ब्लॉगसेतु

ख्वाबों मे वो हंस रही थी मैं भी मुस्कुरा उठी ख्वाबों मे वो गुदगुदा रही थीमै भी खिल खिला उठी ख्वाबों में वो हिम्मत दे रही थी मैं पंख फैला के उड़ीख्वाबों मे वो गा रही थीमैं भी गुनगुन उठी ख्वाबों मे वो ठुमक रही थी मैं भी थिरक उठीख्वाबों म...
मत करो मुझसे कोईभी प्रश्नमैं प्रश्नों से घिरीज़िन्दगी जीना नहीं चाहती।छटपटाती है ज़िन्दगीतो कोई भी पूछता नहींफिर क्यों टकटकी सीलगाते हो, जब कभीचेहरे पर मुस्कुराहटआती है पल भर के लिएछिपाये हैं मैंने आँसुओं केसैलाब, कई काली भीषण रातों,तरसते दिल में।- शबनम शर्मा
पानी की बूँदें कहें, मुझको रखो सहेज।व्यर्थ न बहने दो मुझे, प्रभु ने दिया दहेज॥बादल बरखें नेह के, धरा प्रफुल्लित होय।हरित चूनरी ओढ़ के, प्रकृति मुदित मन होय॥ ताल तलैया बावली, बनवाने का काम।पुण्य कार्य करते रहे, पुरखे अपने नाम॥निर्मल जल पीते रहे, दुनिया के सब लोग...
इश्क़ का शौक़ जिनको होता हैमौत का न ख़ौफ़ उनको होता हैघूमते फिरते हैं फ़क़त दर बदरये मर्ज़ न हर किसी को होता हैली होती है मंज़ूरी तड़पने कीमिला ख़ुदा से यही उनको होता हैचुनता है वो भी ख़ास बन्दों को हीइसलिये न जिसको तिसको होता हैसहरा की रेत हो या फ़ाँसी का फंदागिला कुछ भी न उन...
आवाज़ जोधरती से आकाश तकसुनी नहीं जातीवो अंतहीन मौन आवाज़हवा के साथ पत्तियोंकी सरसराहट मेंबस महसूस होती हैपर्वतों को लाँघकरसीमाएँ पार कर जाती हैंउस पर चर्चायें की जाती हैंपर रात के सन्नाटे मेंवो आवाज़ सुनी नहीं जातीदबा दी जाती हैसुबह होने परघायल परिंदे कीअंतिम साँस...
पागल है दिल संग यादों के निकल पड़ता है,चाँद का चेहरा देख लूँ नीदों में खलल पड़ता है।बिखरी रहती थी खुशबुएँ कभी हसीन रास्तों पर,उन वीरान राह में खंडहर सा कोई महल पड़ता है।तेरे दूर होने से उदास हो जाती है धड़कन बहुत,नाम तेरा सुनते ही दिल सीने में उछल पड़ता है।तारों को मुट्...
न संगीत, न फूलउसका हंसनायाद आ रहा हैसंगीत का बिखरनाऔर फूलों का झरनायाद आ रहा हैयाद आ रहा हैमेरा मर मिटनाउसकी उस दिलकश हंसी परऔर इसी के साथआ रहा है रोनाउसका दुखी, बीमारउदास होनाक्या बताऊंअखर रहा हैकिस क़दरकुछ इस क़दरकि न संगीत अच्छा लग रहा हैन फूल अच्छे लग रहे-केशव...
दरख़्तों पर नये पत्तेहरे होने लगे हैं लॉन चटखती महकती कलियाँ चमकती धूप, हल्की हल्की तपिश धीमे धीमे से बहती सर्द हवा खुला खुला सा नीला आकाश वापसी मौसमी परिंदों की गर्म कपड़ों में सैर करते बुज़ुर्गसब तरफ़ फूल खिलने वाले हैं मगर, अचानक,...
साँसों से नहीं जाती है जज़्बात की ख़ुशबूयादों में घुल गयी है मुलाकात की ख़ुशबूचुपके से पलकें चूम गयी ख़्वाब चाँदनीतन-मन में बस गयी है कल रात की ख़ुशबूनाराज़ हुआ सूरज जलने लगी धरा भीबादल छुपाये बैठा है बरसात की ख़ुशबूकल शाम ही छू गये अपनी आँखों से मुझेहोंठों में रच गयी तेर...
 पोस्ट लेवल : श्वेता सिन्हा
हजारों आँसू सैकड़ों गमआँखें नही दिल भी है नमआकर भर लो ना बाँहों मेतुम बिन तनहा रह गए हमवो क्या जाने इश्क का मतलबरोज बदलते हैं जो हमदमराख से हो सारे गए अरमाँदिल ये जला है मद्धम-मद्धमदर्द हुआ है कम सा अब तोबरसी है आँखे यूँ भरदम– रूचि शाही