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साहित्य की विभिन्न समर्थ विधाओं में एक विधा लघुकथा की भी है. लघुकथा को ज्यादातर लोग कहानी का छोटा रूप समझ लेते हैं जबकि वास्तविकता में ऐसा नहीं है. लघुकथा अपने आपमें एक सम्पूर्ण विधा है, एक स्वतंत्र विधा है. अपने छोटे स्वरूप में एक सन्देश देने का काम इसके द्वारा हो...
तकनीक से भरे दौर में चिट्ठी-पत्री की बात करना आश्चर्यजनक लग सकता है. इससे ज्यादा आश्चर्य की बात तो ये है कि कलम के द्वारा ग्रामीण संवेदनाओं को सहजता से उकेरने वाले लखनलाल पाल ने लगभग विलुप्त हो चुकी चिट्ठी-पत्री को उपन्यास का आधार बना दिया है. रमकल्लो की पाती के द्...
विटामिन ज़िन्दगी किसी एक व्यक्ति की कहानी मात्र नहीं वरन सन 1976 में जन्मे एक असामान्य बच्चे के असाधारण होकर राष्ट्रीय रोल मॉडल बनने की यात्रा है. इस यात्रा का चयन वह बालक अपने लिए स्वेच्छा से नहीं करता है बल्कि उसकी प्रकृति माँ स्वयं आकर उसका चयन करती है. इस चयन के...
जब कोई पुस्तक किसी ऐसे व्यक्ति की हो जो खुद आपमें ही समाहित हो तो उस पुस्तक को पढ़ने का आनंद अलग ही होता है. इस आनंद में और वृद्धि तब हो जाती है जबकि वह उस लेखक की पहली पुस्तक हो. यह बिंदु पढ़ने वाले को आनंदित और गौरवान्वित करता है. आनंद की सीमा यहीं आकर नहीं रुकती व...
अमूमन लेखों में कहानियों से रोचकता और प्रवाह देखने को नहीं मिलता है किन्तु शिखा वार्ष्णेय के लेखों में ये दोनों तत्त्व सहजता से दिखाई देते हैं. उनके देशी चश्मे से लन्दन को देखने का जो आनंद है वह अपने आपमें किसी मेले में घूमने जैसा है. उनके इन लेखों के द्वारा लन्दन...
भारतीय साहित्य, इतिहास परम्परा में व्याख्या, पुनर्व्याख्या की स्थापित मान्यता सदैव से रही है. ऐतिहासिक घटनाओं को काल, परिस्थितियों के अनुसार व्याख्यायित किया जाता रहा है. इसके पीछे व्यक्तियों की जिज्ञासा, अन्वेषण करने की प्रवृत्ति रही है. महाभारत का नायक कौन के जवा...
प्रति प्रश्न : एक दृष्टि सुरेन्द्र कुमार नायक के ‘प्रति प्रश्न’ उपन्यास में उपभोक्तावाद, बाजारीकरण तथा मूल्यहीनता के दाह परिलक्षित होते हैं. इस कृति का अधिकांश कथ्य वर्णात्मकता के माध्यम से प्रस्तुत हुआ है. वस्तुविधान रत्नेश, निधि, विजय, संता, रंजन, निमिष, डॉ० तिवा...
दो खण्डों में विभक्त प्रथम कविता संग्रह की रचनाएँ खंडित नहीं हैं. वे पाठक का तारतम्य अपने साथ-साथ खुद में अभिव्यक्त मनोभावनाओं से करवाती चलती हैं. ये किसी भी साहित्यकार के लिए सुखद अनुभूति होती है जबकि उसकी रचनाएँ उसकी कलम से साकार होने के बाद अपने विचारों को स्वतः...
बातों वाली गली में टहलते हुए अपने आसपास का माहौल ही नजर आया. जिस तरह से रोज ही जो निश्चित सी दिनचर्या लोगों की दिखाई देती है, कुछ-कुछ वैसी ही बातों वाली गली के लोगों की दिखी. लघुकथा जैसे छोटे कलेवर में विस्तृत फलक दिखाई दिया. वंदना जी अपने बचपन से लेकर अद्यतन लेखकी...
परिवार का आधार प्रेम-विश्वास पर आधारित होता है। इसमें भी पति-पत्नी का रिश्ता अत्यंत गंभीर माना गया है। पति-पत्नी का रिश्ता आपसी प्रेम विश्वास की पवित्र डोर के साथ जुड़ा होता है। इस पवित्रता का एहसास अपनी विशालता को न केवल इस जन्म में बल्कि सात जन्मों तक, जन्म-जन्मान...