ब्लॉगसेतु

" कुछ है खास "देखो इन हँसी रातों को, क्या इनमें कुछ है खास | जिन पर मुझे अभी भी, नहीं हो रहा है विश्वास | मुझे क्यों हो रहा है कुछ अलग सा अहसास |  इनमें कुछ तो कुछ है नया जिसका जादू मुझ पर है छाया | फिर भी मैनें कुछ न पा...
" ओस "हम लोग नहीं जानते,की भगवन की क्या मर्जी | कभी हिलाया तो कभी कपकपाए, क्या सर्दी है क्या सर्दी है | क्या किया जाए इससे निपटने के लिए, नहीं मन करता पानी से सटने में | आग जलने को हम मजबूर हैं,सर्दी इतना क्यों मगरूर है | आग भी इस...
" हमारा संसार "कुछ बदला सा लग रहा है,यह हमारा संसार कितना खूबसूरत था ये जहाँ जिस को मनुष्य ने कर दिया तबाह आसमाँ रंगीन हुआ करता था | बारिश भी रिमझिम हुआ करती थी अब काळा लगते हैं सब जिस पर साया है प्रदुषण का साँस लेना हो रहा है कठि...
" सितारों की तरह बिखर गई "मेरी टूटी हुई उम्मीद,सितारों की तरह बिखर गई | मुझे क्या पता था की ,मेरी जिंदगी इन्ही टुकड़ो पर ही संभल रही है | इन उम्मीदों को मैं फिर से ,जोड़ने की कोशिश करता हूँ | पर क्या करूँ मैं हमेशा,ही असफल हो जाता हूँ | मेरी...
" वह याद "वह हर याद जो हमें कुछ न कुछ,देने की चाहत करती है | जिंदगी के हर उस पल को,ख़ुशनुमार बनाना चाहती है | कभी ठहरती है यादें,और कभी यूँ ही गुजरती है | हवाओं के साथ बातें करते हुए,कुछ धीरे से आवाज में चिल्लाती है | अपनी बात सन्देश के साथ दे जा...
" बरसात "बरसात के दिन आए,नहाने में मज़ा आए | ये बड़ी - बड़ी बूँदें,जब भी धरती पर कूदें | बरसात के दिन आए छतरी न खोल बरसात भीगने को मन ललचाए | नहाले इस बरसात में  भीगा ये मैदान इस जहाँ में | कहाँ खेले बच्चे बेचारे,बरसात के द...
" ठण्ड के कोहरे "ये कोहरे भी कितने अजीब, जो देख नहीं सकते दूर दूर तक | भरी है कोहरे और प्रदूषण की चीज़,जो हमेशा हर लोगों के लिए हो रही है | कठिन भरी जिंदगी तनाव की अजीज, कुछ करने के लिए हो रही है | कठिनाइयों से भरपूर,ये ठण्डी और कोहरे है अजी...
" नदी "नदियाँ कैसे बहती हैं,न कभी ये थकती हैं | न ही ये कभी आराम करती हैं | नदियाँ अपने रस्ते को छोड़ देती है | लेकिन दूसरा बनाकर, अपनी मंजिल को छूती है | मैं भी नदियों की तरह,बहना चाहता हूँ | हर एक रास्ते से मंजिल,तक पहुंचना चाहते हैं...
" पानी " पानी है तो मेरा जीवन, अगर पानी न होता तो हम नहीं | पानी रहे साफ तो मैं भी साफ, पानी नहीं तो कोई नहीं माफ़ | पानी है तो जीवन है, पानी है तो कल की सुबह है |  सुधर जाओ तुम तुम सभी, वरना पाओगे पानी न कभी | पानी...
" फूल जो कुछ कहना चाहती है "हवाओं में हिलती हुई,वह फूल जो कुछ कहना चाहती है |अपनी सजी हुई टहनियाँ लेकर,हवाओं के साथ खेलना चाहती है |खुशबू से तन को महकाना चाहती हैं |आस पास पेड़ -पौधे से कहकर,अपनी खुशबू से मन को |यूँ ही बहलाना चाहती है |यह फूल के पौधेहवाओं से खेलना च...