ब्लॉगसेतु

तू नहीं, तेरा एहसास तो है।एक नूरानी चेहरा,दिल के पास तो है।तू न मिले फिर भी,तेरे दीदार की आस तो है।हम भी ख़ुश हैं ये सोचकर कि,कोई कहीं हमारा भी, ख़ास तो है।तुझे पाने की चाह से ही,जीवन में कुछ,हास-परिहास तो है।तेरी ही फ़िकर, हर दिन, हर पल,इसका गवाह,...
किसी  से आस तुझको गर नहीं हैतो दिल के टूटने का  डर नहीं  है,उसे रोता  हुआ देखा  किया मैंकहूँ  कैसे कि दिल पत्थर नहीं है,यक़ीं  जितना किया है मैंने तुझ परयक़ीं उतना  मुझे ख़ुद पर नहीं है,ये दिल क्या चीज़ है मैं जान दे दूँ,तेरी उल्...
क्या है मेरी बारी में।जिसे सींचना था मधुजल सेसींचा खारे पानी से,नहीं उपजता कुछ भी ऐसीविधि से जीवन-क्यारी में।क्या है मेरी बारी में।आंसू-जल से सींच-सींचकरबेलि विवश हो बोता हूं,स्रष्टा का क्या अर्थ छिपा हैमेरी इस लाचारी में।क्या है मेरी बारी में।टूट पडे मधुऋतु मधुवन...
 पोस्ट लेवल : हरिवंशराय बच्चन
क़ब्र में उतरते हीमैं आराम से दराज़ हो गयाऔर सोचायहाँ मुझेकोई ख़लल नहीं पहुँचाएगाये दो-गज़ ज़मीनमेरीऔर सिर्फ़ मेरी मिलकियत हैऔर मैं मज़े सेमिट्टी में घुलता मिलता रहावक़्त का एहसासयहाँ आ कर ख़त्म हो गयामैं मुतमइन थालेकिन बहुत जल्दये इत्मिनान भी मुझ से छीन लिया गयाहु...
इस रचना का प्रसंग है कि एक नवयुवती छज्जे पर उदास बैठी है। उसकी मुख-मुद्रा देखकर लग रहा है कि जैसे वह छत से कूदकर आत्महत्या करने वाली है। आदित्य जी ने इस प्रसंग पर विभिन्न कवियों की शैलियों में लिखा है:मैथिलीशरण गुप्तअट्टालिका पर एक रमिणी अनमनी सी है अहोकिस वेदना के...
मिट्टी से सोचआकाश की कल्पनावक़्त से लेकरहवा, धूप और बरसातउग आया हैशब्दों का अंकुरकागज़ की धरा परसमय के एक छोटे से कालखंड को जीताज़मीन के छोटे से टुकड़े परजगता और पनपताफिर भी जुड़ा हुआ हैअतीत और आगत सेमिट्टी कीव्यापकता से।-डॉ. प्रभा मुजुमदार
माँ का घर में होनाचौरे पर दीपकरोशन कोना-कोना।हर उफ़्फ़ पर आह भरेकितना बदलो तुममाँ की ममता ना मरे।दुख-दर्द सभी पीतीखोजे नेह सदाघर की ख़ातिर जीती।माँ छोड़ न तू डोरीबचपन ज़िंदा रखना मरने दे लोरी।माँ तेरे साय तलेलगते बिटिया कोतीज-त्योहार भले।-कृष्णा वर्मा
जल चढ़ायातो सूर्य ने लौटाएघने बादल ।तटों के पासनौकाएं तो हैं,किन्तुपाँव कहाँ हैं?ज़मीन परबच्चों ने लिखा'घर'रहे बेघर ।रहता मौनतो ऐ झरने तुझे देखता कौन?चिड़िया उड़ीकिन्तु मैं पींजरे मेंवहीं का वहीं !ओ रे कैक्टस बहुत चुभ लियाअब तो बस आपका नामफिर उसके बा...
इनकी ख़ुशबू से मुअत्तर है ये गुल्शन मेरा,मेरे बच्चों से महकता है नशेमन मेरा।खेलते देखती हूँ जब भी कभी बच्चों को,लौट आता है ज़रा देर को बचपन मेरा।मुझको मालूम है दरअस्ल है दुनिया फ़ानी,मोहमाया में गुज़र जाए न जीवन मेरा।तू जो आ जाए तो बरसात में भीगें दोनों,सूखा-सूखा ही गु...
यह नीर नहीचिर स्नेह निधिनिकले लेनप्रिय की सुधिसंचित उर सागरनिस्पंद भएसंग श्वास समीरनयनों में सजेयुग युग सेजोहें प्रिय पथ कोभए अधीरखोजन निकलेछलके छल-छलखनक-खन मोती बनगए घुल रज-कणएक पल में-दीपा जोशी