ब्लॉगसेतु

तिरंगे को सच्ची सलामी अभी बाकी है कुमारेन्द्र किशोरीमहेन्द्र --------------------------                             &n...
 पोस्ट लेवल : आलेख
नंगत्व की विभिन्न प्रजातियाँ कुमारेन्द्र किशोरीमहेन्द्र+++++++++++++++++परिधानयुक्त समाज में परिधान-मुक्तता अपने आपमें एक आन्दोलन सरीखा है. आदि मानव ने जितनी मेहनत के बाद कपड़ों, वस्त्रों का निर्माण करके मनुष्य को परिधानयुक्त बनाया, मानव ने उतनी ही सहजता से स्वयं क...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस
फ़िज़ूल खर्च +++++++++++++वह तो ख़ुशी के मारे पागल हुई जा रही थी. उसके दोनों भाई उसके सामने खड़े थे. इस बार रक्षाबंधन पर मायके जाना नहीं हो पाया तो ये सोच-सोच कर दुखी थी कि किसे राखी बाँधेगी? उसके दोनों भाईयों की कलाई सूनी रह जाएगी. उसने बड़ी उमंग से, उत्साह से राखी क...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
मोबाइल में मैसेज के नोटिफिकेशन की घंटी ने आवाज़ दी, उसने लपक कर मोबाइल की स्क्रीन पर खेलना शुरू कर दिया। स्क्रीन पर उभर कर आई तस्वीर देख उसकी आँखें और बड़ी हो गईं। स्क्रीन नग्न स्त्री देह के साथ चमक रही थी, जिसके अंग-प्रत्यंग एक-एक कर बदलती फोटो के साथ सामने आते जा...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
@ राजा किशोरी महेन्द्र ++++++++++++++++का हो, काहे बमचक मचाये हो? जब देखो शुरू हो जाते हो सभ्यता, संस्कृति, शालीनता, अश्लीलता, आधुनिकता का लेक्चर देने. ये करना सही है, वो करना गलत है; ये करने से संस्कृति खतरे में पड़ेगी, वो करने से संस्कृति का विकास होगा; ये करना य...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य
देखते होंगे खुद को आईने में और शरमाते भी होंगे,सजाते होंगे मन में हमारे सपने और लजाते भी होंगे.एक लम्हा मिलन का वो सजाये हैं अपने दिल में,गुदगुदाते होंगे कभी उन्हें और कभी रुलाते भी होंगे.ख्वाब में मिलने की कोशिश और नींद आँखों में नहीं,याद करके हमें रात सारी करवटो...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल
है उन्हें प्यार मगर जताना नहीं आता है,दिल के ज़ज्बात को छिपाना नहीं आता है.वो क़त्ल करते हैं आँखों-आँखों में मगर,कातिल कहा जाए उन्हें नहीं सुहाता है.जिस हुस्न के गुरूर में मगरूर हैं वो,दो-चार दिन में वो भी ढल जाता है.बिन परवाने के शमा की अहमियत क्या,इश्क भी उसके दिव...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल
सागर जैसा दिल, आसमां सा मन है मेरा,प्यार की रुनझुन से सजा, जीवन है मेरा. कौन कहता है क्या, नहीं कोई इसकी फिकर,करता हूँ वही जो कह देता, मन है मेरा. दो कदम चल कर, तुम आओ तो सही,दोस्तों के लिए ही सजा, गुलशन है मेरा.माँगा जिसने जो भी, उसे हँस के दिया,कोई रुसबा न हो इत...
 पोस्ट लेवल : कविता
  मात्र दस वर्ष की उम्र में मछली की तरह तैरते हुए उसने जैसे ही अंतिम बिन्दु को छुआ वैसे ही वह तैराकी का रिकॉर्ड बना चुकी थी। स्वीमिंग पूल से बाहर आते ही उसको साथियों ने, परिचितों ने, मीडियाकर्मियों ने घेर लिया। सभी उसे बधाई देने में लगे थे। उसके चेहरे पर अपार...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
लघुकथा >>> मानसिकता ++++++++++++++++एक व्यक्ति था, जो रामनवमी के दिन पैदा हुआ था. उसके जन्म पर सभी ने उसके माता-पिता को बधाई देते हुए कहा था कि राम आया है...शुभ-शुभ ही होगा..... उसके बाद समाज की भीड़ में वो बालक खो गया...गुमनाम जिंदगी व्यतीत करता रहा..किसी...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा