ब्लॉगसेतु

सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।पिंगली वेंकैया (अंग्रेज़ी: Pingali Venkayya, जन्म: 2 अगस्त, 1876, आन्ध्र प्रदेश; मृत्यु: 4 जुलाई, 1963) भारत के राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' के अभिकल्पक थे। वे भारत के सच्चे देशभक्त, महान् स्वतंत्रता सेनानी एवं कृषि वैज्ञानिक भी थ...
सभी हिंदी ब्लॉगर्स को मेरा सादर नमस्कार।पुरुषोत्तम दास टंडन (अंग्रेज़ी: Purushottam Das Tandon, जन्म- 1 अगस्त, 1882, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 1 जुलाई, 1962) आधुनिक भारत के प्रमुख स्वाधीनता सेनानियों में से एक थे। वे 'राजर्षि' के नाम से भी विख्यात थे। उन्होंन...
ब्लॉग बुलिटेन-ब्लॉग रत्न सम्मान प्रतियोगिता 2019 का अड़तीसवां दिन, समापन दिन है।  यूँ तो यह 24 जुलाई को खत्म होना था, परन्तु, पहली बार को ध्यान में रखते हुए प्रोत्साहन के तौर पर हमने इसे 31 तक कर दिया।मृत्यु दंड | डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी - लघुकथा दुनिया&n...
दिशादिशा जिन्दगी की, दिशा बन्दगी की, दिशा सपनों की, दिशा अपनों की, दिशा विचारों की, दिशा आचारों की, दिशा मंजिल को पाने की, दिशा बस चलते जाने की....मिलिए दीपाली तिवारी से - उदासीhttps://deepali-disha.blogspot.com/2019/05/blog-post.html?m=1 मत छोड़ तू उम्मीद...
रेणु  रचनात्मकता के छोटे से प्रयास के रूप में ब्लॉग लेखन | मूलतः पढना ही सर्वोपरि |चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा ----- कविता - क्षितिज  चाँद नगर सा गाँव तुम्हारा भला ! कैसे पहुँच पाऊँगी मैं ? पर ''इक रोज मिलूंगी तुमसे  ''कह जी को बहला...
सरस दरबारी जी का ब्लॉग यादों का एक काफिला है, जो पृष्ट दर पृष्ट पूरा जीवन बन गया जिसमें गाहे बगाहे, कुछ सुरीले, सुखद क्षण, .....उनके हिस्से की धूप बन गए... बैठे होंगे आप कभी न कभी उस भीनी धूप में, उस गुनगुनी धूप में आज फिर अजन्मी - मेर...
लिखना जीवन के प्रति एक विश्वास है यशोदा अग्रवाल जी का।  प्रतियोगिता में शामिल होना उनकी ब्लॉग के प्रति निष्ठा है।  ज़िंदगी के मायने और है - धरोहर आज की चाहतें और हैकल की ख़्वाहिशें और हैंजो जीते है ज़िंदगी के पल-पल कोउसके लिये ज़िंदगी के मायने...
कविता वर्मा एक सक्रीय ब्लॉगर, नियमित पाठिका - अपने को उन्होंने तराशा है, सहेजा है, प्रस्तुत किया है - खुद को मील का पत्थर बनाया है।आज का दिन उनके साथ -कहानी Kahani : सामराज  सड़क के मोड़ पर उस पेड़ के नीचे फिर मेरी अभ्यस्त नज़र चली गई और उसे वहाँ ना देख अनाया...
कुछ रचनाएँ शेष रह गई हैं, जिसे मैं हफ्ते भर का अतिरिक्त समय लेकर प्रकाशित करुँगी।  अब कोई नई प्रविष्टि नहीं ले पाऊँगी। अरुण चंद्र रॉय जी को भी सब जानते हैं और उनकी कलम ने सबको बाँधा है।  यह कविता उनके कोमल मन का परिचय देती है।  कील पर टँगी...
एक लकीर खींची थीसामने, और पूछ रही थी वह -तैयार हो दौड़ने के लिए ?उसने बड़े रोचक अंदाज में उसे देखा, और कहा -पंख दे दो, तो उड़के भी दिखा सकती हूँ  ... समय ने पंख दिए, या विभा जी ने खुद गढ़ लिए, जो भी हो, आज उनका परिचय क्षेत्र बड़ा है, कार्यक्षेत्र बड़ा है,&...