ब्लॉगसेतु

वेलेंटाइन डे वाली सुहानी नाईट का आनंद अब ख्वाबों में लिया जा रहा था. एकाएक बज उठती मोबाइल की तेज घंटी ने रोमांसपूर्ण खुमारी में व्यवधान डाला. दूसरी तरफ से माधुर्य में लिपटी आवाज़ ‘क्यों जी, शादी कब करोगे?’ सुनकर दिमाग चकरा गया. देह के समस्त तंतु जागृत अवस्था में आ...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
कन्या भ्रूण हत्या के समाधान हेतु केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गाँधी ने गर्भस्थ शिशु के लिंग की जाँच करने और बताने वाला बयान दिया. उनका कहना है कि प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीकरण करने और गर्भ के शिशु का लिंग बता देने से कन्या भ्रूण हत्या मामलों में क...
बचपन से साथ निभाती चली आई स्याही के कार्यों पर हमेशा से गर्व का अनुभव होता रहा है. स्याही जैसी बहुआयामी प्रतिभा को हमने न तो बचपन में नियंत्रित रखा और न ही कभी उसके बाद. कुछ लोगों का मानना है कि स्याही का काम सिर्फ और सिर्फ लेखन के लिए होता रहा है, अब वो भी गुजरे ज़...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
सूचना का अधिकार का उपयोग सार्थक और सकारात्मक तरीके से हो          इक्कीसवीं सदी के डेढ़ दशक गुजर जाने के बाद भी बहुतायत देशवासी अभी भी लोकतान्त्रिक प्रक्रिया के सार्थकतापूर्ण पालन करने की मानसिकता को विकसित नहीं कर सके है...
 पोस्ट लेवल : आलेख
चिल्लाने की रोकथाम पार्टी उनको लेकर संशय में है, वे पार्टी को लेकर संशय में हैं और दोनों अपनी-अपनी गतिविधियों को लेकर संशय में हैं. संशय भी विकट है. पार्टी उनको शत्रु समझ रही है और वे पार्टी को. लोगों में भी संशय इसको लेकर है कि कौन शत्रु की भूमिका में है और कौन मि...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
जो ऊपर जायेगा वो नीचे भी आएगा, जो कहीं चढ़ा है वो वहाँ से उतरेगा, ये प्रकृति का नियम है. इधर देखने में आ रहा है कि प्रकृति के इस नियम ने अपने आपको माहौल के अनुसार ढाल लिया है. अब देखिये न, कई-कई वस्तुओं के दाम एक-एक करके लगातार अपने आपको ऊपर ले जा रहे हैं किन्तु नीच...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
एक उम्र के बाद हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि बढ़ती आयु में उसके घर-परिवार वाले उसका ख्याल रखें. इस अभिलाषा के मोहपाश में सभी घिरे होते हैं, वो चाहे अमीर हो अथवा गरीब, राजा हो अथवा फ़कीर, दयालु हो या क्रूर, निरपराध हो या फिर अपराधी. यदि इसी अभिलाषा के चलते छोटा सा रा...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
भूमंडलीकरण के इस दौर में संचार-साधनों ने अपनी उपयोगिता को सिद्ध किया है. सूचना युग होने के कारण से संचार माध्यमों की महत्ता जनसम्पर्क के लिए और बढ़ जाती है. जनसंचार क्रांति के इस दौर में जहाँ संचार-माध्यमों ने विकास किया है वहीं ये भी माना जा रहा है कि हिन्दी ने भी...
 पोस्ट लेवल : आलेख
मत रोको मुझे रोकने वालो, मैं चलती हूँ. मत रोना मुझे चाहने वालो, मैं चलती हूँ. . अंश थी मैं वीणावादिनी का, ऋग्वेद की एक ऋचा थी, रूद्र जटाओं से जो निकली, वो लहर थी सुर सरिता की, रूप कोई हो, रंग कोई हो, हर स्वरूप में मैं बसती हूँ, मत रोको मुझे रोकने वालो, मैं चलती हू...
 पोस्ट लेवल : कविता
एक तरफ सरकारी स्तर पर शैक्षिक उन्नयन की नीतियां बनाई जाती हैं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा नित ही कोई न कोई नियम निकाल कर उच्च शिक्षा गुणवत्ता लाये जाने के प्रयास किये जाते हैं दूसरी तरफ खुद उसी के द्वारा उच्च शिक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता है. यदि गंभीरता से...
 पोस्ट लेवल : आलेख