ब्लॉगसेतु

कमी न तुममें थीन मुझमें थी,और शायद कमी तुझमें भी थी,मुझमें भी थी ...कटु शब्द तुमने भी कहे,हमने भी कहे,मेरी नज़रों से तुम गलत थे,तुम्हारी नज़रों से हम !बना रहा एक फासला,न तुम झुके,न हम - शिकायतें दूर भी हों तो कैसे ?आओ, चुपचाप ही सही,कुछ दूर साथ चलें,मुमकिन है थक...
कुछ भी शाश्वत नहीं, तो जब तक जीवन है, अपनी एक पहचान बनाइये । परिवर्तन जीवन चक्र का सत्य है, लेकिन इस सत्य में अपनी जिद, अपनी नफरत का मसालेदार तड़का लगाना उचित नहीं । क्योंकि, "ज़िन्दगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मुकाम, वो फिर नहीं आते"इस गाने की पूरी पंक्तियों पर गौ...
समय को अर्थ नहीं दोगे तो निःसंदेह, समय तुमको निरर्थक कर देगा।  अब तुम भाग्य को कोसो या जाप करवाओ  ... समय को अर्थ दोगे तभी अर्थ पाओगे।समय चमत्कार करता है, पर ऐसा भी नहीं कि तुम कर्तव्यहीन होकर चमत्कार की आशा करोगे और समय सुन लेगा।  व्यर्थ के मोह से स...
आज जो हम हैं, यह पहले नहीं था ! पहले हम कम शिक्षित थे तो सबकुछ प्राकृतिक था।  कोई प्रदूषण नहीं, सबकुछ सहज, सरल।  देवी-देवताओं का प्राकृतिक वजूद था।  जैसे-जैसे मनुष्य शिक्षित हुआ, कृत्रिमता का साम्राज्य छाने लगा।  पहले राजाओं में युद्ध होते थे, द...
प्रिय ब्लॉगर मित्रों,प्रणाम |वो मोर मुकुट, वो है नंद लाला; वो मुरली मनोहर, बृज का ग्वाला; वो माखन चोर, वो बंसी वाला; खुशियां मनायें उसके जन्म की; जो है इस जग का रखवाला। ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सभी को सपरिवार #कृष्णाजन्माष्टमी के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाए...
 हमारे देश में कई स्थानों पर आज जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. कई अन्य स्थानों पर कल मनेगी कृष्ण के जन्म की अष्टमी...कृष्ण हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं. हमारा दिन, हमारी शाम, हमारे पर्व,  हमारा खान पान, हमारी परंपरायें ..कौन सी शाखा...
प्रिय ब्लॉगर मित्रों,प्रणाम |बैंक से फोन आया और मुझसे कहने लगे कि... "आप 6000/- रूपये प्रति महीना जमा करवाओगे तो रिटायरमेंट पे 1 करोड़ रुपये मिलेंगे!"मैं बोला कि ... "प्लान उल्टा कर दो आप मुझे अभी 1 करोड़ रुपये दे दो और हर महीने 6000/- रुपये लेते रहना मेरे...
सभी हिन्दी ब्लॉगर्स को मेरा नमस्कार।सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर (जन्म- 19 अक्तूबर, 1910 - मृत्यु- 21 अगस्त, 1995) खगोल भौतिक शास्त्री थे और सन् 1983 में भौतिक शास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता भी थे। उनकी शिक्षा चेन्नई के प्रेसीडेंसी कॉलेज में हुई। वह नोबेल पुरस्कार...
नमस्कार साथियो, इन्सान ने अपनी भाषा का आविष्कार, शब्दों का निर्माण बाद में किया था सबसे पहले उसने चित्रों का प्रयोग करना शुरू किया था. उनके बीच बातचीत का माध्यम चित्र ही हुआ करते थे. वे चित्र या तो दीवारों पर जिंदा रहे या फिर किसी धातु के टुकड़े पर. ये चित्र मानव मन...
प्रिय ब्लॉगर मित्रों,प्रणाम |एक राजा था,,,उसने एक सर्वे करने का सोचा कि मेरे राज्य के लोगों की घर गृहस्थी पति से चलती है या पत्नि से...??