ब्लॉगसेतु

किसे अपना कहें हम, किसे बेगाना मुहब्बत का दुश्मन है सारा ज़माना। उसने सीखे नहीं इस दुनिया के हुनर चाँद को न आया अपना दाग़ छुपाना। मरहम की बजाए नमक छिड़का उसने जिस शख़्स को था मैंने हमदम माना।गम ख़ुद-ब-ख़ुद दौड़े चले आए पास हमने चाहा जब भी ख़ुश...
गर्दिश में हैं आजकल सितारे, क्या करें ?हमें धोखा दे गए सब सहारे, क्या करें ?कौन चाहता है, सबसे अलग-थलग पड़ना क़िस्मत ने कर दिया किनारे, क्या करें ?ख़ुद से ज्यादा एतबार था हमें उन पर बेवफ़ा निकले दोस्त हमारे, क्या करें ?लापरवाही थी, जीतने की न सोचना जब अप...
मैं क़ाबिल न था या मेरा प्यार क़ाबिल न था तुझे पाना क्यों मेरी क़िस्मत में शामिल न था। इश्क़ के दरिया में, हमें तो बस मझधार मिले थक-हार गए तलाश में, दूर-दूर तक साहिल न था। हैरान हुआ हूँ हर बार अपना मुक़द्दर देखकरग़फ़लतें होती ही रही, यूँ तो मैं ग़ाफ़िल न...
पूरी कायनात हैरान है तू आज मेरा मेहमान है। वस्ल की यादें, प्यार की ख़ुशबू ख़ुशियों का सारा सामान है। कैसे याद रहा तुझे वर्षों तक इस गली में मेरा मकान है। इसे बेज़ुबां न समझो लोगो दिल की भी एक ज़ुबान है। दुआएँ असर करती हैं आख़िर&nb...
ख़ामोशी है, तन्हाई है यादों ने महफ़िल सजाई है। दिल की बातें न मानो लोगो इश्क़ के हिस्से रुसवाई है। हमारा पागलपन तुम देखो हर रोज़ नई चोट खाई है।तमाम कोशिशें नाकाम रही क्या ख़ूब क़िस्मत पाई है। गुज़रे वक़्त के हर लम्हे ने रातों की नीं...
संभाल लेता ख़ुद को, गर होता सिर्फ़ तेरा ग़म ज़माना देता रहा मुझे, हर रोज़ एक नया ज़ख़्म। जब भी आदी हुए हालातों के मुताबिक़ जीने के हमें तड़पाने-जलाने के लिए, बदल गया मौसम। लाइलाज मर्ज़ साबित हुआ है दिल का टूटना न असर किया दुआओं ने, न काम आई मरहम। बीती ज़िंदगी का हर लम्हा भुल...
कभी रोओगे यार, कभी बहुत पछताओगे पत्थर दिलों से जब तुम दिल लगाओगे। किसी-न-किसी मोड़ पर सामना हो ही जाता है दर्द को सहना सीख लो, इससे बच न पाओगे। जो हुआ, अच्छा हुआ, कहकर भुला दो सब कुछ बीती बातें याद करके, नए दर्द को बुलाओगे। दोस्त बनाए र...
हर सफ़र में कामयाब होने की दुआ न दे अंगारों से खेल जाऊँ, इतना हौसला न दे।या तो दुश्मन बनके दुश्मनी निभा या फिरदोस्त बना है तो दोस्ती निभा, यूँ दग़ा न दे। कोहराम मचा देंगे, हो जाने दे दफ़न इन्हें मेरे दिल में सुलगते सवालों को हवा न दे। हक़ीक़त सदा रखन...
जिन ज़ख़्मों को ज़माने में इश्क़ के ज़ख़्म कहते हैं कसक के हद से बढ़ने को उसका मरहम कहते हैं। यही रीत है नज़रों से खेल खेलने वालों की दिल के बदले दर्द देने वाले को सनम कहते हैं। पतझड़ को बहार बना देने का दमखम है जिसमें उस सदाबहार मौसम को प्यार का मौ...
ख़ुशियाँ उड़ें, जले यादों की आग में तन-मन समझ न आए, ये इश्क़ भी है कैसी उलझन न आने की बात वो ख़ुद कहकर गया है मुझसे फिर भी छोड़े न दिल मेरा, उम्मीद का दामन समझ न आए क्यों होता है बार-बार ऐसा तेरा जिक्र होते ही बढ़ जाए दिल की धड़कनगम की मेजबानी करत...