ब्लॉगसेतु

दो असंगत लोगएक लाचार कंधाएक बेपरवाह सर.दो मिथ्या तर्कएक स्त्री की श्रेष्ठताएक पुरुष की पूर्णता.दो वर्जनाएंएक विधवा की हंसीएक प्रेमी का विलाप.दो उपलब्धियांएक बिना नींद का बिस्तरएक बिना प्रेम का सिंदूर.दो अनुपस्थितियांएक कविता में भावएक मर्सिया का प्रभाव.दो सलीकेएक भ...
 पोस्ट लेवल : कविता लम्बी कविता
उस रोज़जब पतझड़ धुल चुका होगाअपनी टहनियों को,पक्षी शीत के प्रकोप सेबंद कर चुके होंगे अपनी रागिनी,देव कर चुके होंगे पृथ्वी का परिक्रमण,रवि इतना अलसा चुका होगाकि सोंख ले देह का विटामिन,सड़कों पर चल रहा होगा प्रेतों का नृत्य,लोग दुबके होंगे मोम के खोल मेंसरकंडे की आँच पर...
 पोस्ट लेवल : कविता प्रेम कविता
मैंने बो दी है अपनी इच्छा'इस समाज में न जीने की'किसी गहरी मिट्टी के नीचेक्योंकि ये समाज सुधरने से रहाऔर मैं ख़ुद को मार नहीं सकती.कैसे जियूँ यहाँ तिल-तिल मरकरहंसने-बोलने पर पाबंदी लगीपढ़ने जाने पर लगीबाहर निकलने पर लगी.जब भी समझाती हूंबाबा अब सब सही हो गयाफ़िर कोई नई...
मैं दोषी हूँउन तमाम गुनाहों कीजो मैंने प्रेम करते हुए किए.मैं दोषी हूँउस प्रेम की भीजो तुमने महसूस किया.मैं दोषी हूँउन तमाम रातों कीजो तुम्हारे इंतज़ार में गुजारीं.मैं दोषी हूँउस पल कीजब मैंने तुम्हें अच्छा कहा.मैं दोषी हूँउस कल कीजिसमें तुम्हें साथ चाहा था.मैं दोषी...
ओ पुरुष,तुम्हें भी भीतर घुटता होगा कहींजब तुम अपने होठों पर रख लेते होमौन सलाखें;तुम्हें भी तो प्यारी होगी स्त्री उतनी हीजितना प्रेम तुम उससे पाते होऔर जब वही स्त्री तुम्हें समझती नहीं होगीतो मुरझा जाते होगे तुम भी दर्द सेजैसे दूब मुरझा जाती है चटख धूप से,तुम्हारा...
 पोस्ट लेवल : International mens day
बहुत गर्माहट देती हैंशीत ऋतु में तुम्हारी चुप्पियांजैसे किसी नवजात को माँ नेअपनी छाती में भींच रखा हो.एक अरसे के बाद तुम्हारा आनाऐसे भरता हैहमारी सर्द रातों में गर्मीजैसे किसी दुधमुँहे के तलवों परअभी-अभी की गई होगुनगुने सरसों के तेल की मालिश.छज्जे पर तुम्हारी राह त...
 पोस्ट लेवल : कविता प्रेम कविता
जब पहली बार निकलो यात्रा परतो कुछ भी न रखना सा&#2...
 पोस्ट लेवल : कविता
PC: Pexelदिन पर दिन वृहद होती मेरी इच्छाएंएक दिन मेरी कविताओं का कौमार्य भंग कर देंगी,उभरते हुए शब्दों के निशीथ महासागर मेंगहराई का एक मुहावरा भर बनकर रह जाएंगीसिर टिकाए हुए भाषा और देह के व्याकरण मेंविलुप्त हो रही स्मृतियों में तलाशी जाएंगीबावजूद भी इसके क्या संभव...
 पोस्ट लेवल : कविता
उस रोज़ मर गयी थी माँलोग सांत्वना दिए जा रहे थे,'&...
 पोस्ट लेवल : कविता
सब कुछ भूलने से पहलेमन कियाकि सब कुछ याद कर लू&#2...
 पोस्ट लेवल : कविता