ब्लॉगसेतु

स्नेहाभिवादन !'सांध्य दैनिक मुखरित मौन" में  आप सभी रचनाकारों और पाठकों का हार्दिक अभिनन्दन !बहुत दिनों में आज मिली हैसाँझ अकेली, साथ नहीं हो तुम।पेड़ खडे फैलाए बाँहेंलौट रहे घर को चरवाहेयह गोधुली, साथ नहीं हो तुम,बहुत दिनों में आज मिली हैसाँझ अकेली, साथ नहीं ह...
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सादर अभिवादनसिलसिला अनवरत हुआ नही हैविविधता नही आ पाई है इस ब्लॉग मेंलगातार हम ही हम ही आ रहे हैंआज की प्रकाशित रचनाओं से कुछ पसंदीदा रचनाएँ...जश्न ए दोस्ती की कविताएँ....रास्ते पे चलती वह लड़कीचुपचाप हर नज़र को सहतीसर झुकाए, चुनर संभालेख़ुद अपने आप में सिमटती ...
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सादर अभिवादन..सर्व प्रथम राष्ट्र-शिल्पी प्रधान मंत्री  नरेन्द्र दामोदर मोदी जी को उनके जन्मदिवस पर शुभकामनाएँअब चलें रचनाओँ की ओर..कविता..!! ...प्रभात सिंह राणामैं शुष्क चिरागों की भाँति,वह मधुवन वृक्ष की छाया-सी।मैं ठोस-कठोर हूँ हाड़ सदृश,वह निर्मल-क...
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स्नेहाभिवादन !आज की सांध्य दैनिक प्रस्तुति में  सभी रचनाकारों और पाठकों का हार्दिक स्वागत !"समय भागता है प्रतिक्षण में,नव-अतीत के तुषार-कण में,हमें लगा कर भविष्य-रण में,आप कहाँ छिप जाता हैसब जीवन बीता जाता है'श्री जयशंकर प्रसाद जी की "सब जीवन बीता जाता है' कवि...
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सादर अभिवादन...कल हिन्दी दिवस था..किसी ने पूछा कल..कि हिन्दी को अंग्रेजी में क्या कहते हैं..मैं ?वाचक की तरह देखा..उसने स्वयमेंव कहा..जैसे अंग्रेजी को अंग्रेजी में इंग्लिश कहते हैं..अभी तक क्या लिखा गया है...एक नज़र..भय ...अर्चना तिवारीवृक्ष हो या कोई व्यक्तिकेवल स...
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स्नेहिल अभिवादन--------हिंदी दिवस में हिंदी का गुणगान करना सही है पर दूसरी भाषाओं को नकारना या विरोध करने से हिंदी का मान बढ़ जायेगायह गलतफहमी ही है।हम जड़ से हिंदी हैं सदा ही रहेगे।विशाल पीपल की तरह अपनी शाखाओं परविविध प्रकार के भाषायी जीवों पक्षियों कोहँसता-मु...
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स्नेहिल अभिवादनकल का दिनहिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाएगा..बस ...एक दिनलोग हिन्दी का गुण गाएँगेफिर जस का तस...देखें आज अब तक की प्रकाशित रचनाएँस्ट्रीट फूड सी चटपटी हिंदीस्ट्रीट फूड सी चटपटी हिंदी हिंदी दिवस पर विशेष हिंदी के कितने रूप देखने को मिल सकते हैं ये...
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स्नेहाभिवादन !आज की सांध्य दैनिक प्रस्तुति में  सभी रचनाकारों और पाठकों का हार्दिक स्वागत !"सूरज ने क्‍यों बंद कर लिया,अपने घर का दरवाजा़उसकी माँ ने भी क्‍या उसको,बुला लिया कहकर आजा।"स्मृति शेष महादेवी जी की प्रिय सखी सुभद्रा कुमारी चौहान जी की बालक सी इठलाती...
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सादर अभिवादनकल श्री गणेश जी की बिदाई हैभरे मन से उन्हें विदा करेंगेंपंडाल सारे खाली दिखेंगेखैर...आना-जाना तो लगा रहता हैमन में श्रीगणेश हरदम रहते हैंचलिए चलें रचनाओँ की ओर...छलावा ...अनुराधा चौहानरिश्तों का बंधन रिक्त हो रहा,सिर्फ दिखावा सिर उठाए चलता है।सच्चाई से...
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स्नेहिल अभिववादन------दामन काँटों से भरना क्यों?जीने के ख़ातिर मरना क्यों?रब का डर दिखलाने वालोंख़ुद के साये से डरना क्यों?★★★★★★आज शाम की रचनाएँ...हम शहरों से उबे हैंइच्छाओं पर अंकुश हैभोली-भाली सौ आंखें,दो बूंद धरा पर पड़तीसबको उग आतीं पांखें।हर शाम हवा चलती हैहर रा...
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