ब्लॉगसेतु

तड़पेगी याद मेरी, फिर अधूरी चाहों में !भटकेंगे प्राण मेरे, फिर तुम्हारी राहों में !!छूकर वह पारिजात, कलियाँ कुछ सद्यजात।बंद कर पलकें, करोगे, याद कोई मेरी बात।सिमटेंगे गीत मेरे, फिर तुम्हारी बाँहों में !भटकेंगे प्राण मेरे, फिर तुम्हारी राहों में !!सावन की हो फुहार, य...
स्वर्ण संध्या, स्वर्ण दिनकरसब दिशाएँ सुनहरी !बिछ गई सारी धरा परएक चादर सुनहरी !आसमाँ पर बादलों मेंइक सुनहरा गाँव है,स्वर्ण-से क्षण, स्वर्ण-सा मन,स्वर्ण-से ये भाव हैं ।सोनपरियों-सी सुनहरी,सूर्यमुखियों की छटा ।पीत वस्त्रों में लिपटकरसोनचंपा महकता। सुरभि से उन्मत...
 पोस्ट लेवल : गीत
एक मुद्दत बाद खुद के साथ आ बैठेयूँ लगा जैसे कि रब के साथ आ बैठे !कौन कहता है कि, तन्हाई रुलाती है,हम खयालों में, उन्हीं के साथ जा बैठे।वक्त, इतना वक्त, देता है कभी - कभीइक ग़ज़ल भूली हुई हम गुनगुना बैठे।लौटकर हम अपनी दुनिया में, बड़े खुश हैंकाँच के टुकड़ों से, गुलदस्ता...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल
जीवन की लंबी राहों मेंपीछे छूटे सहचर कितने !कितनी यात्रा बाकी है अब ?कितना और मुझे चलना है ?कितना और अभी बाकी है, इन श्वासों का ऋण आत्मा पर !किन कर्मों का लेखा - जोखा,देना है विधना को लिखकर !अभी और कितने सपनों को,मेरे नयनों में पलना है ?कितना और मुझे चलना है ?...
इस जीवन की मरुभूमि परसजल सरोवर जैसे तुम !चुभते पाषाणों के पथ परकोमल दूर्वादल से तुम !पीड़ा की कज्जल बदरी नेढाँप दिए खुशियों के तारे,इक तारा कसकर मुठ्ठी में,बाँध लिया था, वह थे तुम !ग्रीष्म ऋतु के सूरज जैसादाहक दंभ सहा दुनिया का,शरद पूर्णिमा के मयंक सेझरते सुधा-बिंदु...
दूर गगन इक तारा चमकेमेरी ओर निहारे,मुझको अपने पास बुलाएचंदा बाँह पसारे ।पंछी अपने गीतों कीदे जाते हैं सौगातें,वृक्ष-लता सपनों में आकरते हैं मुझसे बातें ।झरने दुग्ध धवल बूँदों सेमुझे भिगो देते हैं,अपने संग माला में मुझकोफूल पिरो लेते हैं ।कोयलिया कहती है मेरेस्वर मे...
जीवन की दुस्तर राहों पर,कब तक चलना है एकाकी ?ठोकर खाकर गिर जाना हैऔर सँभलना है एकाकी !!!मैंने सबकी राहों से,हरदम बीना है काँटों को ।मेरे पाँव हुए जब घायलपीड़ा सहना है एकाकी !!!इन हाथों ने आगे बढ़कर,सबकी आँखें पोंछी हैं ।अपनी आँखें जब भर आईं,मुझको रोना है एकाकी !!!सीम...
उफ्फ ! कितना लिख रहे हैं लोग !लिख-लिख कर दरो दीवारों पर,बंदूकों पर, औजारों पर,तटबंधों पर, मँझधारों पर,जो भी मन में हजम ना हुआउसकी उल्टी कर रहे हैं लोग !उफ्फ ! कितना लिख रहे हैं लोग !!!लिखने से पहले पढ़ भी लो,अपने विचार को गढ़ भी लो,चेतना शिखर पर चढ़ भी लो !!!नशा ख्यात...
डाल से, टूटकर गिरता हुआफूल कातर हो उठा।क्यूँ भला, साथ इतना ही मिला ?कह रहा बगिया को अपनी अलविदा,पूछता है शाख से वह अनमना -"क्या कभी हम फिर मिलेंगे ?"एक तारा टूटकर, साथियों से रूठकरचल पड़ा जाने कहाँ, एक अनंत यात्रा !ओह ! वापस लौटना संभव नहीं !किंतु नभ की गोद में फिर...
 मन भूलभुलैया !!!भटकती हैं भावनाएँकल्पनाएँ बावरी सीछ्टपटा रहे विचारकौन राह निकलें ?एक राह दूसरी से, तीसरी से,चौथी से, पाँचवीं से.....गुत्थमगुत्था पड़ी हैं और सभी राहेंगुजरती हैं उसी मन सेभूलभुलैया है जोमन भूलभुलैया !!!मन भूलभुलैया !!!बादलों में बादललताओं म...