ब्लॉगसेतु

रास्ते पर भागमभाग मची हुई थी। सभी लोग एक प्रकार की हड़बड़ी सी दिखाते हुए एक ही दिशा में भागे चले जा रहे थे। यह समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक ऐसा क्या हो गया है कि बाजार में इस तरह की अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। दो-एक को रोक कर पूछने की कोशिश की पर कोई...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
मां परेशान थी क्योंकि उसके सामने अपने बेटे को पालने का संकट था। पति था नहीं, स्वयं अकेली और साथ में नन्हीं सी जान। किसी तरह परेशानियां सहकर, दुःख उठाकर अपने बेटे को पाला-पोसा। मां अब भी दुःखी थी, परेशान थी क्योंकि अब वो अपने बेटे की पढ़ाई तथा रोजगार को ले...
 पोस्ट लेवल : साहित्य लघुकथा
परिवर्तन की दिशा : नारी की बदलती छवि-------------------------------- परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत सत्य है और इस सत्य का उद्घाटन समाज और उसके अंगों-अपांगों पर समय-समय पर होता रहता है। समाज का ही एक अंग होने के कारण साहित्य भी इससे अछूता नहीं है। हिन्दी साहित्य...
भोजपुरी लोकगीतों का माधुर्य ------------------------------------------- ‘लोक’ शब्द अपने आप में ही विशालता का अनुभव कराता है। वर्तमान में ‘लोक’ को अंग्रेजी के ‘फोक’ से जोड़कर उसके अर्थ को संकुचित करने का प्रयास किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति में लोक को हमेशा से ह...
 पोस्ट लेवल : साहित्य आलेख
कविता --- पहचान के साथ ही...अपराध करने के बाद भीअपराध-बोध कातनिक भी भान नहीं,नहीं एहसास किवह अपने हाथों सेमिटा चुका है एक सृष्टि को, वो हाथ जोझुला सकते थे झूला,दे सकते थे थपकी,सिखा सकते थे चलना,जमाने के साथ बढ़ना,उन्हीं हाथों नेसुला दिया मौत की नींद,मिटा दिये सपने,अ...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कविता
पड़े थे खण्डहर में पत्थर की मानिन्द उठाकर हमने सजाया है, हाथ छलनी किये अपने मगर देवता उनको बनाया है। पत्थर के ये तराशे बुत हम को ही आँखें दिखा रहे हैं, कहाँ से चले थे कहाँ आ गये हैं। बदन पर लिपटी है कालिख सफेदी तो बस दिखावा है, भूखे को रोटी, हर हाथ को काम इनका ये प्...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कविता
इन आंखों ने सीखा है सपने सजाना,सपने हकीकत में बदल कर रहेंगे।हो दूर कितना भी आसमान हमसे,सितारों को जमीं पर सजाकर रहेंगे।राही सफर में तो मिलते बहुत हैं,कोई साथ देगा कब तक हमारा।अलग अपनी मंजिल जुदा अपनी राहें,हमें खुद बनना है अपना सहारा।हमीं से है रोशन ये गुलशन सारा,न...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कविता
व्यंग्य कविता --- सन्देश का प्रभाव------------------------------------सड़क पर पड़े घायल को देख कर कतरा कर, आँखें बचाकर निकलते लोग। याद आता है मानवता का संदेश पर.... सहायता के लिए बढ़े कदमों को, विचारों को रोक देते हैं नगर के किसी ‘विशेष इमारत’ के सामने लगे ‘बोर्ड़ों’...
जमाने का चलन -- ग़ज़लअपने दर्द को हँस कर छिपा रहे हैं। आँखों से फिर भी आँसू आ रहे हैं।। जिनसे निभाया न गया दोस्ती को। वही अब हमसे दुश्मनी निभा रहे हैं।। हाथ छलनी किये तराशने में जिन्हें। वो पत्थर के खुदा आँखें दिखा रहे हैं।। जोश दिल में है जमाना बदलने का।...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल साहित्य
ग़ज़ल -- दुनिया तो सजाओ यारोऊपर वाले की दुनिया को यूं न मिटाओ यारो। रिश्ता इससे है कुछ तुम्हारा भी वो निभाओ यारो।। हम न होंगे कल को मगर ये दुनिया तो होगी। आने वालों के लिए ही ये दुनिया तो सजाओ यारो।। कोई मन्दिर है बनाता, मस्जिद बना रहा है कोई। पर दिलों के बीच तुम द...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल साहित्य