ब्लॉगसेतु

" मुस्कुराते फूल "हवाओं में हिलती हुई वह फूल जो कुछ कहना चाहती है | अपनी सजी हुई टहनियों को लेकर, हवाओं के साथ खेलना चाहती है | खुशबु से तन को महकाना चाहती है आस पास पेड़ पौधों से कहकर,अपनी खुशबू से मन को बहलाना चाहती है | यह फूल के पौधे हवाओं से खेलना चाहती...
" बूँदे भी कुछ कहना चाहती है "ये बूँदे भी कुछ कहना चाहती है, कुछ बताना चाहती है | और कुछ सुनना चाहती है,जब मैं गिरूँ इस धरती पर,तो मुझे एक सरोवर में बचा लेना | या फिर तुम अपनी एक पात्र में,मुझे थोड़ी सी जगह दे देना | ऐसा बस लिए कुछ कर देना,मेरे अस्तित्व को ख़त्म मत...
" मेरे देश के शहीदों " मेरे देश शहीदों ने,करवाया हमें आज़ाद |  दुश्मनों से लड़कर,किया उनके परिवारों को बर्बाद | हम लोगों को मिली है आज़ादी, आज़ादी को मत करना बर्बादी | चाहे मेरे शहीदों के सामने, खड़ी कर दो सेना लेकिन शहीदों के मरने के बाद देश को अपने झुकने मत दे...
बाल सजग: कविता : मैं क्या बनूँ: " मैं क्या बनूँ " मैं क्या बनूँ, इस सवाल ने सताया | मैं क्या करूँ, किसी ने नहीं बताया | फिर मैं परिवार वालों से पूछा,...
" बूँद "जब भी पानी बरसता है, फिर बूँद जरूर बरसता है |  बूँद -बून्द से ही खेती है,जिसकी जरूरत हमको सदा होती है | बूँद -बूँद से बना है यह संसार, बिना बूँद नहीं होगी बड़ा पार | बूँद चीज है जो कभी मर नहीं सकती,बूँद के बिना कल्पना भी नहीं की जा सकती | बूँद से ही ज...
" बलिदान "बलिदान देकर अपनी जान,दिया हमें स्वतन्त्र जहान | न भूलेंगे हम उनके प्राण,जो दिया है हमको शान | दिन - रात उन्होंने लड़ी लड़ाई,तब जाकर हमें मिली रिहाई | संघर्ष भरा था हर समय,सोच में डूबा था हर नयन | वीर हुए इस देश में बहुत सारे,जिन्होंने दे दी जान वत...
" एक ख्वाईश "मेरी भी एक ख्वाईश है,तुम चाहे इसे ज़िद समझो | या फिर कोई अरमान समझो,किसी का न था साथ | मैं थी अकेली मासूम भोली और डरी, हवा के खिलाफ थी | बादल ने गरजते हुए दस्तक दी, मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही न रहा | फिर मैंने लम्बा सफर तय किया | | कवि : राज कुमार , कक्ष...
" बदला सा हूँ "मैं थोड़ा बदला सा हूँ, पहले थोड़ा ठीक था | पर मैं थोड़ा पतला हूँ,क्योंकि मैं थोड़ा बदला हूँ | मेरे भाषण में अंतर आया है,सोच में गहरी छाया है | जिम्मेदारी की अहसास तो है,पर निभाने का समय नहीं है | मैं बहुत बार गिर कर संभला हूँ, क्योंकि मैं थोड़ा बद...
" फूल बन जाऊँ "मन करता है फूल बन जाऊँ,सुन्दर सी महक फैलाऊँ | महान व्यक्तियों के लिए,मैं सुन्दर सी माला बन जाऊँ | एक घर के लिए मैं साया बन जाऊँ,मैं उन लोगों के लिए सहारा बन जाऊँ | क्यारियों और बगीचों के लिए,सुन्दर सा सजावट जाऊँ | मंदिर , मस्जिद दोनों के लिए के,रंग ब...
" चेहरे की मुस्कान "चेहरे की मुस्कान, यु ही बनाए रखना | हर मंजिल मेंहर दिक्कत में, यूँ ही बचाये रखना | रुकावटें लाखों आए, मगर तुम पीछे मत हटना | मिल कर लड़ेंगें हम, बस तुम यूँ ही मुस्कराते रहना | चेहरे की मुस्कान,यूँ ही बनाए रखना | कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8t...