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"त्योहारों की शुरुआत " हो गई है त्योहारों की शुरुआत | जिसमे दीपावली और दशहरा है खाश ,मेले सब जायेगे बच्चे हो या बूढ़े | सब मौज मस्ती करके आयेगे ,खिलौने होंगे और मिठाई विभिन्न वाइराइटी | जिसमे खिलौने की नहीं होगी गांरटी ,सब लोग इकट्ठे और होंगे भरमार |...
"पुरानी झलक देखा " पुरानी झलक देखा | आज मै अपने गाँव को अलग देखा ,पर मैने पुरानी झलक देखा | वो सड़क , वो गलिया ,बदल तो गयी है | पर उसमे चलने की ,अंदाज वही है | पैन से बहता पानी ,किसान और खेत की कहानी | बदल तो गयी है ,लेकिन गाँव की आवाज वही ह...
"पुरानी यादें" आज उस चीज को | याद करके हसीं आती है ,और मजाक सा लगता है | वो पुरानी बातें करके ,आज भले ही भूल गए हो | लेकिन कुछ बातें अभी भी याद है ,जैसे क्लॉस के समय | लंच करना , मैम का नकल करना ,दिन बदलते गए | यादें हमारी बढ़ती गई ,आज इतन...
 सर्दी  सर्दी ने कर दिया परेशान | खास -खासकर शरीर हो गया बेजान ,रात की नीद नहीं आती है | दिन में नाक बहुत सताती है ,दवा भी हो गया बे असर |ठीक करने की नहीं छोड़ी में कोई कसर ,खाने में न लगता है मन  |  पुरे शरीर हो गया है भांग ,सर्दी...
" मै कौन हूँ"मै कौन हूँ | मुझे नहीं पता पर ,एक आजाद पक्षी के तरह हूँ | मै हवाओ में टहलता हूँ ,झरनों में खेलता हूँ | कठिन परिस्तिथियों से गुजरता हूँ ,सूखे पत्तों के तरह बिखर जाता हूँ | लहरों के साथ गाता हूँ ,मैं अंधकार में बदल जाता हूँ | मुझ...
" हिन्द देश के बासी हम "  हिन्द देश के बासी हम | हिंदी नहीं किसी से कम ,पूरा जीवन हमने काटे | बोल -बोल कर हिंदी के सहारे ,इसके आगे फिके सारे गम | हिंदी है हम हिंदी नहीं किसी से कम ,क्या प्यारे -प्यारे शब्द निराले | अ से ज्ञ तक याद हमें है स...
"हिंदी दिवस "  उन शब्दों की श्रृगार है हिंदी | जो हर हिदुस्तानियों के लब्जो पर भंडार है हिंदी ,गहनों में सजावट है हिंदी |  हर एक शब्दों में बनावट है हिंदी ,सहज तरीके से बोले जाने वाली | फूल की किलकारी वह हिंदी ,इस पावक दिवस पर | नई उंम...
"जीवन की नयी शुरुआत "  हर एक सुबह जीवन की नयी | शुरुआत कराती है ,और हर शाम व्याकुल सी दिखती | जैसे अपन दर्द  क्या कराती है ,सुबह समय सूर्य की किरणे |  अपने ऊपर जम के बिखरती है ,एक -एक सुबह जीवन की नयी | शुरुआत कराती है ,मन अपना लक...
"  भोर -भोर  की है बात " भोर -भोर  की है बात | मै सोया था घर में टांग पसार ,हल्की सी रौशनी आ रही थी | मेरे चेहरे के पास ,मीच कर मै सोया आँख | बाहर चिड़ियाँ कर रही थी बात ,मचा -मचा कर शोर | भर दिये थे मेरे कान ,कह रही थी उठ जा...
" धूप को देककर मौसम बदल कर "धूप को देककर मौसम बदल कर | आया जब सब बादलजम कर ,लगे दिखाने अपना रंग -रूप | कहाँ चला गया न नजर आए थोड़ी भी धूप ,हवाओं के संग उड़ता चला आया | हर घर और खेत में छा गया ,गरज -मलक कर खूब वह बरसा | रात -दिन को कुछ भी न समझा ,ट...