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कहते हैं कि भगवान कुछ भी कर सकता है !चलिए, ज़रा आज़माते हैं-भगवान अगर है तो संविधान उसकी मर्ज़ी से ही बना होगा।लेकिन असंवैधानिक काम जगह-जगह पर हो रहे हैं !यहां जातिभेद होता है।यहां रंगभेद होता है।यहां स्त्री और पुरुष में भेद होता है।सिर्फ़ दिल्ली में ही, वो भी पैसेवाल...
नक़ली नास्तिकता की बात इस ग्रुप में कई बार उठी है। समझना मुश्क़िल हो जाता है कि कैसे पता लगाएं कि कौन नक़ली है कौन असली, अगर कोई नक़ली है तो उसे नक़ली होने से मिलता क्या है ?इसपर एकदम कोई फ़ैसला कर लेना बहुत आसान तो नहीं है, ठीक भी नहीं लगता फिर भी लोग ‘जगत मिथ्या है, भ्...
कुछेक बार यह बात उठाई गई कि इस ग्रुप में स्त्रियां नहीं हैं, या कम हैं। अगर ऐसा है तो क्यों है?इस संदर्भ में कुछ बातें तो पहले से ही साफ़ हैं, कुछ मैं अब साफ़ किए देता हूं।पुराने तो लगभग सभी सदस्य जानते हैं, नये भी जानते ही होंगे कि हम अपनी तरफ़ से किसीको भी ग्रुप में...
यह अद्भुत है।कबीरदास जो जिंदग़ी-भर अंधविश्वासों का विरोध करते रहे उनकी जब मृत्यु हुई तो उनके हिंदू और मुस्लिम शिष्य उनका अंतिम संस्कार अपने-अपने तरीक़े से करने के लिए लड़ने लगे। जब उन्होंने लाश पर से चादर हटाई तो नीचे से फूल निकल आए जिन्हें शिष्यों ने आधा-आधा बांट लिय...
कई बार सोचता हूं कि अगर मैं भी कभी जातिवादी, संप्रदायवादी, अंथ-पंथवादी, अगड़मवादी, बगड़मवादी होना चाहूं तो मेरे पास भी कोई ‘ढंग की उपलब्धियां’ हैं क्या! दूर-दूर तक कुछ नज़र नहीं आता। न कभी किसीको इसलिए फ़्रेंड-रिक्वेस्ट भेजी कि वो ग्रोवर है, न बाक़ी ज़िंदग़ी में किसीसे इस...
 पोस्ट लेवल : नास्तिकता
ईश्वर के होने या न होने पर आपको इंटरनेट पर ख़ूब विचार और बहसें दिखाई देंगे। प्रिंट मीडिया में भी मुख्यधारा के पत्र-पत्रिकाएं न सही, मगर बहुत-से अन्य पत्र-पत्रिकाएं इसपर विचार चलाते रहे हैं।मगर भारतीय फ़िल्में और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया !?ज़ाहिर है कि इस मामले में बुरी तर...
 लोग भगवान को मानते हुए भी नास्तिकों के खि़लाफ़ हैं, वे भगवान के ही खि़लाफ़ हैं। क्योंकि जिस भगवान की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता वो अगर न चाहता तो नास्तिक कैसे हो सकते थे ? और अगर भगवान चाहता है कि नास्तिक पृथ्वी पर हों तो आप क्यों चाहते हैं कि वे न हों?...
 महसूस तो करोमैंने उसे ख़ाली कप दिया और कहा,‘‘लो, चाय पियो।’’वह परेशान-सा लगा, बोला, ‘‘मगर इसमें चाय कहां है, यह तो ख़ाली है!’’‘‘चाय है, आप महसूस तो करो।’’‘‘आज कैसी बातें कर रहे हो, मैं ऐसे मज़ाक़ के मूड में बिलकुल नहीं हूं !?’’‘‘मज़ाक़ कैसा ? क्या ईश्वर मज़ाक़ है ?...
सलीम उस लड़के का नाम था जिसने मुझसे कहा कि ‘पैसे की तो कोई बात नहीं, आपकी जींस पर दो सुईयां टूट गईं हैं, उनके दो रुपए दे दो’। मुझे बात बहुत अच्छी लगी। जींस बहुत मोटे कपड़े की थी। सलीम उस वक़्त लड़का-सा ही था। छोटी-सी दुकान में दो मशीन लेकर बैठता था। उससे दोस्ती हो गई।...
भक्त बताते हैं कि गांधीजी धर्मनिरपेक्ष आदमी थे। आपको मालूम ही है आजकल भक्तों से तो भक्त भी पंगा नहीं लेते। लेकिन इससे एक बात पता लगती है कि धर्मनिरपेक्ष लोगों के भी भक्त होते हैं।मैंने सुना है कि ख़ुद गांधीजी भी राम के भक्त थे। हालांकि गांधीजी अहिंसक थे और राम तीर...