ब्लॉगसेतु

समीर लाल जी, उड़न तश्तरी, - मेरा ख्याल है, ब्लॉग के बुनियादी समय से यह नाम उड़ान भर रहा है  ... उनकी कलम आज भी यही कहती है,"समीर लाल की उड़न तश्तरी... जबलपुर से कनाडा तक...सरर्रर्रर्र..."तो चलते हैं सर्रर्ररर्रर्रर्र से उनके ब्लॉग तक इस कहानी का सिरा थामे -आखिर ब...
वेदना तो हूँ पर संवेदना नहीं, सह तो हूँ पर अनुभूति नहीं, मौजूद तो हूँ पर एहसास नहीं, ज़िन्दगी तो हूँ पर जिंदादिल नहीं, मनुष्य तो हूँ पर मनुष्यता नहीं , विचार तो हूँ पर अभिव्यक्ति नहीं। शोभना चौरे जी ब्लॉग के प्रारंभिक दौर से लिख रही हैं और जीवन की व्यस्तताओं से परे...
ज्योति प्रकाश देहलीवाल जी का परिचय उनकी ही कलम से " मैं एक गृहिणी हूं। बचपन से ही पढ़ने-लिखने का शौक था। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं कहानियां प्रकाशित। ब्लॉगिंग के माध्यम से मैं अपना यह शौक पूरा कर पा रही हूं। मुझे विश्वास है कि यह ब्लॉग लोगों के मन से अ...
एहसासों की जब बारिश होती है, तब यादों का संदूक अतीत की पांडुलिपियों से भर जाता है।  कहानी, कविता की शक्ल लिए न जाने कितने रिश्ते बचपन के रुमाल, दुपट्टे में बंधे मिल जाते हैं - कुछ ऐसे ही रिश्ते के साथ आज इस मंच पर हैं मुदिता गर्ग।  अलमारी - एहसास अंत...
"मैंगो पीपल यानी हम और आप वो आम आदमी जिसे अपनी हर परेशानी के लिए दूसरो को दोष देने की बुरी आदत है . वो देश में व्याप्त हर समस्या के लिए भ्रष्ट नेताओं लापरवाह प्रसाशन और असंवेदनशील नौकरशाही को जिम्मेदार मानता है जबकि वो खुद गले तक भ्रष्टाचार और बेईमानी की दलदल में ड...
संगीता स्वरुप - 2008 से इनका ब्लॉग  गीत.......मेरी अनुभूतियाँ हमारे साथ है।  जीवन की आपाधापी में अनेकों बार हम रुक जाते हैं, पर विचारों का सैलाब नहीं थमता।  ऊपर से ठहरी हुई नदी कभी ठहरती नहीं, तभी तो आज वे हमारे बीच आई हैं - अपनी गूढ़ रचना क...
आज हम आपको मिलवाते हैं उषा किरण जी से, जिन्होंने हाल में ही अपना ब्लॉग बनाया, और पाठकों के साथ एक अद्भुत ताना बाना जोड़ा।  इनकी कलम में एक ऐसी ज़िन्दगी की ताकत है, जिससे हर कोई किसी न किसी तरह खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है।  ये स्वयं कहती हैं -"मन की उ...
ग़ज़ल की शाम हो या घनी धूप, दिल कहीं खो जाता है गुमनाम प्रतिध्वनियों में।  आँखें बंद हो जाती हैं, और पूरी प्रकृति गुनगुनाने लगती है। आजमाया होगा, एक बार फिर आजमा लीजिये दिगंबर नासवा जी के साथ  ... स्वप्न मेरे ...: पीढ़ी दर पीढ़ी से संभला एक ज़माना ...&...
प्रतियोगिता तो अपनी जगह है, हमें इस बात का हर्ष है कि पूरे एक महीने हम चुनिंदा रचनाओं से गुजरेंगे, ज़िन्दगी के नौ रस में भीगेंगे।  दूसरे दिन का जयघोष वंदना अवस्थी दूबे की कहानी से हम कर रहे, ब्लॉग जगत का एक जाना-माना नाम, जिनको पढ़ने का लोभ संवरण कोई भी साह...
प्रतीक्षा की घड़ियाँ खत्म हुईं, ब्लॉग के ऊपर छाए घने बादल बरस गए हैं, सोंधी खुशबू और सतरंगे इंद्रधनुष के साथ ये ब्लॉग बुलेटिन आपके सामने है । एहसासों की नदी एहसासों के समंदर से मिलने को आतुर है - लेखक और पाठक की अविस्मरणीय यात्रा शुरू हो गई है अपने साहित्यिक पड़ाव के...