ब्लॉगसेतु

सुषमा वर्मा - सपनों की एक सुराही है।  रोज सुबह सपनों की घूंट लेती है और आहुति' लिखती हैं।  प्रेम में सराबोर व्यक्ति इस दुनिया से अलग होता है और मुझे यह ख्वाबोंवाली  ब्लॉगर ऐसी ही लगती है, खुद देख लीजिये उसकी आहुति -'आहुति': तुम तो हार तभी गये थे...!!...
 खुश रह कर दूसरों को भी सदा खुश रखने का कुछ असंभव सा कार्य करते हुए खुशी पाने की भरसक कोशिश करता रहता हूं। आस-पास कोई गमगीन ना रहे यही कामना रहती है। श्री गगन शर्मा का यह परिचय उनकी कलम, उनकी सोच को गंभीर पहचान देती है।  प्रतियोगिता के दरम्यान मुझे इ...
जीते तो सब हैं, लेकिन कुछ लोग बखिया उधड़े,रिसते एहसासों के सहयात्री बन जाते हैं। इनकी  कलम अपने वजूद पर इतराती है, धूप,सूखा,आँधी - तूफ़ान, चुप चेहरों से सुलगते,छलकते,सुबकते,ठिठकते,मुस्कुराते शब्दों की एक रेखा खींचती हैं।  इन अर्थवान रेखाओं का मर्म हैं गिरिज...
वंदना गुप्ता, नाम ही काफ़ी है यह बताने के लिए कि कलम जब आग उगलती है तो वंदना उसे रगों में भर लेती हैं या फिर उसकी रगों में प्रवाहित होती हैं।  इस बेबाक आग से आपसब परिचित होंगे ही, तो इनके आग्नेय शब्दों से मिलते हैं -ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र: शतरंज के खे...
ज़िन्दगी का सार सिर्फ इतनाकुछ खट्टी कुछ कडवी सीयादों का जहन में डोलनाऔर फिर उन्ही यादों सेहर सांस की गिरह में उलझ करवजह सिर्फ जीने की ढूँढना !!"जीने की वजह ढूंढती, बनाती रंजू भाटिया को कौन नहीं जानता।  मेरे ब्लॉग के आरम्भिक दिनों का आकर्षण रही हैं रंजू भाटिया।&...
शिखा वार्ष्णेय को हम उनके शब्दों में पहले जान लें, फिर कुछ कहें -"अपने बारे में कुछ कहना कुछ लोगों के लिए बहुत आसान होता है, तो कुछ के लिए बहुत ही मुश्किल और मेरे जैसों के लिए तो नामुमकिन फिर भी अब यहाँ कुछ न कुछ तो लिखना ही पड़ेगा न. तो सुनिए. मैं एक जर्नलिस्ट हूँ...
श्रुति अग्रवाल, प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए ब्लॉग बनाया और उनके इस सफल प्रयास ने सिद्ध किया कि चाह हो तो कदम उठते ही उठते हैं, और सफलता भी तब कदम बढ़ाती है। चलिए, उनके इस हौसले के साथ हम भी अपना रिश्ता बनायें और उनको पढ़ें -अकल्पित   https://http...
पूजा अनिल एक मीठी आवाज़, एहसासों की गहरी नदी, शब्दों की बूँद बूँद सागर तक अपना ठिकाना ढूंढती हैं  ... जी हाँ, पाठक ही तो सागर हैं। आज यह कहानी प्रवाहित होकर आप तक आई है, सुकून मिलेगा -भीतरी तहों में - एक बूँद -चाय पियोगी?आयशा हैरान कि यह कौन पूछ रहा!-...
यह महज एक प्रतियोगिता नहीं है, ब्लॉग, ब्लॉगर की पहचान, उन सुनहरे दिनों को लौटाने के अथक प्रयास की एक मजबूत कड़ी है।  आपकी उपस्थिति,आपकी सराहना ब्लॉगरों के चेहरे पर एक खोई मुस्कान लौटाएगी और तय है कि वार्षिक अवलोकन तक हम कई ब्लॉग्स में प्राणप्रतिष्ठा कर पाए...
  एक ज़रा सी कोशिश सबको साथ जोड़ने की जब होती है तो एहसासों की अग्नि जलती है । चेहरे पर एक मोहक लालिमा होती है, एक अद्भुत यात्रा के  सारथी बने शब्द शब्द कृष्ण से कम नहीं लगते ।ऐसे ही सारथी के साथ आज हमारे बीच उपस्थित हैं देवेंद्र पाण्डेय जी -आग https:/...