ब्लॉगसेतु

खुशियों का इंतज़ार -- कवितासुबह-सुबह चिड़िया ने चहक कर उठाया हमें, रोज की तरह आकर खिड़की पर मधुर गीत सुनाया हमें। सूरज में भी कुछ नई सी रोशनी दिखी, हवाओं में भी एक अजब सी सोंधी खुशबू मिली। फूलों ने झूम-झूम कर एकदूजे को गले लगाया, गुनगुनाते हुए पंक्षियों ने नया राग सु...
 पोस्ट लेवल : साहित्य कविता
ग़ज़ल -- फितरतअपने शीशमहल से औरों पर पत्थर फेंकते हैं। छिपा कालिख अपनी औरों पर कीचड़ फेंकते हैं।। हाथ हैं सने उनके किसी गरीब के खून से। भलाई की आड़ में लहू वो ही चूसते हैं।। दूसरों को जिन्दा देखें उनसे होता यह नहीं। मुँह से लोगों के वो अकसर निवाले छीनते हैं।। दरिया का...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल साहित्य
ग़ज़ल -- धूप-छाँवचारों ओर इंसान के जिन्दगी का अजब घेरा है। चाह है जिये जाने की पर मौत का बसेरा है।। लगा था जो कोशिश में जिन्दगी आसान बनाने में। अब उसी को पल-पल मौत माँगते देखा है।। जिन्दगी उसको आज करीब से छूकर निकली। मौत के साथ खेलना तो उसका पेशा है।। क्या पता था र...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल साहित्य
कविता == भावबोध============मैंभाव-बोध मेंयूं अकेला चलता गया,एक दरियासाथ मेरेआत्म-बोध का बहता गया।रास्तों के मोड़ परचाहा नहीं रुकना कभी,वो सामने आकरमेरे सफर कोयूं ही बाधित करता गया।सोचता हूंकौन...कब...कैसे....ये शब्द नहींअपने अस्तित्व कीप्रतिच्छाया दिखी,जिसकी अंधियार...
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ग़ज़ल --- अभिलाषा=============दूर अँधियारे में दीपक जलाना चाहता हूँ।पास से अपने अँधेरे मिटाना चाहता हूँ।।जिन्दगी की राह में आती हैं मुश्किलें।हर एक मुश्किल आसान बनाना चाहता हूँ।।खाकर ठोकर राह में गिरते बहुत हैं।गिरने वालों को उठाना चाहता हूँ।।दोस्तों ने दोस्ती के म...
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ग़ज़ल --- कुमारेन्द्र ===================बुझती डूबती जीवन ज्योति अपनी जलाओ तुम।जीवन ज्योति से दूर अंधकार भगाओ तुम।।अंधकार में क्यों जीना है सीख लिया।जीना है तो नया चिराग जलाओ तुम।। चिराग में जलने परवानों को आना ही है।परवानों को एक नई राह दिखाओ तुम।।नई राह पर आने व...
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ग़ज़ल ---- ज़िन्दगी ==============ज़िन्दगी को ज़िन्दगी के करीब लाती है ज़िन्दगी।कभी हँसाती, कभी जार-जार रुलाती है ज़िन्दगी।।रेत की दीवार से ढह जाते हैं सुनहरे सपने।एक पल में हजारों रंग दिखाती है ज़िन्दगी।।कोई नहीं जानता अंजाम अपने सफर का।सभी को अपनी मंजिल तक पहुँचाती है...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल साहित्य
एक मौन,शाश्वत मौन, तोड़ने की कोशिश मेंऔर बिखर-बिखर जाता मौन।कितना आसान लगता हैकभी-कभीएक कदम उठानाऔर फिर उसे बापस रखना,और कभी-कभीकितना ही मुश्किल सा लगता हैएक कदम उठाना भी।डरना आपने आपसे औरचल देना डर को मिटाने,कहीं हो न जाये कुछ अलग,कहीं हो जाये न कुछ विलग।अपने को अ...
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कविता - जीवन जीने को आया हूँ =================================(ये हैं हमारे स्टायलिश भांजे)=================================फिर जिन्दा होकर लौटा हूँ, मैं आज तुम्हारी नगरी में।जीवन जीने को आया हूँ, मैं आज तुम्हारी नगरी में।।अपनों को जाते देखा है,गैरों को आते देखा...
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आज अंतिम भाग -- समापन किश्त=================कतरा-कतरा ज़िन्दगीडॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर======================= ‘‘नईंऽ....ऽ....ऽ।’’ एक चीख के साथ हरिया उठ बैठा। ‘‘का भओ.....काये चिल्ला बैठे?’’ रामदेई ने एकदम उठकर पूछा। हरिया ने अपने आसपास देखा, वह तो अभी...
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