ब्लॉगसेतु

सरस दरबारी जी का ब्लॉग यादों का एक काफिला है, जो पृष्ट दर पृष्ट पूरा जीवन बन गया जिसमें गाहे बगाहे, कुछ सुरीले, सुखद क्षण, .....उनके हिस्से की धूप बन गए... बैठे होंगे आप कभी न कभी उस भीनी धूप में, उस गुनगुनी धूप में आज फिर अजन्मी - मेर...
लिखना जीवन के प्रति एक विश्वास है यशोदा अग्रवाल जी का।  प्रतियोगिता में शामिल होना उनकी ब्लॉग के प्रति निष्ठा है।  ज़िंदगी के मायने और है - धरोहर आज की चाहतें और हैकल की ख़्वाहिशें और हैंजो जीते है ज़िंदगी के पल-पल कोउसके लिये ज़िंदगी के मायने...
कविता वर्मा एक सक्रीय ब्लॉगर, नियमित पाठिका - अपने को उन्होंने तराशा है, सहेजा है, प्रस्तुत किया है - खुद को मील का पत्थर बनाया है।आज का दिन उनके साथ -कहानी Kahani : सामराज  सड़क के मोड़ पर उस पेड़ के नीचे फिर मेरी अभ्यस्त नज़र चली गई और उसे वहाँ ना देख अनाया...
कुछ रचनाएँ शेष रह गई हैं, जिसे मैं हफ्ते भर का अतिरिक्त समय लेकर प्रकाशित करुँगी।  अब कोई नई प्रविष्टि नहीं ले पाऊँगी। अरुण चंद्र रॉय जी को भी सब जानते हैं और उनकी कलम ने सबको बाँधा है।  यह कविता उनके कोमल मन का परिचय देती है।  कील पर टँगी...
एक लकीर खींची थीसामने, और पूछ रही थी वह -तैयार हो दौड़ने के लिए ?उसने बड़े रोचक अंदाज में उसे देखा, और कहा -पंख दे दो, तो उड़के भी दिखा सकती हूँ  ... समय ने पंख दिए, या विभा जी ने खुद गढ़ लिए, जो भी हो, आज उनका परिचय क्षेत्र बड़ा है, कार्यक्षेत्र बड़ा है,&...
सीमा 'सदा' - एक शांत,सरस नदी सी ब्लॉगर, जिसने बिना कुछ चाहे खुद को गुलमोहर, देवदार जैसा बना लिया।  यूँ तो ज़िन्दगी के सारे अभिन्न रंग उनके ब्लॉग पर मिल जाते हैं, लेकिन माँ"और पिता"की छवि हर रंग का सारांश है। चलते हैं इस लिंक पर -माँ, तुलसी और गुलमोहर ...ht...
My Expression: डोलिया में उठाये के कहार डॉक्टर निशा महाराणा जी की एक भावप्रवण रचना। डोलिया में उठाये के कहार ले चल किसी विधि मुझे उस पार जहाँ निराशा की ओट में आशा का सबेरा हो तम संग मचलता उजालों का घेरा हो जहाँ मतलबी नहीं अपनों का...
प्रीति अज्ञात, अज्ञात की खोज में एक ज्ञात नाम।  भावों-शब्दों के साथ एक ऐसा रिश्ता है, जिसके साथ अज्ञात भी एक जुड़ाव महसूस करता है।  आज उनकी कलम की बारी,यूँ होता....तो क्या होता !: बाबा की बेंत बाबा की चमचमाती, सुन्दर, गोल घुण्डीनुमा बेंत जाने कितने ही...
एम वर्मा ने कहा,  जब कभी मैं दिल के गहराई में कुछ महसूस करता हूँ तो उसे कविता के रूप में पिरो देता हूँ। उन गहराइयों से आज हम एक बार फिर रूबरू होते हैं -एक चिड़िया मरी पड़ी थी - जज़्बात बलखाती थीवह हर सुबहधूप से बतियाती थीफिर कुमुदिनी-सीखिल जाती थीगुन...
  मैं और मेरा मन" रोहित श्रीवास्तव का मन से जुड़ा एक कदम है, ब्लॉग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने का।  जिसकी आँखों में उमड़ते-घुमड़ते बादलों से सपने होते हैं, वे हकीकत बन बरसते ही हैं, बन जाते हैं झील, पानी की पगडंडियां, नदी, समन्दर -  ... कभी बच्चों को...