुदाई की तरफ इशारा...
 पोस्ट लेवल : कहानी साहित्य
ये कहानी हमें बड़ी समझ में आई। इस कारण आप पाठकों की सुविधा से इसे चार भागों में प्रकाशित किया जाएगा। कृपया अन्यथा न लेकर इस कहानी का पाठन करेंगे।आज पहला भाग======================कतरा-कतरा ज़िन्दगीडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर==================== बस से उतर कर हरिया न...
 पोस्ट लेवल : कहानी साहित्य
जोर-शोर से नारेबाजी हो रही थी। महाशय ‘अ’ चुनाव जीतने के बाद वह मंत्री बनने के बाद अपने शहर में पहली बार आ रहे थे। उनके परिचित तो परिचित, अपरिचित भी उनके अपने होने का एहसास दिलाने के लिए उनकी अगवानी में खड़े थे। शहर की सीमा-रेखा को निर्धारित करती नदी के पुल पर...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
उसने चूल्हे में कुछ सूखी लकड़ियाँ डालकर उनमें आग लगा दी और चूल्हे पर बर्तन चढ़ाकर उसमें पानी डाल दिया। बच्चे अभी भी भूख से रो रहे थे। छोटी को उसने उठाकर अपनी सूखी पड़ी छाती से चिपका लिया। बच्ची सूख चुके स्तनों से दूध निकालने का जतन करने लगी और उससे थोड़ा बड़ा लड़का अभी भ...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
तब - लड़का लड़की बाजार में पहजी बार मिले। एक झलक में लड़का लड़की का दीवाना हो गया। उसने आकर लड़की से कुछ पूछा। चुलबुली लड़की ने शोख अंदाज में हँसी-ठिठोली में हर सवाल का जवाब दिया। लड़की की कलात्मक चुनरी के बारे में पूछने पर लड़के को पता लगा कि लड़की की सगाई हो गई है। लड़की क...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
शाम होते ही होने लगते हैं जमा, कुछ युवा सड़क के किनारे बनी चाय व पान की दुकान पर क्योंकि वे सड़क के दूसरे छोर पर बने मकानों के सुंदर मुखड़ों के दर्शनार्थ यहाँ आते हैं, और इस प्रकार अपनी अतृप्त आशाओं, इच्छाओं को अपनी आँखों के सहारे मिटाते हैं। एक नियम की भाँति हर शाम...
 पोस्ट लेवल : मेरी कविता साहित्य
सामाजिक संदर्भों में नई कविताडा0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर साहित्य की उपयोगिता सामाजिक संदर्भों में क्या हो; कैसी हो, पर हमेशा विमर्श होता रहा है। पूर्वी और पश्चिमी साहित्यिक चिन्तक इस पर अपनी अलग-अलग राय देते दिखाई देते हैं। इस बात पर जोर प्रमुखता से दिया...
‘यौन शिक्षा’, यदि इसके आगे कुछ भी न कहा जाये तो भी लगता है कि किसी प्रकार का विस्फोट होने वाला है। हमारे समाज में ‘सेक्स’ अथवा ‘यौन’ को एक ऐसे विषय के रूप में सहज स्वीकार्यता प्राप्त है जो पर्दे के पीछे छिपाकर रखने वाला है; कहीं सागर की गहराई में दबाकर...
‘निराला’ अपने आपमें एक समाज; अपने आपमें सम्पूर्णता; अपने आपमें कविता या कहें कि अपने आपमें ही सम्पूर्ण साहित्य संसार थे। ‘निराला’ मात्र नाम के ही निराला नहीं थे वरन् उनकी शैली, उनकी अभिव्यक्ति, उनका लेखन सभी कुछ तो निराला कहा जा सकता है। हिन्दी काव्य को नया आयाम द...